यिर्मयाह 33:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

“यहोवा जो पृथ्वी का रचनेवाला है, जो उसको स्थिर करता है, उसका नाम यहोवा है; वह यह कहता है,

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यिर्मयाह 33:2 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 33:2 – संदर्भ के साथ व्याख्या

यिर्मयाह नबी के युग में यह वाक्य एक ऐसी स्थिति का संदेशन करता है जहाँ परमेश्वर अपने चरम अधिकार और सच्चे स्वामित्व की याद दिलाते हैं। जब यरूबालाम, बन्धन और दुर्बलता के बीच यहूदियों को भय और अस्थिरता ने घेर रखा था, तब ईश्वर ने अपने नाम से संबोधित करते हुए आश्वस्त किया कि वही धरती की रचना करने वाला है और उसे स्थिर रखने वाला भी है। यह वाक्य परमेश्वर के नाम “यहोवा” के साथ उनकी विश्वसनीय सत्ता एवं संरक्षण को उजागर करता है।

केंद्रीय अर्थ

इस वाक्य में “यहोवा जो पृथ्वी का रचनेवाला है, जो उसको स्थिर करता है, उसका नाम यहोवा है” का तात्पर्य यह है कि परमेश्वर न केवल सृष्टि की संहारक हैं, बल्कि उसे बनाए रखने वाले और कल्याण के निर्णायक हैं। उनका नाम भरोसे का आधार है; उसकी सत्ता स्थिर है, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों।

मुख्य विचार (तीन विषय)

  • यहोवा की सृष्टिकर्त्ता सत्ता: परमेश्वर ने सारे ब्रह्मांड को अपने वचन से जन्म दिया और उसे संस्था दी। यहूदा की दशा में—जब भी प्राकृतिक, सामाजिक या नैतिक संकट गहराते हैं—इसी सत्ता की याद दिलाई जाती है कि सब कुछ उसकी योजना के अनुसार संचालित है।
  • स्थिरता और संरक्षकता: केवल रचने वाले ही नहीं, वह जो उसे स्थिर भी रखता है। यह विश्वास देता है कि इतिहास, राष्ट्रों के भविष्य और निजी जीवन के परीक्षण भी परमेश्वर के नियंत्रण के भीतर एक उद्देश्य की ओर अग्रसर होते हैं।
  • यहोवा का नाम—विश्वास का आधार: “यहोवा” के नाम से प्रेरित विश्वास से जीवन की दिशा निर्धारित होती है; यह नाम भरोसे, कृपा और न्याय की पूर्णता को संकेतित करता है।

संबंधित उद्धरण (Cross-references)

1) यिर्मयाह 32:27 – परमेश्वर अपने लोगों के लिए कर्मकांड नहीं, बल्कि उनकी नियति के रचयिता के रूप में चिह्नित है। यह दिखाता है कि उनके दिल में भरोसा क्यों उठता है कि सब कुछ उनके नियंत्रण में है।

2) उतपन्न 1:1–2 – संसार के आरम्भ में परमेश्वर की सृष्टि और उसकी सत्ता का उद्घोष, जो वही स्थिर करने वाले हैं, पर बल देता है।

3) भजन 46:11 – परमेश्वर के राज्य में शांति और स्थिरता; कोई भी उथल-पुथल हो, उसका नाम और उसकी सत्ता अडिग रहती है।

व्यावहारिक विचार

- कठिनाइयों के बीच भी अपने जीवन की योजना परमेश्वर के हाथों में मानना सीखें।

- भय और अनिश्चितता की घड़ियों में भी प्रभु के नाम पर टिके रहें; वह भरोसेमंद है और स्थिति चाहे कैसे भी दिखे, वह इसे नियंत्रित करते हैं।

संक्षिप्त निष्कर्ष

यिर्मयाह 33:2 बताता है कि परमेश्वर वही है जो सभी चीजों का रचयिता और उन्हें बनाए रखने वाला है। उसका नाम ही आश्रय-विश्वास का आधार है। संकटकालों में भी यह तथ्य स्मरण रखना चाहिए कि पृथ्वी-ग्लोबल योजना उसी के नियंत्रण में है और उसका उद्देश्य अपनी पवित्र नीयत के अनुरूप पूरा होगा।

नोट्स: पूर्व टिप्पणीकारों के संकेत

कई प्राचीन विद्वानों ने इस Verse के उद्देश्य को उस आधुनिक विश्वास-विश्वास के साथ जोड़ा है कि परमेश्वर की सृष्टिकर्ता और संरक्षक सत्ता दोनों एक ही देह-स्वरूप हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 33:2 समानांतर पद और संबंधित वचन

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मैं सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के नाम से अब्राहम, इसहाक, और याकूब को दर्शन देता था, परन्तु यहोवा के नाम से मैं उन पर प्रगट न हुआ।

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यहोवा योद्धा है; उसका नाम यहोवा है।

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यशायाह 37:26 (HINIRV) »
क्या तूने नहीं सुना कि प्राचीनकाल से मैंने यही ठाना और पूर्वकाल से इसकी तैयारी की थी? इसलिए अब मैंने यह पूरा भी किया है* कि तू गढ़वाले नगरों को खण्डहर ही खण्डहर कर दे।

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