Old Testament
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यिर्मयाह 17:1 यिर्मयाह 17:2 यिर्मयाह 17:3 यिर्मयाह 17:4 यिर्मयाह 17:5 यिर्मयाह 17:6 यिर्मयाह 17:7 यिर्मयाह 17:8 यिर्मयाह 17:9 यिर्मयाह 17:10 यिर्मयाह 17:11 यिर्मयाह 17:12 यिर्मयाह 17:13 यिर्मयाह 17:14 यिर्मयाह 17:15 यिर्मयाह 17:16 यिर्मयाह 17:17 यिर्मयाह 17:18 यिर्मयाह 17:19 यिर्मयाह 17:20 यिर्मयाह 17:21 यिर्मयाह 17:22 यिर्मयाह 17:23 यिर्मयाह 17:24 यिर्मयाह 17:25 यिर्मयाह 17:26 यिर्मयाह 17:27



यिर्मयाह 17:14 का तात्पर्य: चंगा कर, तब मैं चंगा हो जाऊँगा
यिर्मयाह ने ईश्वर के सामने अपनी निर्भरता और यकीन को शब्दों में रखा है: “हे यहोवा मुझे चंगा कर, तब मैं चंगा हो जाऊँगा; मुझे बचा, तब मैं बच जाऊँगा; क्योंकि मैं तेरी ही स्तुति करता हूँ।” यह वाक्य एक व्यक्तिगत प्रार्थना है जो आस्था, सत्यनिष्ठा और निर्भरता के एक साथ प्रकट होने को दर्शाती है।
परिवेश का छोटा परिचय
यिर्मयाह का संदर्भ उनका है जो देश-निर्माण, धर्म-व्यवस्था और आस्था के संकट के बीच परमेश्वर के साथ अपने संबंध को बनाए रखना चाहते हैं। यह वाक्य उनके उस अभिमुख आत्म-समर्पण की अभिव्यक्ति है, जिसमें वे भय, असफलता और निर्भरता के बीच भी परमेश्वर के नित्य समर्थन पर भरोसा करते हैं।
ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से संकेत
यह वाक्य तीन भागों में ईश्वर की भूमिका को केंद्रित करता है: चंगा करना, बचाना और स्तुति करना। परमेश्वर चंगा करने वाला है; यह आशा है कि कठिनाई में भी रोग की शक्ति से ऊपर उसकी कृपा है। बचाने वाला वही है जो हर परिस्थिति में सुरक्षा देता है। और अंततः, जीवित विश्वास वही है जो परमेश्वर की स्तुति के रूप में प्रकट होता है। यह संदेश यह भी बताता है कि हमारी आध्यात्मिक חיים में चिकित्सा और उद्धार एक साथ आते हैं—पहले हमारे मन का इलाज, फिर हमारे व्यवहार की सुरक्षा।
महत्वपूर्ण शब्दों व छवियों की स्पष्ट व्याख्या
अनुकरणीय क्रॉस-रेफरेंस
1) यिर्मयाह 30:17 — परमेश्वर रोग-चंगाई और उद्धार की विशेष कृपा का आश्वासन देता है। यह संकेत देता है कि ईश्वरीय उपचार व्यवहारिक और आध्यात्मिक दोनों तरह का हो सकता है।
2) भजन 147:3 — “जो टूटे दिलों को चंगा करता है”— यह उद्धार और चिकित्सा की व्यापक समझ को दर्शाता है कि परमेश्वर हमारे दुरूह अनुभवों में भी प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
3) यशायह 41:10 — निरंतर संरक्षण और सहायता की वायदा; डर नहीं, क्योंकि परमेश्वर साथ है।
पाठ–व्यवहार में आधुनिक अनुप्रयोग
आज के कठिन समय में भी यह प्रार्थना स्मरण कराती है कि परमेश्वर हमारे भीतर की कसौटियों में भी सक्रिय है—चाहे वह भीतर का भ्रम हो या बाहर का संकट। विश्वासयोग्यता के कारण, हम भी अपने प्रार्थनों को स्पष्ट कर के कहते हैं: माँगते समय आत्म-निर्भरता से ऊपर, परमेश्वर की कृपा पर भरोसा। इस विश्वास के साथ चलते हुए उसे स्तुति दें, चाहे रोग हो या सुरक्षा; क्योंकि हमारा ध्यान उनकी स्तुति पर होना चहिए, न कि uniquement परिस्थिति पर।
सार-सार
यिर्मयाह 17:14 एक जीवंत प्रार्थना है जो यह प्रकट करती है कि चंगाई और उद्धार ईश्वर की कृपा से आते हैं, और इसी विश्वास के कारण व्यक्ति परमेश्वर की स्तुति से अपने जीवन को दिशा दे सकता है।
यह टिप्पणी 19वीं-20वीं सदी के सार्वजनिक-डायरेक्टेड पब्लिक-डोमेन टीका-लेखकों की धाराओं से प्रेरित विचारों को समाहित कर एक संक्षिप्त, प्रवाहपूर्ण पुनरावलोकन प्रस्तुत करती है—जहाँ मैथ्यू हेन्ली, अर्ल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के कुछ नुस्खे, जहाँ भी उपयुक्त रहे, संवेदी तौर पर एकीकृत किए गए हैं।