Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यहोशू 21:1 यहोशू 21:2 यहोशू 21:3 यहोशू 21:4 यहोशू 21:5 यहोशू 21:6 यहोशू 21:7 यहोशू 21:8 यहोशू 21:9 यहोशू 21:10 यहोशू 21:11 यहोशू 21:12 यहोशू 21:13 यहोशू 21:14 यहोशू 21:15 यहोशू 21:16 यहोशू 21:17 यहोशू 21:18 यहोशू 21:19 यहोशू 21:20 यहोशू 21:21 यहोशू 21:22 यहोशू 21:23 यहोशू 21:24 यहोशू 21:25 यहोशू 21:26 यहोशू 21:27 यहोशू 21:28 यहोशू 21:29 यहोशू 21:30 यहोशू 21:31 यहोशू 21:32 यहोशू 21:33 यहोशू 21:34 यहोशू 21:35 यहोशू 21:36 यहोशू 21:37 यहोशू 21:38 यहोशू 21:39 यहोशू 21:40 यहोशू 21:41 यहोशू 21:42 यहोशू 21:43 यहोशू 21:44 यहोशू 21:45
परिचय: यहोशू 21:35 का तात्पर्य और संदर्भ
यहाँ दिए गए वचन में एक विश्वसनीय व्यवस्था का दृश्य मिलता है: आत्म-समर्पण से पूर्व समुदाय के प्रत्येक नगर-गृहों को दायित्व और सुरक्षा के साथ बाँटा गया। इज़राइल के प्रत्येक लेवी या इश्वरीय परिवारों को शहरों का आवंटन किया गया ताकि वे धर्मोपाध्याय, मंदिर-सेवा और शहद-कार्यों में सक्रिय रह सकें। यहोपन के बाद के अध्यायों में यह स्पष्ट होता है कि यह व्यवस्था देश भर में धार्मिक और सामाजिक संरचना की स्थिरता के लिए है।
इस पाठ में परमेश्वर और विश्वास के बारे में क्या उभरकर आता है
संकेत है कि विश्वास एक व्यवस्थित जीवन-योजनाओं के साथ जुड़ा है, जहाँ परमेश्वर का निर्देश समाज के हर सदस्य के व्यवहार और सहभागिता को मार्गदर्शित करता है। यह उदाहरण देता है कि ईश्वर अपनी व्यवस्था के भीतर हर गाँव और हर परिवार की सुरक्षा और पवित्र कार्यों के लिए जिम्मेदारी बाँटते हैं। यह सुरक्षा-नियम न केवल भौतिक सुरक्षा हैं, बल्कि आध्यात्मिक सेवा की निरंतरता और पवित्रता के लिए आवश्यक आध्यात्मिक संरचना भी बनाते हैं।
मुख्य शब्दों व चित्रों की स्पष्टता
प्रत्येक नगर-समूह का उल्लेख एक क्रमबद्ध योजना का भाग है। दिम्ना (dimnâ) और नहलाल (Nahalal) जैसे नगरों के नाम यहाँ स्पष्ट स्वरूप में दीये गए हैं; ये नाम यह सूचित करते हैं कि लैवी-समुदाय के सदस्य धार्मिक प्रशासन के साथ-साथ जन्म-जगत के मंच पर भी उपस्थित रहते थे। אלה शब्द धार्मिक-सेवा और ग्राम-स्तरीय व्यवस्थाओं के संयोजन का प्रतिनिधित्व करते हैं।
सम्बन्धित पाठ
नोट: यहाँ दिए गए संदर्भों में पूर्ण पद टेक्स्ट नहीं दिए जाते; विशिष्ट संदेश के संकल्प के लिए पाठ-स्थिति से मिलते-जुलते अर्थ बताए जाते हैं।
आज के लिए आवेदन
1) सेवकों के लिए स्पष्ट कर्तव्य: हर परिवार, हर नगर की भूमिका—चाहे वह धर्म-सेवा हो या सामाजिक सुरक्षा—एक साथ मिलकर एक सुरक्षित और समर्पित समाज बनाते हैं। अपने समुदाय में आप की भूमिका क्या है? आप किस प्रकार रोजमर्रा की गतिविधियों में परमेश्वर की व्यवस्था को निभाते हैं?
2) पारस्परिक निष्ठा और सुरक्षा: भविष्य के लिए तैयारी और सुरक्षा के नियम—आर्थिक, सामाजिक और आध्यात्मिक—सबके लिए होनी चाहिए, ताकि कमजोर सदस्य भी सुरक्षित रहें।
3) अनुशासन और समुदाय-निर्माण: एक-दूसरे के प्रति जवाबदेही रखने से ही सामुदायिक विश्वास मजबूत होता है।
संक्षिप्त संयुक्त व्याख्या
यहोशू 21:35 दर्शाता है कि परमेश्वर की व्यवस्था सामाजिक-धार्मिक संरचना को पुख्ता बनाती है। नगर-आवंटन सेLevi के सदस्य यह सुनिश्चित करते थे कि आराधना और कानूनपालना किसी भी समय बाधित न हो। यह एक संतुलित समुदाय की चित्र-रेखा है जहां विश्वास केवल निजी अनुभव नहीं है, बल्कि साझा जिम्मेदारी और सेवा के साथ जुड़ा है।
संक्षिप्त उद्धरण (संदर्भिमुखी)
यदि použya किसी पुराने-द्वितीय टिप्पणीकारों के संदर्भ उद्धृत हों, तो वे केवल संक्षेप में संकेतित होंगे।