यशायाह 27:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उस समय बड़ा नरसिंगा फूँका जाएगा, और जो अश्शूर देश में नाश हो रहे थे और जो मिस्र देश में बरबस बसाए हुए थे वे यरूशलेम में आकर पवित्र पर्वत पर यहोवा को दण्डवत् करेंगे। (मत्ती 24:31)

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यशायाह 27:13 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 27:13 का संदर्भ और भावार्थ

यशायाह 27:13 वह विशेष क्षण बताता है जब परमेश्वर के उद्धार का नक्शा पूरे राष्ट्रों के लिए स्पष्ट हो जाएगा। यहां “उस समय बड़ा नरसिंगa फूँका जाएगा” कहकर धार्मिक आलोड़न और यहूदी-व्यवस्था के भीतर मान्यता प्राप्त संघर्षों के बाद एक सामान्य नागरिक के स्तर पर भी परमेश्वर की विजय की आशा दी गई है। यह धीमी प्रतीक्षा के बाद की ताजा चेतना है: इज़राएल के लक्ष्य के साथ-साथ अन्य राष्ट्र भी यहोवा को दंडवत करेंगे। संदर्भ में यह नवीनीकरण और विश्व-पर्व की झलक दिखाता है कि परमेश्वर की योजना सीमाओं के पार फैलेगी।

केंद्रीय अर्थ

यह वाक्य दो दृश्य संकेत देगा: एक भीतर का उद्धार और एक बाहरी खेबुलता—यही λόγος है कि अश्शूर और मिस्र, जो उनके समय के बड़े शक्तिशाली विरोधी थे, अंततः विश्वास के केंद्र यरूशलेम में आकर यहोवा की आराधना करेंगे। यहूदी पीढ़ी के लिए यह आश्वासन है कि दुष्ट शासन के विरुद्ध भी परमेश्वर के सुरक्षित नापाकरण से बाहर नहीं निकल पाएंगे; उद्धार की कड़ी में वे भाग्यशाली बनेंगे जो दयालु परमेश्वर के सामने सिर झुकाते हैं।

मुख्य विषय

  • विश्व-उद्धार और राष्ट्र-चेतना: यह संदेश बताता है कि परमेश्वर की प्रतिज्ञा केवल एक देश तक सीमित नहीं, बल्कि सभी जातियों के लिए खुले हैं.
  • यरूशलेम का महत्त्व: पवित्र पर्वत पर दण्डवत् करने की क्रिया यह दर्शाती है कि परमेश्वर का मंदिर और उसकी सत्ता संसार के केंद्र में है।
  • न्याय और चंगाई का क्रम: नाश और ब敵ों के परास्त होने के बाद आस्था का पलटना विश्वासयोग्य परिणाम है।

सम्बद्ध उपदेश (cross-references) – संक्षिप्त लिंक और अर्थ

नीचे तीन संदर्भ दिए जा रहे हैं, जो इस दृश्य को अन्य भागों से जोड़ते हैं:

  • यशायाह 2:2–3 – सब राष्ट्रों के पवित्र पर्वत पर आकर यहोवा के राज्य की प्रतिष्ठा का वर्णन, जो विश्व-शांति की दिशा दिखाता है।
  • यशायाह 11:10 – मसीही उद्धार के विश्वव्यापी संदर्भ को रेखांकित करता है कि यहूदियों के साथ-साथ अन्य जातियाँ भी मनोसिंह के आशीर्वाद से लाभान्वित होंगी।
  • मत्ती 24:31 – युवाओं को चिह्नित करने वाला उद्धार का विभाजन, जो बड़े दिये में से चुने हुए लोगों को घर-घर पहुँचाने की तस्वीर देता है।

इन संदर्भों से प्रमुख संदेश स्पष्ट होता है कि परमेश्वर की योजना विश्वव्यापी है और आस्था के केन्द्र के रूप में यरूशलेम की भूमिका अनिवार्य है।

प्रायोगिक चिंतन

हम कैसे इस आश्वासन को आज अपने जीवन में लागू करें? यहोवा की योजना के अनुरूप जीवन जीना—जहां हम भी लोगों से प्रेम, समानता और सत्य की राह में अग्रसर हों। परिश्रम, न्याय और शांति के लिए प्रयास करना; साथ ही परमेश्वर के बड़े कार्य में अपनी भूमिका ढूंढना भी एक नैतिक दायित्व है।

संक्षिप्त समापन

यशायाह 27:13 में परमेश्वर की उद्धार-सिद्धि एक विश्व-जन के लिए खुली है। अश्शूर और मिस्र के प्रतिरोध के बावजूद यहोवा का शासन स्थिर है, और अंततः सभी जातियाँ यरूशलेम में आकर उसकी आराधना करेंगी। यह वाक्य प्रेरणा देता है कि इतिहास के आख्यान में परमेश्वर की अदालत, चंगाई, और प्रेरणात्मक आह्वान बराबर रहते हैं।

सूत्रधार टिप्पणी के लिए उद्धृत पूर्व-प्रकाशनों में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संकेतित संक्षिप्त पाठ आवश्यक स्थानों पर नीचे संयुक्त संदर्भ के रूप में समाहित किए गए हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 27:13 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और वह तुरही के बड़े शब्द के साथ, अपने स्वर्गदूतों को भेजेगा, और वे आकाश के इस छोर से उस छोर तक, चारों दिशा से उसके चुने हुओं को इकट्ठा करेंगे।

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उस समय मिस्र से अश्शूर जाने का एक राजमार्ग होगा, और अश्शूरी मिस्र में आएँगे और मिस्री लोग अश्शूर को जाएँगे, और मिस्री अश्शूरियों के संग मिलकर आराधना करेंगे।

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