Old Testament
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पढ़ना-पढ़ाउन: यशायाह 27:4 पर एक संक्षिप्त मार्गदर्शन
इस वाक्य में ईश्वरे का दृढ़ सामर्थ्य और दया दोनों उभर कर आती है। यशायाह नबी इस अध्याय में इस्राइल के लिए एक सुरक्षित भविष्य की आशा दिखाते हैं: परमेश्वर ही वह कवच है जो भंवरों और युद्धों के समय में भी अपनी प्रजा की रक्षा करता है। यह वचन पहले से भरे हुए कठिन संघर्षों के बीच भी परमेश्वर की संतुलित न्याय और करूणा को मान्यता देता है।
पदाचा-परिचय (यशायाह 27:4, HINIRV)
“मेरे मन में जलजलाहट नहीं है। यदि कोई भाँति-भाँति के कटीले पेड़ मुझसे लड़ने को खड़े करता, तो मैं उन पर पाँव बढ़ाकर उनको पूरी रीति से भस्म कर देता।”
प्रमुख आध्यात्मिक पाठ
यह वचन परमेश्वर की आक्रामकता को नहीं, बल्कि उसकी निर्णायक सुरक्षा और न्याय को दर्शाता है। परमेश्वर की जलजलाहट यह बताती है कि वह अत्याचार और विद्रोह के सामने निष्क्रिय नहीं रहता; वह अपने लोगों की रक्षा के लिए कदम उठाता है। साथ ही यह संदेश देता है कि प्रतिशोध केवल वही कर सकता है जो समुचित शक्तिशक्ति और पवित्रता से युक्त हो।
चर्चित संदर्भों के साथ तुलना
मुख्य शिक्षण
1) परमेश्वर की सुरक्षा सबल है—वह अपने लोगों के विरुद्ध उठने वाले संघर्षों को सहन नहीं करते; वे उसे भरोसे के साथ पुकारें तो वह प्रत्यक्ष क्रिया कर के न्याय और रक्षा देता है।
2) दया बनाम क्रोध: वह क्रोध को गलत कामों के विरुद्ध प्रयोग करते हैं, परन्तु रक्षित लोगों के लिए तलवार नहीं, संतुलित क्रिया प्रदान करते हैं—धैर्य और पवित्रता के साथ।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
क्रॉस-रेफरेन्स (संक्षिप्त संदर्भ और अर्थ)
- इस्राइल की सुरक्षा के बारे में अन्य संकेत: परमेश्वर की ओर से दिया गया उद्धार-पथ, जब मानवीय शक्ति विफल हो।
- दया और न्याय का संतुलन: korkutucu प्रतिहिंसा के स्थान पर स्पष्ट उद्देश्य के साथ संरक्षण।
- विश्वासी जन के लिए आशा: कठिन समय में भी परमेश्वर की प्रतिज्ञा बनी रहती है।
संक्षेप निष्कर्ष
यशायाह 27:4 में परमेश्वर अपनी प्रजा के लिए ऐसी सुरक्षा व्यक्त करते हैं जो खतरे के सामने भी स्थिर रहती है। यह बताता है कि परमेश्वर की जलजलाहट जब आवश्यक हो, वह सत्य, पवित्रता और न्याय के साथ सक्रिय होता है ताकि भले की राह कायम रहे।
उद्धरण नोट
इस commentary में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से सीधे उद्धरण शाब्दिक शब्दों में दिए गए हो तो वे संक्षेप में संकेतित हैं।