नीतिवचन 31:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

अपना बल स्त्रियों को न देना, न अपना जीवन उनके वश कर देना जो राजाओं का पौरूष खा जाती हैं।

पिछला पद
« नीतिवचन 31:2
अगला पद
नीतिवचन 31:4 »

नीतिवचन 31:3 पद-दर-पद बाइबल टीका

नीतिवचन 31:3 का आसन और उसका अर्थ

नीतिवचन के इस वेदनात्मक पंक्ति में, राजा के पौरूष के बेकार न करने और स्त्रियों के प्रति अनावश्यक आचरण की चेतावनी है। यह पाठ एक चेतावनी है कि शक्ति और सत्ता का दुरुपयोग न हो, न किसी के जीवन को अपनी इच्छा के अनुसार बनावट दे। यह सत्य उन सब व्यक्तियों के लिए है जो नेतृत्व या प्रभाव रखते हैं, चाहे वे शासक हों या सामाजिक अधिकार की विरादरी।

भगवान के संदर्भ में यह क्या बताता है

कुल मिलाकर यह पाठ पवित्रतापूर्ण जीवन के मूल्य को रेखांकित करता है—शक्तियों को दया, संयम और नैतिकता के अधीन रखना। ईश्वर चाहते हैं कि सत्ता प्रेम और संगति के साथ प्रयुक्त हो, आत्म-वरदानी के बजाय दूसरों के हितों की पूर्ति में। इस दृष्टिकोण से, परमेश्वर का ध्येय निर्धारण है कि मनुष्य अपने पौरुष को विवेकपूर्ण ढंग से उपयोग करें और दूसरों के सम्मान की रक्षा करें।

महत्वपूर्ण शब्दों और छवियों की स्पष्टता

  • अपना बलस्त्रियों को न देना—यहाँ “बल” से शारीरिक, नैतिक या सामाजिक दबदबा लेते समय नियंत्रण और संयम रखने की बात है, ताकि दूसरों के अधिकारों और गरिमा का उल्लंघन न हो।
  • राजाओं का पौरूष खा जाना—यह एक रूपक है जिसमें सत्ता की लिप्सा और दुरुपयोग की ओर इशारा है। पौरुष यहाँ शक्ति—अधिकार से उठने वाले भ्रष्टाचार और जोखिमपूर्ण व्यवहार को दर्शाता है।

संबद्ध अंश (Cross-references)

• नीतिवचन 37:3-4: सत्ता का सही प्रयोग व धार्मिकता के अनुरूप जीवन की प्रेरणा।
• मत्ती 6:33: धार्मिकता का प्राथमिक लक्ष्य परमेश्वर का राज्य और righteousness के साथ जीवन जीना।
• 1 पतरस 2:17: सभी के प्रति सम्मान और निष्कपट व्यवहार की शिक्षा।

इन विचारों से पाठ यह बताता है कि शक्ति के साथ नैतिकता का संयोजन परमेश्वर की इच्छा में है, न कि शक्ति के दुरुपयोग में।

आज के संदर्भ में व्यावहारिक उपयोग

  • नेतृत्व वाले व्यक्ति अपने अधिकारों का प्रयोग लोगों के कल्याण के लिए करें, किसी का सम्मान न छीने।
  • व्यक्ति, जो भी भूमिका में हों, सम्मान, नियंत्रण और जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाएं—कठोरता से नहीं, बल्कि करूणा और न्याय से।
  • सामाजिक और कार्यालयीन जीवन में आपसी समझौते और नैतिकता बनाये रखें; दबदबा दिखाने के बजाय सेवा करने की प्रवृत्ति अपनाएं।

इस पाठ में प्रेरणा यही है कि शक्ति के साथ संयम और ईमानदारी जुड़ी रहे, ताकि हर किसी की गरिमा संरक्षित रहे। यह एहतियात न केवल व्यक्तिगत आचरण के लिए है, बल्कि समाजीक और धार्मिक समुदाय के लिए एक नैतिक दिशा भी है।

सूक्ष्म पाठों के तात्विक संकेत: भगवान चाहते हैं कि हम अपने बल का इस्तेमाल दयालुता, निष्कपटता और सत्यनिष्ठा के साथ करें, ताकि निर्बल-तंत्र का भय न हो और हर व्यक्ति सुरक्षित समझे जाए।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

नीतिवचन 31:3 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

नहेम्याह 13:26 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
नहेम्याह 13:26 (HINIRV) »
क्या इस्राएल का राजा सुलैमान इसी प्रकार के पाप में न फँसा था? बहुतेरी जातियों में उसके तुल्य कोई राजा नहीं हुआ, और वह अपने परमेश्‍वर का प्रिय भी था, और परमेश्‍वर ने उसे सारे इस्राएल के ऊपर राजा नियुक्त किया; परन्तु उसको भी अन्यजाति स्त्रियों ने पाप में फँसाया।

व्यवस्थाविवरण 17:17 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
व्यवस्थाविवरण 17:17 (HINIRV) »
और वह बहुत स्त्रियाँ भी न रखे, ऐसा न हो कि उसका मन यहोवा की ओर से पलट जाए; और न वह अपना सोना-चाँदी बहुत बढ़ाए।

नीतिवचन 7:26 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
नीतिवचन 7:26 (HINIRV) »
क्योंकि बहुत से लोग उसके द्वारा मारे गए है*; उसके घात किए हुओं की एक बड़ी संख्या होगी।

HINIRV बाइबल की पुस्तक चुनें