Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यहोशू 21:1 यहोशू 21:2 यहोशू 21:3 यहोशू 21:4 यहोशू 21:5 यहोशू 21:6 यहोशू 21:7 यहोशू 21:8 यहोशू 21:9 यहोशू 21:10 यहोशू 21:11 यहोशू 21:12 यहोशू 21:13 यहोशू 21:14 यहोशू 21:15 यहोशू 21:16 यहोशू 21:17 यहोशू 21:18 यहोशू 21:19 यहोशू 21:20 यहोशू 21:21 यहोशू 21:22 यहोशू 21:23 यहोशू 21:24 यहोशू 21:25 यहोशू 21:26 यहोशू 21:27 यहोशू 21:28 यहोशू 21:29 यहोशू 21:30 यहोशू 21:31 यहोशू 21:32 यहोशू 21:33 यहोशू 21:34 यहोशू 21:35 यहोशू 21:36 यहोशू 21:37 यहोशू 21:38 यहोशू 21:39 यहोशू 21:40 यहोशू 21:41 यहोशू 21:42 यहोशू 21:43 यहोशू 21:44 यहोशू 21:45


यहोशू 21:28 पर सरल अर्थ
इस पद का सीधा सार यह है कि इशारा किया गया है दाबरात के क्षेत्र के यहूदी गोत्रों में से कुछ अस्त्र-उपकरण सहित चरागाह-खेतों के हिस्से के बारे में वर्णन करते हुए chor है: किश्योन और दाबरात आदि। इन देहाती भूभागों के स्वयं के पंजी में यह बतलाया गया है कि यीशु के पुराने क़बीले कितनी भूमि को पवित्र मंदिर-परिवार के लिए विरासतस्वरूप प्राप्त करते थे।
पश्चात्ताप-प्रसंग और संदर्भ
यह पाठ यहूदियों के वंशानुक्रम और वास-भाग के व्यवस्थित वितरण का हिस्सा है—हर गोत्र को उनके योग्य क्षेत्र दिये गये। किश्योन और दाबरात जैसे नगर और चरागाह, इस्बंधित क्षेत्र थे जहाँ लोग अपने जीविका के लिए चराने-पशु रखने का काम करते थे। यहोशू नोट करता है कि इस्साकार के गोत्र के क्षेत्रों में से यह हिस्सा दिखाई देता है और उन परिवारों के पास अपनी-अपनी चरागाहें हैं।
interpretive observations
छोटा थीमैटिक सूची
अन्य स्रोत-प्रकाश और संकल्पना
1) अतीत के अभिलेखों में यह दिखता है कि हबाओं और केहेरेत जैसे क्षेत्र भी गोत्र-संरक्षण के लिए समर्पित थे।
2) परमेश्वर के राज्याभिषेक की तैयारी में भूमि-आवंटन समुदाय के एकत्व और मूल-विश्वास का संकेत है।
3) अन्य प्रमाणों में यह दिखता है कि कानूनी-परिवेश में शहरों के साथ चरागाहों का समन्वय एक संतुलित जीवन के लिए आवश्यक था।
प्रयोजन-समापन
यहोशू 21:28 का संदेश प्रेरित करता है कि परमेश्वर ने हर गोत्र के भीतर रहने योग्य भूभाग चुनकर उनके जीवन-यापन को व्यवस्थित किया। इसका अन्तर्निहित पाठ यह है कि परमेश्वर के वचन में दी गई व्यवस्था प्रायः प्रत्येक परिवार के लिए आवश्यक संसाधनों के सम्यक वितरण पर आधारित थी, ताकि आस्थागत जीवन और समुदाय की स्थिरता बनी रहे।
क्रॉस-रेफरेंस और छोटा स्पष्टीकरण
1) प्रेरितों के द्वारा वंश-विस्तार में क्षेत्र-आवंटन का समान विचार मिलता है—यह दर्शाता है कि परमेश्वर समुदाय के सभी हिस्सों की देखरेख करता है।
2) याकूब 1:18 में जन्म-उत्पत्ति के संदर्भ में प्रकाश: हर अच्छे उपहार परमेश्वर से आता है; भूमि का भौतिक विभाजन उसके आशीर्वाद का हिस्सा है।
3) नियम 26:52-55 में शहरों के भीतर परिवारों के लिए सुरक्षित आवास और संरक्षित आवंटन का विवरण मिलता है, जो इस पाठ के व्यावहारिक पूरक हैं।
संक्षेप में, यहां चरागाह और भूभाग के वितरण से यह समझ आता है कि इसका उद्देश्य यह था कि प्रत्येक गोत्र अपनी पहचान बनाये रखते हुए अपनी जीविका और प्रार्थनात्मक जीवन के लिए पर्याप्त संसाधनों को सुरक्षित रखें।
प्रसंग-उद्धरण (यदि उपलब्ध):
“Jesus, the great Shepherd, provides for the flock as a faithful steward” — केवल उद्धरण-संदेश के लिए संकेत, पूर्ण वाक्य नीचे नहीं दिया गया है।