Old Testament
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यिर्मयाह 23:17 — तिरस्कारियों से भविष्यवक्ताओं की बात
इस पद के पास-आसपास का सेटिंग: यिर्मयाह नबी ने उन झूठे भविष्यद्वक्ताओं के बारे में सख्ती से चेतावनी दी है जो जनता को बतलाते हैं कि सब कुछ अच्छा होगा—भले ही परमेश्वर का पंच-प्रहार मूल समस्या नहीं सुधरती है। यहाँ “जो लोग मेरा तिरस्कार करते हैं उनसे ये भविष्यद्वक्ता सदा कहते रहते हैं” का अर्थ है—राज्य और धर्म के नेता, जनसमुदाय के बीच कुछ लोग परमेश्वर के विरुद्ध निर्णय लेकर अपने शब्दों से रोगनात्मक आश्वासन फैलाते हैं। वे अपने तुच्छ हितों के कारण सच से दूर हट जाते हैं और लोगों को भ्रमित करते हैं।
क्या यह पाठ परमेश्वर के बारे में बताता है?
यह पाठ स्पष्ट करता है कि परमेश्वर हर समय अपने लोगों के साथ है और उनके कल्याण की चिंता करता है, किन्तु वह उन झूठे भविष्यद्वक्ताओं को भी पहचानता है जो सत्य को दबाते हैं। नबी यिर्मयाह ने यह दिखाने की कोशिश की है कि सत्य की निंदा करने वाले लोग अक्सर दूसरों को यह विश्वास दिलाते हैं कि विपत्ति नहीं पड़ेगी, पर असल में परमेश्वर क्या कहता है—कट्टरता और हठ के कारण लोग अपने पापों के परिणाम से दूर नहीं रहते।
महत्वपूर्ण शब्द और चित्र
संबद्ध पद और उनके संबंध
यिर्मयाह के साथ यह मुद्दा कई बार उठता है कि झूठे भविष्यद्वक्ता कैसे लोगों के विश्वस्त विश्वास को मूर्तिभंग कर देते हैं। इसके साथ कुछ अन्य संदर्भ भी दिखाते हैं कि परमेश्वर सत्य के मार्ग पर चलने वालों को कैसे आशीष देता है, बल प्रदान करता है और पाप के परिणामों से बचाता है:
इन संदर्भों में यह समझ आता है कि परमेश्वर अपने लोगों की रक्षा के लिए सच्चे और ठहरे हुए मार्ग की मांग करता है, झूठ के तिलस्म से नहीं।
आज के जीवन पर लागू करने योग्य निष्कर्ष
1) सावधान रहें कि क्या आप भी सुनते समय खुशी-खुशी राहत पाने के झूठे वादे स्वीकार कर लेते हैं या सच को प्राथमिकता देते हैं।
2) अपनी आस्था के आधार की जाँच करें: क्या हम परमेश्वर के सत्य के साथ चल रहे हैं, या अपनी सुविधा के अनुसार मार्ग चुनते हैं?
3) समुदाय के नेता और शिक्षकः सत्य के साथ प्रत्यक्ष और स्पष्ट संवाद करें; प्रेम में भी सजग रहें कि लोगों को भ्रमित न किया जाए।
इस पाठ के प्रमुख संदेश में दो बातें साफ हैं: परमेश्वर के कल्याण का वादा सत्य है, पर वह उन पर लागू होता है जो उसकी आवाज पर चलना चुनते हैं; और झूठे वादे से लोगों को गुमराह करने वाले अवसरवादी संदेशों पर न चले जाएँ।
उद्धरण-नोट
नोट: नीचे दिए गए वक्तव्यों में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से सीधे शब्द उद्धृत हैं, यदि उपलब्ध हैं:
• Adam Clarke का सारगृह बतलाता है कि झूठी शांति की बात करने वाले न केवल भौतिक सुख के दावे करते हैं, बल्कि आस्था के परीक्षण से भागते हैं।
• Albert Barnes ने ध्यान दिलाया है कि सच से दूर रहना आत्मिक खतरे का संकेत है और भविष्यद्वक्ताओं के दावे असली परिणामों से भटकाते हैं।
• Matthew Henry का संकेत है कि जब नबी सत्य के मार्ग के विपरीत बोलते हैं, तब उनका उद्देश्य जन-कल्याण नहीं, बल्कि अपनी सत्ता-धर्मिता sustains होता है।
Cross-references के व्यावहारिक लिंक: यिर्मयाह 23:16–18 (झूठे डर और असत्य के घोषणाओं की पहचान), प्रेरितों के काम 20:29–30 (झूठे शिक्षक कितना खतरा बनते हैं), यूहन्ना 16:13 (सत्य धीरे-धीरे दिखेगा।)