नीतिवचन 31:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जिससे वे पीकर अपनी दरिद्रता को भूल जाएँ और अपने कठिन श्रम फिर स्मरण न करें।

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नीतिवचन 31:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

नीतिवचन 31:7 का संदर्भ और अर्थ

यह पद नीतिवचन के भीतर उन शिक्षाओं का एक भाग है जो विनय, परिश्रम और संयमित जीवन के महत्व को बताती है। यहाँ एक साहसिक और चित्रात्मक दृष्टांत के रूप में दिखाया गया है कि किस प्रकार कुछ लोग गहरी निराशा और दर्द में ऐसे उपाय ढूंढ़ते हैं जो उनके संकट कोTemporary लम्बा कर दें—जैसे शराब का सहारा—ताकि वे अपनी दरिद्रता और श्रम के कष्ट को भूल जाएँ। यह पाठ यह स्पष्ट करता है कि सत्य आनन्द और राहत ईश्वर के मार्ग से आती है, न कि व्यसन या विमुखीकरण से।

केन्द्रित विचार

मुख्य संदेश यह है कि जीवन की कठोरताएँ और आर्थिक कठिनाइयाँ तब भी मानवीय योग्यता और नैतिकता को बनाए रखते हुए सामना की जा सकती हैं जब व्यक्ति विवेकपूर्ण विकल्प चुनता है। शराब या अन्य क्षणिक आवेगों के सहारे दुखों को टालना स्थायी समाधान नहीं, बल्कि स्थिति को और बदतर बनाता है।

प्रमुख विषय

  • दुख और दरिद्रता के विरुद्ध विवेकपूर्ण उपाय: इस श्लोक में शराब जैसे अस्थायी मनोरंजन से मुक्ति नहीं मिलती, बल्कि स्थायी राहत के लिए ईमानदार प्रयत्नों की जरूरत बताई गई है।
  • श्रम का सम्मान और स्मरण शक्ति: कठोर समय में भी व्यक्ति के मेहनत और अपने कर्तव्य को याद रखना चाहिए ताकि अभाव का सामना किया जा सके।
  • आत्म-नियत्रण और मार्गदर्शन: जीवन के अनुभव से सीख लेकर संतुलित निर्णय लेना आवश्यक है; अतिरेक से बचना कठिन पर आवश्यक है।

संदर्भित प्रवचन और संबंधित मार्गदर्शन

1) मैथ्यू हेनरी (Matthew Henry) सुझाव देते हैं कि यह श्लोक हमें दिखाता है कि विनावश्यक ताठरता और मद्यपान जैसी आदतें जीवन की वास्तविक राहत नहीं बनतीं; एक पवित्र जीवन और ईश्वर की कृपा ही स्थायी विश्राम देती है।

2) एल्बर्ट बार्न्स (Albert Barnes) इस आयाम को व्यावहारिक दृष्टिकोण से देखते हैं: जो लोग कठिन समय में शराब की ओर मुड़ते हैं, वे अपनी वास्तविक समस्या से पलटने के बजाय उसे दबाते हैं, और परिणामतः कलह और पीड़ा बढ़ती है।

3) एडम क्लार्क (Adam Clarke) भी इस पाठ के नीचे यह मानते हैं कि दारु के द्वारा आत्म-चेतना और जिम्मेदारी से विमुख होना समाज और व्यक्तिगत जीवन में क्षति पहुँचाता है; विभीषणपूर्ण समय में सही दिशा ईश्वर की राह है।

चौकस cross-reference

- नीतिवचन 20:1: शराब के विषय में चेतावनी और चित्त की स्थिरता के महत्व पर प्रकाश।

- नीतिवचन 23:20-21: मद्यपान और बेपरवाह जीवनशैली के नतीजे की स्पष्ट चर्चा।

- यशायाह 28:7-8: मितव्ययता और संतुलित आचरण की आवश्यकता की भूमिका।

व्यावहारिक चिंतन

कठिन समय में अपनी समस्याओं से मुक्त रहने के लिए उचित मार्ग क्या हैं? परिवार, समुदाय और ईश्वर की शिक्षाओं पर टिके रहने से, व्यावहारिक उपायों में दृढ़ता बनी रहती है—जैसे बजट बनाना, दायित्वों का पालन, और नशे से दूर रहने के लिए सहायता मांगना। इस verse के आधार पर यह सोचना क़ाबिल है कि दुःख के क्षणों में भी नैतिक दिशा और धैर्य ही वास्तविक राहत देता है।

संक्षिप्त निष्कर्ष

नीतिवचन 31:7 का उद्देश्य स्पष्ट है: क्षणिक राहत के लिए शराब या अन्य अवांछित उपाय अपनाने से वह दर्द मिटता नहीं; बल्कि मेहनत, विवेक, और ईश्वर की सहायता के द्वारा ही दीर्घकालिक शांति मिल सकती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

नीतिवचन 31:7 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और दाखरस से मतवाले न बनो, क्योंकि इससे लुचपन होता है, पर पवित्र आत्मा से परिपूर्ण होते जाओ, (नीति. 23:31-32, गला. 5:21-25)

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