Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 23:1 2 शमूएल 23:2 2 शमूएल 23:3 2 शमूएल 23:4 2 शमूएल 23:5 2 शमूएल 23:6 2 शमूएल 23:7 2 शमूएल 23:8 2 शमूएल 23:9 2 शमूएल 23:10 2 शमूएल 23:11 2 शमूएल 23:12 2 शमूएल 23:13 2 शमूएल 23:14 2 शमूएल 23:15 2 शमूएल 23:16 2 शमूएल 23:17 2 शमूएल 23:18 2 शमूएल 23:19 2 शमूएल 23:20 2 शमूएल 23:21 2 शमूएल 23:22 2 शमूएल 23:23 2 शमूएल 23:24 2 शमूएल 23:25 2 शमूएल 23:26 2 शमूएल 23:27 2 शमूएल 23:28 2 शमूएल 23:29 2 शमूएल 23:30 2 शमूएल 23:31 2 शमूएल 23:32 2 शमूएल 23:33 2 शमूएल 23:34 2 शमूएल 23:35 2 शमूएल 23:36 2 शमूएल 23:37 2 शमूएल 23:38 2 शमूएल 23:39



2 शमूएल 23:21 का अर्थ
यह पद बताता है कि बनयाह ने एक रूपवान मिस्री को मारा, जिसे उसने भाला लिए देखा था, पर बनायाह लाठी लेकर उसके पास गया और मिस्री के हाथ से भाला छीनकर उसी के भाले से उसे घात किया। इसका तात्पर्य है कि वह युद्ध-क्षण के साहस और भरोसे का प्रतीक है: भले ही शत्रु के हथियार मजबूत हों, परमेश्वर के लिए एक विश्वासयोग्य व्यक्ति अपनी निर्बलताओं पर भी विजय प्राप्त कर सकता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह शमूएल के दाऊद के समय का संदर्भ है, जब शब्तियों के युद्धों के बाद दाऊद के सेनानी (नेतृत्व) सक्रिय रहते थे। बनायाह एक वीर योद्धा थे; यह घटना उनके धैर्य और निर्भयता को दर्शाती है जब जीवन के जोखिमों में भी वे धर्म के प्रति निष्ठावान रहे।
व्याख्यात्मक अवलोकन
छोटा थीमैटिक लिस्ट
अन्य पाठों से संबंधित संदर्भ
आप इस घटना की भावना को अन्य स्थानों से जोड़कर देख सकते हैं:
व्यावहारिक निष्कर्ष
जीवन के संघर्षों में हमें यह याद रखना चाहिए कि वीरता केवल भौतिक शस्त्र से नहीं आती, बल्कि विश्वास, परमेश्वर की सहायता की प्रतीक्षा, और अपनी जिम्मेदारी के लिए अटल रहने से आती है। जब परिस्थितियाँ भारी हों, तब भी धैर्य और दृढ़ निष्ठा के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके तात्पर्य
यहाँ 2-3 संबंधित संदर्भ छोटे निहितार्थ के साथ दिए गए हैं: दाऊद के समय के साहस और परमेश्वर-आस्था की गहराई को दिखाते हैं; इनसे यह समझ में आता है कि संकट के समय भगवान की शक्ति भरोसेमंद मार्गदर्शक है, न कि हमारी शारीरिक समर्था।
नोट: इस पाठ के लिए उपलब्ध सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के विचारों को समायोजित करके एक संयोजन बनता है; यदि चाहिए तो मैं Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संक्षिप्त उद्धरणों को यहाँ शामिल कर सकता हूँ, लेकिन वर्तमान सार में उनकी मूलभावना का संगत समाहित किया गया है।
उद्धरण-योग्यता: यदि आप चाहें तो मैं इन पाठकों के मूल-उद्धरणों का संक्षेप में उल्लेख भी कर दूँगा।