Old Testament
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यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
यिर्मयाह 23:1 यिर्मयाह 23:2 यिर्मयाह 23:3 यिर्मयाह 23:4 यिर्मयाह 23:5 यिर्मयाह 23:6 यिर्मयाह 23:7 यिर्मयाह 23:8 यिर्मयाह 23:9 यिर्मयाह 23:10 यिर्मयाह 23:11 यिर्मयाह 23:12 यिर्मयाह 23:13 यिर्मयाह 23:14 यिर्मयाह 23:15 यिर्मयाह 23:16 यिर्मयाह 23:17 यिर्मयाह 23:18 यिर्मयाह 23:19 यिर्मयाह 23:20 यिर्मयाह 23:21 यिर्मयाह 23:22 यिर्मयाह 23:23 यिर्मयाह 23:24 यिर्मयाह 23:25 यिर्मयाह 23:26 यिर्मयाह 23:27 यिर्मयाह 23:28 यिर्मयाह 23:29 यिर्मयाह 23:30 यिर्मयाह 23:31 यिर्मयाह 23:32 यिर्मयाह 23:33 यिर्मयाह 23:34 यिर्मयाह 23:35 यिर्मयाह 23:36 यिर्मयाह 23:37 यिर्मयाह 23:38 यिर्मयाह 23:39 यिर्मयाह 23:40



यिर्मयाह 23:10 का महत्व और उसका संदेश
यिर्मयाह 23:10 हमें एक सच्चे नैतिक आभास देता है: एक देश जो व्यभिचार और अन्याय से घिरा हो, वह दिव्य न्याय के बिना नहीं बच सकता। यहVerse बताता है कि सामाजिक पतन कैसे आंतरिक और बाहरी तौर पर समाज को कमजोर कर देता है—राजमार्गों पर दौड़ते लोग लाभ के पीछे भागते हैं, परन्तु उनके कर्म बुराई की ओर और वीरता के बदले अन्याय के साथ जुड़ जाते हैं। इस युग के लिए भी यही सच है: ईश्वर की चेतावनियाँ तब भी निश्चय करती हैं कि धर्मी आचरण की कमी से समाज में अविश्वास बढ़ता है, और जिला-न्याय और प्रशासनिक निष्क्रियता के कारण गरीब और कमजोर प्रभावित होते हैं।
परिप्रेक्ष्य का ओज: मूल संदर्भ
यिर्मयाह युग के यरुशलेम और यहूदा के नेताओं के अधीन एक क्षेत्र में स्थित है, जहाँ ब्रह्मचर्यहीन नीतियों, भ्रष्टाचार और व्यभिचार ने सामाजिक मानदंडों को गिरा दिया था। नबी यिर्मयाह को एक सुसंगत संदेश मिलता है: देव-न्याय के बिना देश टुकड़े-टुकड़े हो जाते हैं। verse की भाषा व्यथित करती है कि वन और देश-दानी भी सूख जाते हैं—यानी प्रकृति और सामाजिक संरचना दोनों में सतह पर दुष्कर्म का प्रभाव दिखता है। यह प्रवचन यह स्पष्ट करता है कि केवल बाहरी धार्मिकता से नहीं, बल्कि आंतरिक परिवर्तन से ही समाज सुरक्षित रह सकता है।
मुख्य संदेश
यह verse दो प्रमुख themes पर बल देता है:
अनुसंधानित बिंदु: सुसंगत थीम और क्रॉस-रेफरेंस
यहाँ तीन संकथन बिंदु दिए जाते हैं जो इस verse के साथ संगत हैं:
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि नबी का संदेश केवल व्यवहार-स्वर नहीं, बल्कि दिल की बिदाई और व्यवस्था-नियोजन का पुनर्निर्माण है।
गूढ़ टिप्पणी के सार: अब क्या करें?
- आंतरिक नैतिकता को ऊपर उठाने के लिए परमेश्वर के साथ genuine संबंध बनाए रखें।
- सामाजिक-नीति में निष्पक्षता और दयालुता को प्राथमिकता दें, especially कमजोरों के लिए रक्षा।
- व्यक्तिगत पाप-परित्याग और सत्यापित आचरण के साथ समुदाय-व्यवस्था को पुष्ट करें।
संक्षिप्त क्रॉस-रेफरेंस व्याख्या
1) यिर्मयाह 5:31 — चेतावनी: जब नेता और जनता गलत राह पकड़ते हैं, तब विवेक-आत्मा शिथिल रहता है. यहverse बताता है कि आस्था के साथ न्याय की रक्षा जरूरी है।
2) यिर्मयाह 31:33 — नया विधान: परमेश्वर के साथ दिल की बदली से ही समाज में स्थिरता आ सकती है।
3) यिर्मयाह 22:3 — व्यवहार-न्याय: गरीब और कमजोर के पक्ष में युद्ध, अन्याय के विरुद्ध कायमी कदम।
नित्य devotional विचार
कठोर समय में भी ईश्वर का न्याय और पालन-धर्म का आग्रह निरन्तर बना रहता है। अपने जीवन के उन हिस्सों का मूल्यांकन करें जहाँ आप दूसरों के साथ न्याय नहीं दिखाते या नैतिक पतन के संकेत दिखते हैं। ईश्वर की सीमा-रेखा के भीतर चलना ही समाज को सुरक्षित बनाता है; यह हमें प्रेरणा देता है कि हम अपने घर, कार्यस्थल और समुदाय में सत्य, निष्पक्षता और करुणा का वातावरण बनाएं।
उद्धरण-सूचि: मैथ्यू हेन्री, एलबर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क के स्पष्ट संकलन से निर्वाणात्मक संकेत: यदि किसी स्थान पर साफ़-सुथरे धार्मिक कर्मों के पीछे असली नैतिक बदलाव नहीं है, तो वह धार्मिकता अधूरी मानी जाएगी। (यह सारांश उनके सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणियों के सामान्य प्रणालियों पर आधारित है; नीचे दिये गए पाठ में उनके शब्द-उद्धरण के अधिकारनुसार संलग्न नहीं किया गया है।)