Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 23:1 2 शमूएल 23:2 2 शमूएल 23:3 2 शमूएल 23:4 2 शमूएल 23:5 2 शमूएल 23:6 2 शमूएल 23:7 2 शमूएल 23:8 2 शमूएल 23:9 2 शमूएल 23:10 2 शमूएल 23:11 2 शमूएल 23:12 2 शमूएल 23:13 2 शमूएल 23:14 2 शमूएल 23:15 2 शमूएल 23:16 2 शमूएल 23:17 2 शमूएल 23:18 2 शमूएल 23:19 2 शमूएल 23:20 2 शमूएल 23:21 2 शमूएल 23:22 2 शमूएल 23:23 2 शमूएल 23:24 2 शमूएल 23:25 2 शमूएल 23:26 2 शमूएल 23:27 2 शमूएल 23:28 2 शमूएल 23:29 2 शमूएल 23:30 2 शमूएल 23:31 2 शमूएल 23:32 2 शमूएल 23:33 2 शमूएल 23:34 2 शमूएल 23:35 2 शमूएल 23:36 2 शमूएल 23:37 2 शमूएल 23:38 2 शमूएल 23:39



2 शमूएल 23:7 — संदर्भ और अर्थ
यह पाठ शमूएल के बाद के समय की सेना-आचार की एक कठोर प्रतिज्ञा है, जहाँ दास-निर्वासन के बाद के आख्यान में युद्ध-सम्बन्धी व्यवस्था और कर्तव्य की बात उभरती है। इस पद में प्रतीकात्मक भाषा के साथ उन लोगों के बारे में कहा गया है जो परमेश्वर की पवित्रता और सेना की शुद्धता के विरुद्ध जाते हैं; वे अत्यधिक सुरक्षा और कठोर दंड के पात्र माने जाते हैं क्योंकि उनका उद्देश्य परमेश्वर के पवित्र कार्यों में बाधा डालना है।
मूल संदेश का केंद्रीय अर्थ
पद यह इंगित करता है कि जो लोग परमेश्वर के काम को छेड़ते हैं, उन्हें विशेष दंड मिलेगा—लोहे और भाले की छड़ से सज्जित होकर, और अंत में जला कर नष्ट किया जाएगा। यह एक तीखी चेतावनी है कि पवित्र स्थानों, पवित्र संकल्पों तथा ईश्वर के चयनित कार्यों के विरुद्ध टकराने वालों को बिना नम्रता के दबाने की आवश्यकता पड़ सकती है।
मुख्य थीम्स
संबद्ध अनुभागीय पाठ
यह पाठ एक कठोर दंड-प्रणाली में भय और सम्मान दोनों का संयोजन प्रस्तुत करता है। अन्य अनुभागों में पवित्रता के लिए समर्पण और विश्वास की आवश्यकता पर बल दिया गया है, ताकि परमेश्वर के उद्देश्य संघर्ष के बिना आगे बढ़ें।
संबद्ध क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप में)
रेफरेंस की संक्षिप्त व्याख्या—ये विचार इस समय के चरित्र-आचरण और परमेश्वर के उद्देश्य की सुरक्षा से जुड़ते हैं, ताकि समझ में आये कि क्यों कड़े कदम उठाए जाते थे।
व्यावहारिक चिंतन
आधुनिक पाठकों के लिए यह दर्शाता है कि जब किसी चीज़ की पवित्रता खतरे में हो, तब सावधानी, ईमानदारी, और समुदाय के प्रति जिम्मेदारी आवश्यक हो जाती है। भाषा की कठोरता के पीछे उद्देश्य स्पष्ट है: परमेश्वर की योजना को बाधित करने वालों से सुरक्षित दूरी रखना। हमारी नैतिक नीति में भी यह सीख है कि निर्गमन और दुष्कर्म के विरुद्ध स्पष्ट रुख अपनाने में हिचक नहीं होनी चाहिए, ताकि साहस और सत्य Yerful बने रहें।
संक्षिप्त समापन
2 शमूएल 23:7 एक कठोर चेतावनी के रूप में सामने आता है—जो परमेश्वर के काम में रुकावट डालते हैं, उन्हें सख्त दंड का सामना करना पड़ता है। यह पाठ समय की कठोरता नहीं, बल्कि पवित्रता की सुरक्षा और ईश्वर के उद्देश्य की दृढ़ता है।
प्रमुख उद्धरण (प्राचीन संतों से)
यह पंक्ति kendi के भीतर सीधे उद्धरण नहीं है, पर Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke जैसे पवित्र-ग्रंथ टिप्पणीकारों के बतौर स्थानीय संदर्भ में वे पवित्रता और दंड के नियमों पर समान ध्वनि में विचार व्यक्त करते हैं; नीचे उनके प्रमुख विचारों का सार है हैं: