1 शमूएल 25:36 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब अबीगैल नाबाल के पास लौट गई; और क्या देखती है, कि वह घर में राजा का सा भोज कर रहा है। और नाबाल का मन मगन है, और वह नशे में अति चूर हो गया है; इसलिए उसने भोर का उजियाला होने से पहले उससे कुछ भी न कहा।

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1 शमूएल 25:36 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 शमूएल 25:36 — नाबाल और अबीगैल की वापसी का क्षण

घटना एक राजनीतिक संकट के बाद की कहानी है: डायोटी राजा डीलों से बचने के लिए अभिश्य अबीगैल नाबाल के पास लौटी और घर में राजा के भोज का दृश्य दिखा। नाबाल के पति नाबाल था, जो दुष्ट और अत्यन्त गरिष्ठ नशे में था; ऐसी स्थिति में उसने कोई चेतावनी या बातचीत नहीं सुनी।

Immediate setting and what the text reveals about God or faith

पद यह संकेत देता है कि ईश्वर की योजना व्यक्ति-व्यक्तियों के कर्म से चलते है। अबीगैल की चतुराई, करुणा और विश्वास ने एक कठिन क्षण में भी परमकृपया को सामने रखा। नाबाल का दुष्कर्मपूर्ण नशा और हठ इस परिप्रेक्ष्य में एक प्रतीक है कि बिना ईश्वर के मार्गदर्शन के शक्ति और क्रोध से भरे हुए निर्णय नुकसान पहुँचाते हैं। परमेश्वर न्याय और दया के परिप्रेक्ष्य में नाबाल के बिना चेतावनी के अभिनयों के बारे में नहीं चूकते; वह उस परिस्थिति को मोड़ने की ओर मार्गदर्शित करता है, जैसे भविष्य में दीनता और बुद्धिमत्ता से काम लेने से बधनों को तोड़ सकता है।

Key words and images clarified

  • भोर का उजियाला — नया दिन, नया अवसर; लेकिन यहाँ यह चेतावनी देता है कि आधे-अधूरे निर्णयों के कारण सुनहरा अवसर भी खो सकता है।
  • भोजन/राजा का भोज — बाहरी महत्त्वपूर्णता के बीच आंतरिक नैतिकता बनाए रखना अनिवार्य है; भलीभाँति परिणाम देखने को मिलते हैं जब सत्ता-उत्सव के पीछे नैतिक विवेक न छूटे।
  • नाबाल का नशा — अति-आत्म-स्वामित्व और असत्य बड़े जोखिम का कारण बनते हैं; यहाँ उसका दिमागी नियंत्रण न होना भविष्य के निर्णयों पर प्रभाव डालता है।

Related passages (cross-references) with brief notes

• सुलैमन 2:1-3: निष्कर्ष की आशा और विवेक की महत्ता; परिश्रमपूर्वक आस्था में स्थिर रहने का आग्रह।

• निर्गमन 34:6-7: परमेश्वर का करुणा और दया, परन्तु न्याय के साथ—विपत्ति के बीच भी धर्मनिष्ठता बनाए रखने की सीख।

• रोम25:7-9: सभी में प्रेम और धैर्य का भाव, सामाजिक विवेक से प्रेरणा।

Present-day application

आज हम ऐसे समय में हैं जब सफलता-प्राप्ति के उत्सवों के बीच नैतिक दायित्वों को न भूलना पड़े। यदि किसी परिस्थिति में गलत व्यक्ति के साथ या गलत मंच पर निर्णय लेने का दबाव हो, तब सन्नाटा नहीं, परिशुद्ध विवेक जरूरी है। नाबाल के साथ घटनाक्रम से सीखने का मुख्य पाठ यह है कि बाहरी शोबा-शालीनता के पीछे सच-आर्थिक सोच, दया और धर्मनिष्ठता को मुखर रखना चाहिए। अवश्य करें: - विवेक से पूछें: यह निर्णय क्या परमेश्वर की इच्छा के अनुकूल है? - दबाव के समय शांत रहें और भरोसेमंद सलाह लें। - दया और सुरक्षा के संतुलन को न खोएं; अहंकार से बचें।

Notes on quotations

नीचे केवल उन विभूतियों के छोटे-छोटे उद्धरण उपलब्ध हैं जो सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों से सीधे लिए गए हैं, परंतु यहाँ मौलिक पाठ का समन्वय है:

यदि विस्तार में उद्धरण के लिए आवश्यकता हो, तो मैंMatthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke आदि के संकुलीय विचारों से संक्षिप्त संकेत प्रदान कर सकता हूँ।

संकीर्ण निष्पादन: अबیगैल की प्रतिक्रिया और निर्णय-नीति एक ऐसी नैतिक मिसाल बनती है जिसमें ईश्वर की योजना मानवीय हेरफेर के बावजूद सिद्ध होती है—यही विश्वास की तरक्की है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 शमूएल 25:36 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और उसने अपने जवानों से कहा, “तुम मेरे आगे-आगे चलो, मैं तुम्हारे पीछे-पीछे आती हूँ;” परन्तु उसने अपने पति नाबाल से कुछ न कहा।

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2 शमूएल 13:23 (HINIRV) »
दो वर्ष के बाद अबशालोम ने एप्रैम के निकट के बाल्हासोर में अपनी भेड़ों का ऊन कतरवाया और अबशालोम ने सब राजकुमारों को नेवता दिया।

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तब अबशालोम ने अपने सेवकों को आज्ञा दी, “सावधान रहो और जब अम्नोन दाखमधु पीकर नशे में आ जाए, और मैं तुम से कहूँ, 'अम्नोन को मार डालना।' क्या इस आज्ञा का देनेवाला मैं नहीं हूँ? हियाव बाँधकर पुरुषार्थ करना।”

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