Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यहोशू 21:1 यहोशू 21:2 यहोशू 21:3 यहोशू 21:4 यहोशू 21:5 यहोशू 21:6 यहोशू 21:7 यहोशू 21:8 यहोशू 21:9 यहोशू 21:10 यहोशू 21:11 यहोशू 21:12 यहोशू 21:13 यहोशू 21:14 यहोशू 21:15 यहोशू 21:16 यहोशू 21:17 यहोशू 21:18 यहोशू 21:19 यहोशू 21:20 यहोशू 21:21 यहोशू 21:22 यहोशू 21:23 यहोशू 21:24 यहोशू 21:25 यहोशू 21:26 यहोशू 21:27 यहोशू 21:28 यहोशू 21:29 यहोशू 21:30 यहोशू 21:31 यहोशू 21:32 यहोशू 21:33 यहोशू 21:34 यहोशू 21:35 यहोशू 21:36 यहोशू 21:37 यहोशू 21:38 यहोशू 21:39 यहोशू 21:40 यहोशू 21:41 यहोशू 21:42 यहोशू 21:43 यहोशू 21:44 यहोशू 21:45
यहोशू 21:26 का अर्थ और महत्व
यह पद यह दर्शाता है कि पूरे ईश्वरीय व्यवस्था के अनुसार शहर-शहर के कुटुंबों के साथ, पहरेदारों और चरवाहों के कुटुम्ब भी स्थिर रूप से रहे। इसका मुख्य तात्पर्य यही है कि दावीद-युग के बाद भी परमेश्वर ने उत्तरदायित्वों के साथ नगर-नगर के उत्तराधिकार निर्धारित किए, ताकि न केवल लेवी-लोक बल्कि अन्य कुटुम्ब भी सुरक्षित और संगठित रहें।
साहित्यिक संदर्भ और संरचना
यह विचार योशुआ की विभाजन-यात्रा के पथ पर समापन के करीब आता है: देश के भीतर बसे तीनाने-तीनाने कुलों की सूची और उनके नगरों की निरंतर व्यवस्था। यह भाग नगरों के सुरक्षित अस्तित्व, चरवाहों के अधिकारों, और कुल-परिवारों के स्थायित्व पर बल देता है। भाषा-संरचना में संक्षेप और ठहराव का प्रकाशन यह संकेत देता है कि कुटुम्ब-समूहों के बीच सुरक्षित स्थानों की स्थापना परमेश्वर के प्रति आस्था और कर्तव्य के संगम का निष्कर्ष है।
धार्मिक महत्व
इस verses के साथ एक सिद्धांत उभरता है: परमेश्वर अपने लोगों के सामाजिक-नागरिक ढांचे की देखरेख करता है ताकि धार्मिक आस्था बाहरी दबाव के समय भी संरक्षित रहे। चरवाहों और अन्य परिवारों के लिए नगरों की सुरक्षा, पृथक क्षेत्रीय अधिकारों के साथ, यह दिखाती है कि दीर्घकालिक समुदाय-निर्माण में व्यवस्था और राम-निर्भर योगदान कितने आवश्यक हैं।
उद्धरण-जोड़ और संदर्भ
यहाँ एकीकृत टिप्पणी हेतु नीचे दिए गए प्रमुख बिंदु अन्यग्रंथों से संकेत लेते हैं:
निष्कर्ष और सामान्यीकरण
इस पद से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर ने देश के भीतर के प्रत्येक कुटुम्ब के लिए संरक्षित नगर और सुरक्षा-व्यवस्था निर्धारित की ताकि शांति और धार्मिक विश्वास लगातार बनाए रखा जा सके। यह केवल एक प्रशासनिक सूची नहीं, बल्कि समुदाय के भावी नैतिकता और उत्तरदायित्व की स्मृति है—हर का सुरक्षित घर, हर का कर्तव्य और हर परिवार की भूमिका।
स्व-चिन्तन के लिए प्रश्न
क्रॉस-रेफ़रेंस (संक्षेप में)
यहोशू के समापन से जुड़े अन्य संदर्भ, जो सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था और उत्तरदायित्व को उजागर करते हैं, उनके सार को देखने में मदद करते हैं। उदाहरणतः—परिवार-आश्रित व्यवस्था और नगर-रक्षा के विचार, साथ ही समुदाय के बीच न्याय और सुरक्षा के नियम।