1 शमूएल 25:32 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

दाऊद ने अबीगैल से कहा, “इस्राएल का परमेश्‍वर यहोवा धन्य है, जिस ने आज के दिन मुझसे भेंट करने के लिये तुझे भेजा है।

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1 शमूएल 25:32 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 शमूएल 25:32 पर टिप्पणी

यह वाकya दाऊद के साथ अभिगैल के संवाद के दृश्यों में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। संदर्भ में, दाऊद ने अभिगैल के विचारशील बंधन से भेंट की और उसके भ्रातृ-यज्ञ के फलस्वरूप उसका आभारी रूप उसे प्रकट होता है। यह क्लेम-शक्ति और परमेश्वर की योजना के अनुरूप आशीष का संदेश है।

मुख्य विचार

जहाँ दाऊद ने अभिगैल से कहा, “इस्राएल का परमेश्वर यहोवा धन्य है, जिसने आज के दिन मुझसे भेंट करने के लिये तुझे भेजा है,” वहाँ अभिगैल के द्वारा दाऊद के प्रति आस्था, दया और परिवार-हित में साहस के साथ संवाद की स्थापना दिखाई देती है। यह वक्तव्य एक ईश्वर-कार्य के रूप में अभिगैल के भागीदारी को मान्यता देता है और दाऊद के भीतर एक नैतिक-धारणा की पुष्टि करता है: परमेश्वर ने उसे मानव-युद्ध में नहीं, बल्कि लोक-कल्याण के मार्ग में भेजा है।

दो-तीन प्रमुख विषय

  • परमेश्वर की कृपा संधर्श: दाऊद यहोवा के पक्ष को मान्यता देता है कि वह उसकी योजना में है और अभिगैल के माध्यम से उसे सहायता मिली है।
  • आश्वासन और कृतज्ञता: दाऊद का उच्चारण कृतज्ञता का संकेत है—एक व्यक्ति जो खतरे से घिरा है, वह भी परमेश्वर की योजना के अनुसार सुरक्षा पाने के लिए आभारी है।
  • यौन-नैतिकता नहीं, बल्कि नीतिगत सत्य: यह संवाद यह दिखाता है कि दाऊद का नियंत्रण और मार्गदर्शक-उद्देश्य परमेश्वर के निर्णयों पर आधारित है, न कि स्वार्थी लाभ पर।

क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त उल्लेख)

1) अभिगैल की वीरता और विवेक: बड़े संघर्ष में भी सचेत और परोपकारी निर्णय लेने की उसकी क्षमता दिखती है; यह दाऊद के साथ सहायक निर्णयों के लिए एक संकेत है।

2) दाऊद के परमेश्वर-आधारित नेतृत्व की पुष्टि: यह वाक्य दाऊद के धार्मिक-यकीन को मजबूत करता है कि उसकी विजय और सुरक्षा परमेश्वर की कृपा से है, न कि केवल शक्ति से।

3) मिथ्यों से परे हृदय-समझ: दोनों पक्षों में विवेक और नैतिक दायित्व की प्रधानता है, जो भविष्य के शांति-समझौते को प्रेरित करते हैं।

व्यावहारिक धर्म-जीवन पर प्रभाव

जो व्यक्ति भयानक परिस्थितियों में भी परमेश्वर की योजना की दिशा में काम करता दिखता है, उसे आशीष और शांति मिल सकती है। अभिगैल का संकेत यह है कि मानवीय सहायता और साहस के साथ, ईश्वर की रक्षा और योजना स्पष्ट होती है। विश्वासियों को यह सीख मिलती है कि कठिन समय में भी परमेश्वर की करुणा और मार्गदर्शन पर भरोसा रखना चाहिए, तथा दूसरों के साथ दया-वृत्ति बनाए रखनी चाहिए।

संक्षिप्त निष्कर्ष

1 शमूएल 25:32 में दाऊद का परमेश्वर-आशीर्वाद भरा अभिवादन यह दर्शाता है कि संकट की घड़ी में भी परमेश्वर की योजनाएं आगे बढ़ती हैं और उनके माध्यम से विश्वासियों के लिए सुरक्षा-निष्कर्ष निकलते हैं। अभिगैल के साथ यह संवाद दया, नैतिकता और ईश्वर के उद्देश्य के अनुरूप कदम उठाने की पुष्टि करता है।

महत्वपूर्ण उद्धरण (यदि उपलब्ध)

यहाँ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के मूल उद्धरण सीधे उद्धृत हैं तो नीचे संकेतित हैं।

उद्धरण (सार): “धन्य है वह जो परमेश्वर की सामर्थ्य से संचालित होता है, और जो अपनी यात्रा में उसकी योजना को मानता है।” (उद्धरण स्रोत से संक्षेपित सार)

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 शमूएल 25:32 समानांतर पद और संबंधित वचन

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“धन्य है यहोवा, जिसने तुमको फ़िरौन और मिस्रियों के वश से छुड़ाया, जिसने तुम लोगों को मिस्रियों की मुट्ठी में से छुड़ाया है।

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