Old Testament
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यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
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यिर्मयाह 17:24—सुनने की महत्ता और विश्राम के नियम
यह पद यहोवा के वचन की महत्त्वपूर्ण ध्वनि को संबोधित करता है—कि यदि लोग सचमुच प्रभु की आवाज़ सुनें, तो वे विश्राम के दिन नगर के फाटकों के भीतर बोझ उठाने, कार्य-धर्म करने, और रीति-रिवाजों को बनाए रखने जैसी व्यावहारिकताओं पर सावधानी बरतेंगे। यहाँ विश्राम दिवस का उद्देश्य अकेले विश्राम नहीं, बल्कि आध्यात्मिक संदेश की प्राप्ति है: प्रभु के निर्देशों के अनुरूप जीवनचर्या।
पद का पारायण विचार (खंडानुसार दृश्य)
यिर्मयाह के इस भाग में ईश्वर अपने लोगों से अपेक्षा करते हैं कि वे उनकी वाणी सुनें और उसे मानें। विश्राम के दिन विश्राम को पवित्र मानना एक सार्वजनिक संकेत है कि यह शहर और उसका समाज परमेश्वर के साथ एक विशेष, नियमित सम्पर्क में है। यदि वे इस बुलाहट का पालन करते हैं, तो नगर के सभी प्रवेशद्वारों, खासकर फाटकों में, एक सुव्यवस्थित, मान्यताप्राप्त जीवन-यात्रा दिखेगी—जो अन्य राष्ट्रों के बीच में भी परमेश्वर के सच को स्पष्ट करेगा।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अनुभूति-संबंधी टिप्पणी और अन्य दृष्टांत
इस संदर्भ में परमेश्वर ऐसे समाज की मांग करते हैं जो उनके वचन के साथ अपनी सार्वजनिक जीवन-नीति को संबद्ध करे। यह विचार अन्य पवित्र शास्त्रों में भी मिलता है, जहाँ सूचना और क्रिया के संयोग को महत्व दिया गया है—जैसे क्योंकि प्रभु के आह्वान पर चलते हैं, तब समाज का आचरण और लक्ष्य सुसंगत रहता है।
2-3 क्रॉस-रेफरेंसेज़ और संक्षेप स्पष्टीकरण
- इब्रानियों 4:9-10: विश्राम का आध्यात्मिक अर्थ—परमेश्वर के विश्राम में प्रवेश, कर्म-उद्धार नहीं बल्कि विश्रामकारी पालन।
- दानिय्येल 9:27: विश्राम के समय का नियम और उसके पवित्र आवाहन का परिप्रेक्ष्य; धर्म और देश-जीवन के बीच संतुलन का संकेत।
- योशू 1:8: पवित्र शास्त्रों को मनन और कर्म में उतारना—युवा और वृद्ध सभी के लिए एक समान मार्गदर्शक।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
आज के संदर्भ में इस पद से जो स्पष्ट सीख मिलती है, वह यह है: परमेश्वर की वाणी को ध्यानपूर्वक सुनना और उसे अपने दैनिक जीवन में लागू करना। कठिन समय में भी विश्राम के दिन को एक पवित्र–आश्वासन के रूप में देखना—जो आध्यात्मिक जागरण, बढ़ती विनम्रता, और समुदाय के भीतर सहयोग को बढ़ावा दे।
संक्षेप सार
यिर्मयाह 17:24 में कहा गया है कि यदि लोग सचमुच परमेश्वर की वाणी सुनें और विश्राम के दिन को पवित्र मानें, तो नगर के फाटकों में顺 अनुशासित जीवन, और प्रार्थना-सम्पर्क जैसी सार्वजनिक पहचान बनेगी। यह निर्देश केवल धार्मिकता की रीति नहीं, बल्कि समाज के लिए एक संरचनात्मक निर्देश है—क्योंकि वाणी+आचरण मिलकर सच को प्रकट करते हैं।
यस के साथ जुड़े सूत्ररूप उद्धरण (यदि उपयोग किए गए हों):
मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बARNES, एडम क्लार्क की संकलित टिप्पणी से क्रॉस-उद्धरण संक्षेप में समाहित किया गया है; यदि बाहर निकलते शास्त्र के शब्द सीधे उद्धृत हों, तो वे बिल्कुल संक्षेप में संकेतित हैं।