Old Testament
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यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
यिर्मयाह 10:1 यिर्मयाह 10:2 यिर्मयाह 10:3 यिर्मयाह 10:4 यिर्मयाह 10:5 यिर्मयाह 10:6 यिर्मयाह 10:7 यिर्मयाह 10:8 यिर्मयाह 10:9 यिर्मयाह 10:10 यिर्मयाह 10:11 यिर्मयाह 10:12 यिर्मयाह 10:13 यिर्मयाह 10:14 यिर्मयाह 10:15 यिर्मयाह 10:16 यिर्मयाह 10:17 यिर्मयाह 10:18 यिर्मयाह 10:19 यिर्मयाह 10:20 यिर्मयाह 10:21 यिर्मयाह 10:22 यिर्मयाह 10:23 यिर्मयाह 10:24 यिर्मयाह 10:25



यिर्मयाह 10:25 का अर्थ
इस पद का तात्पर्य ईश्वर की प्रकोप-भरी जलजलाहट से है, जो उन जातियों पर है जो उसे नहीं जानतीं और जो उसकी प्राथनाओं में सहभागी नहीं होतीं। यिर्मयाह नबी की समयावस्था में यह चेतावनी है कि परमेश्वर की क्रोध उन लोगों पर टूटेगी जो याकूब के साथ अन्याय करते हैं और उसकी पवित्रता को नहीं मानते।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यिर्मयाह का वक्त बर्तानी साम्राज्य के संकट के दौरान है; धार्मिक जागरण, पाप की निर्थकता और राष्ट्र-चिंतन की कमी तीव्र है। यहाँ प्रभु अपने नाम-भक्तों के साथ-साथ उन राष्ट्रों पर भी दृष्टि डालते हैं जो याकूब (इस्राइल) को अपनी आशीषों में शामिल नहीं करते, बल्कि उनके विरुद्ध कृत्यों में लगे रहते हैं। भज 79:6-7 के संदर्भ से यह उद्धृत किया गया है कि अन्यजातियाँ भी प्रभु के क्रोध की लपटों से बच नहीं पातीं, जब वे अपने दयालु परमेश्वर को नहीं जानतीं।
व्यावहारिक समझ और विश्लेषण
संबद्ध अंश (संक्षिप्त व्याख्या)
Cross-reference 1: भज 79:6-7 — प्रेषित चेतावनी में भी अन्य राष्ट्रों के विरुद्ध परमेश्वर की चर्चा मिलती है कि वे खुद को सुरक्षित मानकर नहीं चलते, क्योंकि वे उसकी कृति और न्याय से विमुख हैं।
Cross-reference 2: यिर्मयाह 7:9-11 — पापनिष्ठता और आराधनात में असमान्य भेदभाव से निपटते हुए नबी यह बतलाते हैं कि परमेश्वर उन स्त्री-पुरुषों के लिए क्रोध नहीं टिकते जो अपने हृदय को चीन्हे बिना ढोंग करते हैं।
Cross-reference 3: इब्रानियों 12:29 — परमेश्वर का प्रेम और पवित्रता का प्रभाव एक साथ आता है, और यह याद दिलाता है कि हमारा जीवन परमेश्वर के सामने पवित्र और विनम्र होना चाहिए।
छोटा निष्कर्ष और व्यावहारिकApplications
इस पद से सीख मिलती है कि किसी भी राष्ट्र के लिए सतर्कता, दया, और न्याय की निरंतरता आवश्यक है। परमेश्वर के नाम से विमुख रहने पर प्रकोप और आंसू नहीं टलते। व्यक्तिगत स्तर पर यह चेतावनी हमें याद दिलाती है कि प्रार्थना में सत्यता, आंतरिक परिवर्तन, और ईश्वर की महिमा के लिए समर्पण जरूरी है।
टेक-अप प्वाइंट (संक्षिप्त)
नीचे दिए गए उद्धरण, जो प्रसिद्ध सार्वजनिक-डोमेन टीकाओं से प्रेरित हैं, निष्कलंक टिप्पणियाँ नहीं हैं, पर मूल विचार की पंक्तियों को संजोते हैं:
Matthew Henry: “Let not the nations presume to provoke God, for he will not be mocked.”
Albert Barnes: “God’s wrath is revealed against all ungodliness and unrighteousness of men.”
Adam Clarke: “Divine justice is steadfast; those who oppress the weak must answer to Him.”