Old Testament
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नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 31:19 का संदर्भ-संदेश
यह शास्त्र एक उन्नत नारी-चरित्र का वर्णन करता है जो अपने घर और परिवार के लिए परिश्रमी और सक्षम है।Verse 19 विशेष रूप से उसका कार्य-उत्पादन दिखाता है: उसकी हाथ अटेरन में लगती है और चरखा पकड़ती है। यह दृश्य उस समय के घरेलू जीवन की वास्तविकता को सामने लाता है, जिसमें गृहिणी की मेहनत, कौशल और उद्योग उसके दैनंदिन शासन की आधारशिला बनते थे। संदर्भ में वह महिला एक गुणवान, संयमी और सुव्यवस्थित गृहस्वामिनी के रूप में प्रस्तुत है, जो घर के लिए आवश्यक वस्तुएँ बनाती है और परिवार के भरण-पोषण के लिए सक्षम है.
मुख्य विचार
इस वाचा में चरखा और अटेरन जैसे उपकरण घरेलू उद्यम के उदाहरण हैं। इसका अर्थ है—नारीअपने काम में साहसिक और कुशल है, अपने हाथों से उत्पादन करती है, और स्वयं के प्रभाव के साथ परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करती है। यह केवल घरेलू साज-सज्जा नहीं, बल्कि आत्म-निर्भरता, अनुशासन और समय प्रबंधन का प्रतीक है, जो गृहस्थ जीवन की सफलता के लिए अनिवार्य मानता है।
तीन प्रमुख विषय
संबद्ध पवित्र पाठ
इसी अध्याय में एक बहुमुखी महिला का चित्रण है जो परिवार-जीवन की सभी आवश्यकताओं को संतुलित करती है। अन्य प्रकरणों में माता-नारी के भूमिका की प्रशंसा है और समाज-जीवन में उनके योगदान को सम्मानित किया गया है (उदा., घरेलू न्याय, दयालुता, और परिश्रम की महिमा से जुड़े विचार)।
कठोर-व्यावहारिक चिंतन
इस पाठ से एक व्यावहारिक निष्कर्ष निकलता है: घर-केन्द्रित कार्यों की महत्ता को मानना चाहिए और इन्हें कुशलता से करना चाहिए। यह न सिर्फ घरेलू व्यवस्था को सुदृढ़ बनाता है, बल्कि आत्म-सम्मान और प्रभु के सेवा-कार्य के प्रति आस्था को भी मजबूत करता है। यदि किसी परिस्थिति में प्रयास धीमा या बाधित हो, तो निराशा के बजाय कौशल-विकास और योजना पर जोर दें।
यथार्थीय क्रॉस-रेफरेंसेज (संक्षेप में)
- समुदाय की गरिमा और गृह-कार्य की महत्ता पर चर्चा करने वाले अन्य प्रकरणों से प्रेरणा मिलती है।
- पारिवारिक सुख-शांति के लिए नारी-शक्ति के योगदान को प्रतिपादित करने वाले अंश भी दृष्टिगोचर हैं।
- गृहस्थ जीवन के प्रबंध में विवेक और योजना की भूमिका को उजागर करने वाले उद्धरण इन पंक्तियों के साथ संगत हैं।
संक्षिप्त समापन
नीतिवचन 31:19 का यह अंश नारी-शक्ति के सक्षम और परिश्रमी पक्ष को पहचानता है। अटेरन और चरखा जैसी साधन-सामग्री के साथ वह अपने परिवार के लिए सुरक्षा और समृद्धि बनाती है, जो एक संतुलित और सृजनशील गृहस्थ जीवन की रूपरेखा है।
संक्षिप्त उद्धरण बतौर संदर्भ लेख
संदर्भ-उद्धरण: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के कुछ मिलते-जुलते विचार जहाँ-जहाँ उपयुक्त हों, व्यवस्थित सामंजस्य में प्रस्तुत किए गए हैं।