Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66



यशायाह 27:11 — तूट जाने पर शाखाओं का अवसान
पध्यामूर्ति: यह पद यरूशलेम के आसपास के खेत-फसल के प्रतीक के रूप में एक कठोर कार्रवाई को दर्शाता है। यह उस समय की स्थिति का चित्रण है जब शाखाएँ सूख जाती हैं और फिर उन्हें तोड़कर जलाने की आवश्यकता पड़ती है। यहाँ प्रभु के न्यायगत निर्णय और आत्म-चेतना की कमी के कारण अवाचक लोगों के प्रति दया और अनुग्रह नहीं दिख रहा।
क्या कहता है परमेश्वर के बारे में पाठ
यह पाठ परमेश्वर की सच्चाई, न्याय और सख्त प्रशासन का संयोजन प्रस्तुत करता है। जब लोग निर्बुद्धि होकर पथ से भटकते हैं और परिणामस्वरूप उनके कर्मों का दुष्प्रभाव दिखाई देता है, तब प्रभु की व्यवस्था की कठोरता और उसकी अनुकम्पा दोनों–दोनों स्थितियाँ स्पष्ट होती हैं। यह बताता है कि God की दृष्टि में दया तब संभव है जब अवाम नये मन से लौटकर उद्धार की राह पकड़ती है; अन्यथा कड़वी रीत उन्हें परिणामस्वरूप भुगतने होंगे।
महत्त्वपूर्ण शब्द और दृश्य-व्याख्या
अन्य उद्धृत विचारक और संगति
यह अंश मॉत्थ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायनात्मक रचनात्मक दृष्टिकोण के अनुरूप है। वे इस प्रकार से संकेत करते हैं कि परमेश्वर की कठोरता तब तक रहती है जब तक अवाम पश्चात्ताप नहीं करता; परन्तु जब वे हृदय से लौट आते हैं, तब उसकी दया और अनुग्रह पुनः प्रकाशित होते हैं।
मैथ्यू हेनरी से संक्षिप्त संकेत: “कड़वा न्याय, परन्तु उद्धार की उम्मीद भी साथ-साथ रहती है” (संक्षेपित विचार).
एलबर्ट बार्न्स से संक्षिप्त संकेत: यह दृश्य अलंघन-उत्पन्न परिणामों की चेतावनी है—यही कारण है कि अस्मिता से बचने के लिए विवेक और पश्चात्ताप अनिवार्य है।
एडम क्लार्क से संक्षिप्त संकेत: यह दिखाता है कि परमेश्वर की योजनाओं में अवाम की असावधानी के परिणाम नहीं रहते; परन्तु वह भी उद्धार के मार्ग खोलने के लिये तैयार रहता है जब लोग मन बदल लेते हैं।
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनका संक्षेप
1) योशुआ 24:14-15 — सचेत होकर choosing किए गए मार्ग की महत्ता; इस्राएल को चेतावनी कि अपने देवता के प्रति समर्पण जीवन की दिशा तय करता है।
2) यह्रेम 12:10 — प्रभु की सजा और पालन-पोषण दोनों का उद्देश्य; धैर्यपूर्वक सुधार के लिए दंड और पालन।
3) हबक्कुक 2:3 — दूरगामी समय में परमेश्वर की वाणी सच निकलती है; धीरज धारण करने वालों के लिए आशा की राह खुलती है।
आज की जीवनी-प्रयोगिता
- निष्क्रियता और निर्बुद्धि यदि बढ़े, तो समाज में क्षय आ सकता है; हमारे व्यक्तिगत जीवन में यह स्पष्ट है कि विश्वास के पथ पर लौटना और परमेश्वर के क्रोध से बचना तब संभव जब दिखाई दे अपनी कमियों को स्वीकार कर नया कदम उठाएं।
- परिवार, समुदाय, और देश में नैतिक जीवन की संवेदना बनाए रखें—जगह-जगह चेतावनियाँ मिलती हैं कि आत्म-चेतना और पश्चात्ताप से ही परमेश्वर की दया फिर से प्रवाहित होती है।