Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यहोशू 21:1 यहोशू 21:2 यहोशू 21:3 यहोशू 21:4 यहोशू 21:5 यहोशू 21:6 यहोशू 21:7 यहोशू 21:8 यहोशू 21:9 यहोशू 21:10 यहोशू 21:11 यहोशू 21:12 यहोशू 21:13 यहोशू 21:14 यहोशू 21:15 यहोशू 21:16 यहोशू 21:17 यहोशू 21:18 यहोशू 21:19 यहोशू 21:20 यहोशू 21:21 यहोशू 21:22 यहोशू 21:23 यहोशू 21:24 यहोशू 21:25 यहोशू 21:26 यहोशू 21:27 यहोशू 21:28 यहोशू 21:29 यहोशू 21:30 यहोशू 21:31 यहोशू 21:32 यहोशू 21:33 यहोशू 21:34 यहोशू 21:35 यहोशू 21:36 यहोशू 21:37 यहोशू 21:38 यहोशू 21:39 यहोशू 21:40 यहोशू 21:41 यहोशू 21:42 यहोशू 21:43 यहोशू 21:44 यहोशू 21:45



मतलब का स्पष्ट संकेत
यहोवा ने इस्राएलियों को वे सारा देश दे दिया जिसका उसने अपने पुरखे से शपथ खाकर देने का वादा किया था; और वे उसके अधिकारी बनकर उसमें बस गए।
पृष्ठभूमि संक्षेप
यहोशू के युग के अंत की यह घोषणा है कि परमेश्वर ने विशाल वादों के अनुसार कनानभूमि को इस्राइलियों के लिए पूरा दे दिया। यह वाक्य उनके विभाजन के बाद की स्थिरता और अभिमान-रहित विश्वास की परिणति है—जब वे विश्वास के साथ धनी और सुरक्षित रहते हैं, और वे अपने रब के आदेशों में टिके रहते हैं। यह कथन पुष्टि करता है कि परमेश्वर की कृपा और वादा सदा पूरे होते हैं, जो पूर्वजों के साथ किए गए उन पवित्र शपथों पर टिका है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
टेमाटिक बिंदु
अनुचित cross-चर्चा
कथा से जुड़े अन्य संदर्भ जिनसे यह विषय प्रकट होता है:
प्रमुख उद्धरण और संदर्भ-आधार
यह पाठ सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारिताओं के भीतर यह संकेत देता है कि परमेश्वर का कृत्य पूर्ण है और उनके चुने हुए लोग उस वादे के अनुसार विरासत प्राप्त करते हैं।
संदर्भ-आधार (समान्य विचार):
संक्षिप्त अनुप्योगी निष्कर्ष
इस verse से उभरती सीख है: परमेश्वर के वचनों पर चलते हुए और उनके आदेशों के अनुसार जीवन जीना, समुदाय में स्थिरता, सुरक्षा और आशीषों को जन्म देता है। हर वर्ग के लोगों के लिए—परिवार, नगर, और समाज—लोक-जीवन का ठिकाना बनता है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त वर्णन)
इन आयतों से सम्बन्धित विचार कृपया यह समझें: एक यहूदी-भ्रमण में परमेश्वर के वादे का पूरा होना, एक समुदाय की स्थिरता और नेतृत्व की व्यवस्था, तथा तब से बनती हुई आशीषें—ये सभी एक साथ मिलकर यह दिखाते हैं कि परमेश्वर के वायदों पर टिके रहना कितना महत्व रखता है।