यिर्मयाह 33:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

“यहोवा यह कहता है, यह स्थान जिसके विषय तुम लोग कहते हो 'यह तो उजाड़ हो गया है, इसमें न तो मनुष्य रह गया है और न पशु,' अर्थात् यहूदा देश के नगर और यरूशलेम की सड़कें जो ऐसी सुनसान पड़ी हैं कि उनमें न तो कोई मनुष्य रहता है और न कोई पशु,

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यिर्मयाह 33:10 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 33:10 — उजाड़ के बीच आशा का पुनर्निर्माण

मुख्य विवेचना बिंदु: यह वह वचन है जिसमें परमेश्वर बताता है कि जहाँ लोग मानते हैं कि यह जगह उजाड़ हो चुकी है, वहाँ उसकी महिमा और अभी भी भविष्य की योजना चलती रहती है। यहूदा के नगरों और यरूशलेम की सूनी गलियों के पीछे भी ईश्वर का उद्धारकार्य ενεργ रहता है; यह उद्धार तब प्रारंभ होगा जब वह मनुष्य को फिर से जीवित कर नई उम्मीद के पुल बनाते हैं।

साहित्यिक संदर्भ और परिप्रेक्ष्य

यिर्मयाह के संदर्भ में यह वाक्य एक ऐसी अवधि को दर्शाता है जब बंधन के बाद भी ईश्वर ने भविष्य के पुनर्निर्माण की किरण दिखाई। अतीत में जब लोग दुष्टता और अयोध्या जैसी स्थितियों से घिरे थे, तब भी भगवान ने आशा का संदेश रखा। यह वचन यहूदा की पृथक-स्थिति और यरूशलेम की दशा से ऊपर उठकर ईश्वर के उद्धारकार्य की दिशा को उजागर करता है।

धार्मिक महत्त्व

- यह वचन दर्शाता है कि राहत और पुनर्निर्माण केवल भौतिक पुनर्स्थापना नहीं है, बल्कि परमेश्वर की दयालु योजना का हिस्सा है।

- इसका अश्व-उद्धार संकेत करता है कि बिना पूर्वाग्रह के, परमेश्वर अपनी सच्ची प्रतिज्ञाओं को निभाते हैं, भले ही वर्तमान स्थिति निराशाजनक लगे।

पवित्र शास्त्रों के साथ संबंध

  • यशायाह 43:19 — नया बनना: परमेश्वर अपनी राहें बनाते हैं जहाँ सूखापन हो—यहीं से पुनर्निर्माण की उम्मीद उभरती है।
  • यिर्मयाह 29:11 — भविष्य की योजनाएं: उद्धार का विचार अस्वीकृत नहीं होता; प्रभु की योजनाएं शांति की हैं।
  • यशया 65:17 — नए आकाश और नई पृथ्वी: देहधारण में पुनःस्थापना की व्यापक दृष्टि।

इन क्रॉस-रेफरंसेस से स्पष्ट होता है कि बाहरी उजाड़पन के समय में भी परमेश्वर के उद्देश्य अंदरूनी परिवर्तन और एक नए काल की शुरुआत का संकेत हैं।

reflection के प्रश्न

  • जब जीवन के सूने क्षण दिखते हों, तब आप किस प्रकार परमेश्वर की पुनर्निर्माण योग्यता पर आशा रखते हैं?
  • खोए हुए स्थानों में भी ईश्वर के वादों के प्रति आपका विश्वास कैसे दृढ़ किया जा सकता है?

विवेचन का संक्षेप निष्कर्ष

यिर्मयाह 33:10 यह स्मरण कराता है कि उजाड़पन और निराशा के बावजूद परमेश्वर की योजनाएं निरन्तर चलती हैं। नगरों की सूनी गलियों में भी वह नया दिन लाने के लिए तैयार है। इस संदर्भ में प्रभु की दयालुता और राष्ट्र के पुनर्निर्माण की आशा सम्मिलित है; विश्वासियों को यह स्मरण कराता है कि परम सत्य वह है जो समय के ठहराव से परे है और हर परिस्थिति में उद्धार का मार्ग खोलता है।

— Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke का exact short quotation अगर उपलब्ध हो तो यहाँ उद्धृत होंगे।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 33:10 समानांतर पद और संबंधित वचन

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कि यह उजाड़ हो गया है, इसमें न तो मनुष्य रह गए हैं और न पशु, यह तो कसदियों के वश में पड़ चुका है, इसी में फिर से खेत मोल लिए जाएँगे,

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“परन्तु अब इस्राएल का परमेश्‍वर यहोवा इस नगर के विषय में, जिसके लिये तुम लोग कहते हो, 'वह तलवार, अकाल और मरी के द्वारा बाबेल के राजा के वश में पड़ा हुआ है' यह कहता है:

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फिर उसने मुझसे कहा, “हे मनुष्य के सन्तान, ये हड्डियाँ इस्राएल के सारे घराने की उपमा हैं। वे कहते हैं, हमारी हड्डियाँ सूख गई, और हमारी आशा जाती रही; हम पूरी रीति से कट चूके हैं।

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