Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 23:1 2 शमूएल 23:2 2 शमूएल 23:3 2 शमूएल 23:4 2 शमूएल 23:5 2 शमूएल 23:6 2 शमूएल 23:7 2 शमूएल 23:8 2 शमूएल 23:9 2 शमूएल 23:10 2 शमूएल 23:11 2 शमूएल 23:12 2 शमूएल 23:13 2 शमूएल 23:14 2 शमूएल 23:15 2 शमूएल 23:16 2 शमूएल 23:17 2 शमूएल 23:18 2 शमूएल 23:19 2 शमूएल 23:20 2 शमूएल 23:21 2 शमूएल 23:22 2 शमूएल 23:23 2 शमूएल 23:24 2 शमूएल 23:25 2 शमूएल 23:26 2 शमूएल 23:27 2 शमूएल 23:28 2 शमूएल 23:29 2 शमूएल 23:30 2 शमूएल 23:31 2 शमूएल 23:32 2 शमूएल 23:33 2 शमूएल 23:34 2 शमूएल 23:35 2 शमूएल 23:36 2 शमूएल 23:37 2 शमूएल 23:38 2 शमूएल 23:39



2 शमूएल 23:3 पर टिप्पणी – एक धारणा और न्याय की मिसाल
पाद के अनुसार, इस्राएल के परमेश्वर ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में एक धर्मी पुरुष होगा जो प्रभु fear नहीं करेगा, बल्कि परमेश्वर का भय मानकर न्याय करेगा। यह वाक्यांश सत्ता और नैतिक प्रतिबद्धता की एक गहरी धारणाओं को समेटे हुए है: प्रभुता और धर्मसत्ताएं किस दिशा में चलें, और किस प्रकार एक व्यक्ति अपने वर्षों में परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप शासन कर सकता है। यह उद्धार-परक दायित्व, पवित्रता और अलौकिक मानक की पुष्टि करता है।
Verse के भीतर पठन-योग्यता
इस्राएल के परमेश्वर ने यह कहा कि “इस्राएल की चट्टान ने मुझसे बातें की हैं”—यह रूपक है कि ईश्वर के साथ व्यक्तियों के अनुभव और इतिहास की गहराई से सत्य उभर कर आता है। आगे कहा गया है कि “मनुष्यों में प्रभुता करनेवाला एक धर्मी होगा,” जो परमेश्वर का भय मानते हुए प्रभुता करेगा। यहाँ प्रमुख बात यह है कि गुणी शासन वही मनुष्य करेगा जो भय और निष्ठा के साथ परमेश्वर के मार्ग पर चले।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
– यीशुदेव के समय तक यह दुरुपयोग-रहित शासन के मानक की अपेक्षा करता है: सत्य, निष्पक्षता और ईश्वर-भय का संयोजन।
अन्य पवित्र ग्रंथों के साथ तुलना
- समान विचारधारा: प्रस्तावना में डायरेक्टर-प्रभुता के साथ धर्म और भय के संयोजन पर एक समान संदेश मिलती है; दाऊद/यहोवा की व्यवस्था पर विचार करते समय पुराने नियम में भी “ईश्वर-भय” को उच्चतम नैतिक मानक के रूप में माना गया है (प्रेरित-उद्धरण नहीं दिया जा सकता, परन्तु संदर्भ यही संकेत देता है)।
परिच्छेद: व्यवहारिक अनुप्रयोग
1) व्यक्तिगत जीवन में: हर स्थिति में परमेश्वर के भय के साथ निर्णय लें—न्याय और करुणा के बीच संतुलन बनाए रखें।
2) नेतृत्व में: समूह की भलाई के लिए निष्पक्ष और सत्य के साथ मार्गदर्शन करें; भ्रष्टाचार या दमन के बजाय दया और सत्य का प्रदर्शन करें।
3) समाज-नीति: शासन में ईमानदारी, दुष्कृत्रिमता से परहेज़ और पूर्वजों की याद में न्यायपूर्ण सिद्धांतों को आगे बढ़ाएं।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में)
– न्याय और भय: कुछ स्थानों पर परमेश्वर के भय को नैतिक धुरी माना गया है; यह विचार अन्य ग्रंथों में भी आत्म-नियंत्रण और सत्य के साथ शासन की प्रेरणा देता है।
– धार्मिक नेता का दायित्व: धर्मी नेतृत्व वही है जो जनता के पक्ष में न्याय और पवित्रता को बनाए रखे।
– ईश्वर-योजनाओं की तैयारी: भविष्य में सही नेतृत्व के लिए आस्थावान समुदाय का निर्माण आवश्यक है।
संक्षेप निष्कर्ष
यह प verses यह स्मरण कराता है कि परमेश्वर के मानक के अनुसार शासन करने वाला वही होगा जो भय, विश्वास और सत्य के साथ जीवन जीता है। धर्मी नेता की भूमिका केवल अधिकार लेने तक सीमित नहीं, बल्कि आचरण और न्याय की विशाल सार्वजनिक प्रयोगशाला बन जाती है।
पूर्व-तुलना से उद्धरण
मिश्रित धारणा के अनुसार, इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसे कॉमेन्टेटर्स के योगित विचारों की भूमिका है, परन्तु यहाँ सीधे उनके पूरे टेक्स्ट का उद्धरण नहीं किया गया है। यदि आप चाहें, मैं उनके संक्षिप्त-उद्धरणों को संदर्भित तरीके से संक्षेप में दे सकता हूँ।