Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 23:1 2 शमूएल 23:2 2 शमूएल 23:3 2 शमूएल 23:4 2 शमूएल 23:5 2 शमूएल 23:6 2 शमूएल 23:7 2 शमूएल 23:8 2 शमूएल 23:9 2 शमूएल 23:10 2 शमूएल 23:11 2 शमूएल 23:12 2 शमूएल 23:13 2 शमूएल 23:14 2 शमूएल 23:15 2 शमूएल 23:16 2 शमूएल 23:17 2 शमूएल 23:18 2 शमूएल 23:19 2 शमूएल 23:20 2 शमूएल 23:21 2 शमूएल 23:22 2 शमूएल 23:23 2 शमूएल 23:24 2 शमूएल 23:25 2 शमूएल 23:26 2 शमूएल 23:27 2 शमूएल 23:28 2 शमूएल 23:29 2 शमूएल 23:30 2 शमूएल 23:31 2 शमूएल 23:32 2 शमूएल 23:33 2 शमूएल 23:34 2 शमूएल 23:35 2 शमूएल 23:36 2 शमूएल 23:37 2 शमूएल 23:38 2 शमूएल 23:39



2 शमूएल 23:6 — संदिग्धों की परछाइयाँ
यह पंक्ति विशिष्ट वीरों के चरित्र पर नहीं, बल्कि सामन्ती राजनीति और अचल विश्वास के बीच छल-छायाओं को उभारती है। संदर्भ में, डेविड के समय के कुछ लोग ऋण-चक्र और शासक के प्रतिनिधित्व के पीछे छिपे हुए अनैतिक गठजोड़ों की ओर इशारा करते हैं। इस Verse में “परन्तु ओछे लोग सब के सब निकम्मी झाड़ियों के समान हैं जो हाथ से पकड़ी नहीं जातीं” कहना एक प्रकार की चेतावनी है कि शत्रु किस प्रकार भीतर तक फैलते हैं, और उनके छोड़े हुए दुष्प्रभाव कभी-कभी पकड़ में नहीं आते।
ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से मिलने वाला चित्र
यह पंक्ति स्पष्ट करती है कि परमेश्वर की दृष्टि में सत्य-निष्ठा, ठोस नीति-निष्ठा और न्यायप्रिय व्यवहार ही दृढ़ जीवन-सार हैं। “निकम्मी झाड़ियाँ” का चित्र दिखाता है कि कुछ शक्तियाँ या लोगों के समूह जो असत्य और धोखे से जुड़े होते हैं, वे सामाजिक और नैतिक प्रगति के लिए नुकसानदेह हैं। परन्तु परमेश्वर उन सब पर दृष्टि रखता है जिन्हें प्रायः भुला दिया जाता है, और उनके विरुद्ध सच्चाई की पूँछ उठा देता है।
मुख्य शब्दों और छवियों की स्पष्ट व्याख्या
अन्य समान संदर्भ
कई बार युवा राजा और उसकी सेना के भीतर विचलन आते हैं, जब लोग दिखावे के पीछे दबे सच को नहीं देखते। कठिनाइयों के बीच सत्य के पदचिन्हों की सुरक्षा का संदेश बार-बार आता है:
क्रॉस-रेफरेंस और सरल निष्कर्ष
यहोशू 24:15 जैसे ठोस निर्णय से जीवन के पथ स्पष्ट होते हैं कि हम किन झाड़ियों के बीच जाकर भी सत्य से नहीं समझौता करते। अन्य समयों में प्रेरितों के संदेशों में भी धोखे से बचकर ईमानदारी की राह चुनने का आग्रह है।
आज के लिए उपयोगी अनुप्रयोग
उद्धरणीय प्रशंसापत्र (public-domain) से प्रेरित विचारधारा: प्राकृतिक पाठ में हल्के-फुल्के संकेत मिलते हैं कि शक्तिशाली उपायों के पीछे परोपकार और न्यायपूर्ण आचरण आवश्यक हैं।
Related verses for reflection: 1) कर्म의 फल और सत्य की सुरक्षा के लिए प्रेरणा; 2) निरर्थक दबाव के स्थान पर सत्य की वकालत; 3) दृढ़ निष्ठा के साथ ईश्वर के साथ संबंध बनाए रखना।