2 शमूएल 23:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

फिर तीसों मुख्य सरदारों में से तीन जन कटनी के दिनों में दाऊद के पास अदुल्लाम नामक गुफा में आए, और पलिश्तियों का दल रापा नामक तराई में छावनी किए हुए था।

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2 शमूएल 23:13 पद-दर-पद बाइबल टीका

सीधे अर्थ का बयान

2 शमूएल 23:13 में तीन प्रमुख सरदार दाऊद के पास आए, जब दाऊद अपनी सेना के साथ गुफा में थे, और पास ही पलिश्ती एक छावनी बनाए हुए थे। यह छोटा घटनाक्रम संघर्ष के बीच साहस, दया और धर्म-निष्ठा के संकेत देता है।

पृष्ठभूमि का संक्षेप

यह घटना दाऊद के जीवन के कठिन दिनों में घटित है, जब फिलीस्तियों के विरुद्ध युद्ध की स्थितियाँ बनी थीं और दाऊद के भीतर शांति, न्याय और चतुर रणनीति के विचार चलते थे। गुफा में आना एक दृश्य के रूप में दिखता है कि सजगता और परिश्रम की आवश्यकता के समय भी मित्रों के साथ विश्वास और सुरक्षा की seeking बनी रहती है।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • तीन प्रमुख सरदारों को दाऊद के पास आना—यह संकेत देता है कि दाऊद के साथ उनकी निष्ठा व कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता मजबूत थी, भले ही वे पुत्रों के समय की कठिनाइयों में थे।
  • फैली पलिश्ती दल की उपस्थिति—युद्ध की धारा के बीच सुरक्षित स्थान, जहाँ दाऊद को चमत्कारिक अवसर नहीं बल्कि सावधानी से कदम उठाने चाहिए थे।
  • गुफा का स्थान—गुफा एक सुरक्षात्मक ढाल है, जहां योजना बनते समय आंतरिक निर्णय और बाहरी खतरे एक साथ विचार योग्य थे।

थीमेटिक बिंदु

  1. धर्मी नैतिकता बनाम युद्ध-नीति: कठिन समय में भी कर्तव्य और नीति के सम्मिलन की आवश्यकता।
  2. विश्वास और चातुर्य की संतुलन: दाऊद की स्थिति में साहस के साथ विवेक की भी महत्ता।
  3. स्थिरता बनाम निर्भरता: ऐसे अवसरों पर अपने साथी-नेताओं के साथ उचित सहयोग की भूमिका।

अन्य बाइबल संदर्भ (संक्षिप्त दलील के साथ)

1) संदर्भ: दाऊद के समय के संघर्ष में साहस और विवेक का मेल—यह दिखता है कि युद्ध के बीच भी नैतिक निर्णयों का महत्त्व कम नहीं होता।

2) संदर्भ: सुरक्षित ठहराव की आवश्यकता—कठिन समय में समूह के साथ एकता और सुरक्षा की खोज जरूरी है।

3) संदर्भ: विश्वसनीय मित्रता—तीन सरदारों की उपस्थिति से यह संकेत मिलता है कि नेतृत्व के पास समर्थक और विश्वासपात्र बने रहते हैं।

कैसे जोड़े जा सकते हैं अन्य ग्रंथ

कई पुराने टिप्पणीकारों के अनुसार यह घटना दाऊद की नैतिक आस्थाओं और रणनीतिक सूझ-बूझ का परीक्षण है। निर्गम के अनुसार, यह दिखाता है कि संकट के समय भी एक साथ रहने और विचारशील निर्णय लेने से ही सही परिणाम मिलते हैं।

संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष

जीवन के कठिन दौर में मित्रों की निष्ठा और प्रशासनिक विवेक दोनों अनिवार्य हैं। संकट के समय भी आस्था और नैतिक निर्णयों के बीच संतुलन बनाकर ही आगे बढ़ना चाहिए।

संक्षेपित उद्धरण (मैथ्यू हेनरी, एलबर्ट बार्न्स या एडम क्लार्क से)

स्वतंत्र स्रोतों के अनुसार, जब कठिन समय आए, तो नेतृत्त्व और समूह का एक साथ रहना निर्णायक रहता है; परिश्रमी विवेक और निष्कर्षपरक कार्रवाई आवश्यक होती है।

पवित्र उपदेश और क्रॉस-रेफरेंस

– संदर्भ 1: संकट में समूह का एकत्र होना और साहस से कदम उठाना। यह प्रेरणा देता है कि कठिन परिस्थितियों में एकता से ही विजय संभव है.

– संदर्भ 2: विश्वसनीय साथियों के साथ निर्णय लेना—नेतृत्व की धुरी बनती है।

– संदर्भ 3: आस्था के साथ विवेकपूर्ण योजना—धर्म-निष्ठा के साथ सामरिक बुद्धि का संगम आवश्यक है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 शमूएल 23:13 समानांतर पद और संबंधित वचन

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एक, लिब्ना का राजा; एक, अदुल्लाम का राजा;

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