Old Testament
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यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52



यिर्मयाह 12:5 — तत्कालीन संदेश और आज के पाठ के लिए संकेत
पद्य: तू जो प्यादों ही के संग दौड़कर थक गया है तो घोड़ों के संग क्यों बराबरी कर सकेगा? और यद्यपि तू शान्ति के इस देश में निडर है, परन्तु यरदन के आस-पास के घने जंगल में तू क्या करेगा?
पेड-स्थिति और तत्कालीन संदर्भ
यिर्मयाह नबी अपने कठिन समय में परमेश्वर के संदेश को मानने की कसौटी पर हैं। इस छायामय लतीन में प्रभु अपने दूत-नबी को एक कठोर परंतु वास्तविक प्रश्न देते हैं: अगर तू असल संकट के बीच भी घोड़े पर भरोसा नहीं कर सकता, तब तू बच्चों के संग दौड़ने पर कैसे टिकेगा? वह मार्गदर्शन, जो लगता है आरामदायक भूमि में तू शांत और निर्भीक है, असल संघर्ष के दौर में नहीं टिक सकता। यह संदेश छिपे खतरे और साहस के मापदंडों की याद दिलाता है—कब और जहां हमें असली ताकत और भरोसा कहाँ रखना चाहिए?
ईश्वर और आस्था के बारे में जो पाठ प्रकट करता है
गहराई से देखें तो यह वाक्य हमें यह बताता है कि ईश्वर की सहायता और आस्था का दायरा बाहरी आराम या शारीरिक शक्तियों पर निर्भर नहीं होता। यदि एक व्यक्ति बाहरी सुरक्षा से थाम ले, किन्तु आंतरिक विश्वास, धैर्य और परमेश्वर-परक नेतृत्व से चूक जाए, तो वास्तविक सफलता कभी भी गारंटीकृत नहीं। यिर्मयह, जो एक कठिन समय में प्रभु के वचनों के साथ खड़ा है, उसे याद दिलाया गया है कि जहाँ बाहरी आराम है, वहाँ भी आस्था की निर्णायक कसौटी अलग हो सकती है।
शब्दों और imagery की स्पष्टता
अन्य संदर्भगत पाठ
यह विचार यूहन्ना-परिकल्पना नहीं, परिशुद्धता के साथ अन्य पदों में भी आता है:
आज के लिए अनुप्रयोग
संश्लेषित टिप्पणी
यह पाठ एक ही समय में चेतावनी और आश्वासन देता है। नबी को जो स्थिति दी जाती है, उसमें वास्तविक शक्ति परमेश्वर के साथ रहने में है, न कि केवल बाहरी ताकत में। यिर्मयाह जैसे विश्वासियों के लिए यह पुकार है कि वे कठिन परिस्थितियों में भी परमेश्वर के मार्ग पर टिके रहें—चाहे प्रत्यक्ष सुरक्षा कितनी भी विपरीत क्यों न हो।
संक्षेप उद्धरण—ऐतिहासिक टिप्पणीकारों से
यह भाग संबंधित विचारधाराओं के लिए निर्माण करता है; CD की धारा में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संक्षिप्त उद्धरणों के तौर पर:
Matthew Henry: “तू जो प्यादों ही के संग दौड़कर थक गया है...” (अनुवादित सार)”
Albert Barnes: “जो बड़ी शक्तियों के बिना भी परमेश्वर की सहायता पर टिके रहना सीखे, वही सच्चे युद्ध-जिताऊ बनता है।”
Adam Clarke: “आन्तरिक साहस और विश्वास बाहरी संकट के ऊपर विजय पाते हैं।”