1 शमूएल 25:38 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और दस दिन के पश्चात् यहोवा ने नाबाल को ऐसा मारा, कि वह मर गया।

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1 शमूएल 25:38 पद-दर-पद बाइबल टीका

स्पष्ट संदर्भ: 1 शमूएल 25:38 (Hinirv)

इस पद-चिह्न में देव यहोवा का क्रोध और न्याय साबुत रूप से प्रकट होता है, जब नाबाल पराक्रमी धनी और कटुसुलभी पेमहल के कारण दुष्टों के हाथों होने वाले अन्याय के प्रतिशोध के रूप में मरता है। कुछ दिनों पश्चात् यहोवा ने उसे मारा, और यह घटना दुष्टों के दुष्कर्मों के परिणामस्वरूप उद्धृत एक कड़ी चेतावनी के रूप में उभरती है कि परमेश्वर बिना विचलित न्याय करता है।

क्यों यह पाठ महत्वपूर्ण है: परमेश्वर का स्वभाव और विश्वास

यह पंक्ति दिखाती है कि ईश्वर अधिकारपूर्ण न्याय का धारी है। नाबाल (या नाबाल) – जो धन-लिप्सा और बद्मानी के साथ सुलह-घात के पक्ष में था – उसकी मृत्यु ईश्वर की योजना और नियंत्रण के अंतर्गत होती है। विश्वास में यह संदेश है कि प्रभु उन लोगों से भी आक्रमण नहीं झेलते जो निर्दोषों पर अत्याचार करते हैं; कृपा के साथ-साथ न्याय भी उसके चाल-चलन का हिस्सा है। यह हमें सच्चे विश्वास की दिशा में प्रेरित करता है कि हम अपनी राह सच और ईमानदारी की रखें, क्योंकि ईश्वर का हर कदम न्यायपूर्ण होता है।

शब्दों और चित्रों पर संकेत

  • यहोवा ने मारा: यह कहने से कि परमेश्वर ने किसी को मारा, यह दर्शाता है कि उसकी सत्ता और न्याय क्षणभर में भी बदल नहीं सकते।
  • दिए गए समय-चक्र: दस दिन के अंतर के बाद मृत्यु का होना संकेत है कि परमेश्वर की दूरी से नहीं, बल्कि कारण-परिणाम के अनुसार कार्य होता है।

संबंधित बाइबिल अंश (Cross-references) और उनकी सार-संभावना

1) मृत्यु का न्याय: प्रेरित-रोमियों 12:19 (अनुवादित संदर्भ) — परमेश्वर ही प्रतिशोध देता है; उसे हमें न्याय की चिंता से मुक्त रहने की सीख मिलती है।

2) धैर्य और विवेक: याकूब 1:19-20 — क्रोध से नहीं, परिपक्वता से व्यवहार करना चाहिए; अपने आप को नियंत्रण में रखना परमेश्वर की इच्छा के अनुकूल है।

3) दया और न्याय का संतुलन: नीति-सभापति 3:34-35 (उद्धृत संदर्भ) — परमेश्वर के समय-चक्र में दया और न्याय दोनों संतुलित रहते हैं।

एवं एक समरूप पाठ-सार (एकीकृत कथन)

यह पाठ बताता है कि प्रभु का न्याय समय-समय पर प्रकटन होता है, जब अधर्म हावी रहता है और कमजोर-परिश्रमियों पर अत्याचार किया जाता है। नाबाल की मृत्यु इस बात का संकेत है कि धन-लोलुपता और निर्दयता अन्ततः परमेश्वर के हाथों में है। साथ ही यह भी है कि विश्वासियों के लिए ईश्वर के न्याय पर भरोसा रखना चाहिए, भले ही समय-सीमा में गलत लोग सफल दिखाई दें।

आज के जीवन के लिए अनुप्रयोग

  • सीख: परमेश्वर के न्याय के समय की चिंता छोड़कर, अपने आचरण को सत्य और ईमानदारी पर टिकाएं।
  • कर्म-प्रतिफल: धैर्य रखें और उचित कारणों से प्रभु के मार्ग पर चलते रहें, भले ही असमर्थ दर्शक उसे अन्याय मानें।
  • यहोवा पर भरोसा: क्रोध में नहीं, बल्कि विश्वास और दया के मार्ग पर जीवन बिताएं।

सूक्ष्म उद्धरण (हितकारी विचार)

यदि आवश्यक हो, यह पंक्ति उसी सन्देश की पुष्टि के रूप में उद्धृत की जा सकती है: “यहोवा ने नाबाल को ऐसा मारा, कि वह मर गया।” (1 शमूएल 25:38)

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 शमूएल 25:38 समानांतर पद और संबंधित वचन

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