भजन संहिता 10:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उठ, हे यहोवा; हे परमेश्‍वर, अपना हाथ बढ़ा और न्याय कर; और दीनों को न भूल।

भजन संहिता 10:12 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 10:12 — उठ, हे यहोवा; हे परमेश्वर, अपना हाथ बढ़ा और न्याय कर; और दीनों को न भूल

Main interpretive point: यह दीन-दुखी और अत्याचारित लोगों के लिए विश्वासयोग्य निवेदन है कि परमेश्वर अपनी clarity और न्याय को सक्रिय करे। क्योंकि प्रभु ही सत्ता रखते हैं, अतः दीनों के लिए न्याय की आशा वही दे सकते हैं। यह भजन एक व्यक्तिगत प्रार्थना है जो बुराई के समय में धैर्य, विश्वास और परमेश्वर की महिमा को बनाए रखने का मार्ग देता है।

साहित्यिक संदर्भ

यह भजन क्रमशः अत्याचार के अनुभवों को व्यक्त करता है: एक अत्याचारी विश्व में दीनों की स्थिति, फिर परमेश्वर से उद्धार की याचना। भक्त यहोवा से सीधे विनम्र नीतिगत अनुरोध करता है—अपने हाथ बढ़ाकर न्याय कर और उन दीनों को न भूले जो क्रूरता के बीच जीवन यापन कर रहे हैं। भजनकार ने यहोवा के क्रोध और न्याय को दुष्टों के विरुद्ध स्पष्ट किया है, न कि उसे एक दूरस्थ विचार बनाकर छोड़ दिया है।

theological significance

इस छंद में दो प्रमुख theological संकेत स्पष्ट हैं: (1) ईश्वर की सक्रियता—न्याय के लिए हाथ बढ़ाने की उजागर क्रिया—जो दीनों के लिए तारण और सम्मान का मार्ग प्रशस्त करती है; (2) दीनों के प्रति याददाश्त—याद रखना कि असमानता और उत्पीड़न के बावजूद ईश्वर उनका साथी है और उनकी सहायता में तत्पर रहता है। यह भजन विश्वासियों को वर्तमान पीड़ा में भी ईश्वर के न्यायपरक राज्य के आशीर्वाद की उम्मीद देता है।

Cross-scriptural connections

  • नीति और सामाजिक न्याय: व्यक्ति और समाज के लिए न्याय की मांग—याजक और भविष्य के उद्धारक के आगमन की आशा के साथ।
  • निष्ठा और धैर्य: कठिन समय में ईश्वर पर भरोसा बनाए रखना—भरोसा कि उनका समय sovereign है।
  • पश्चात्ताप और दया: दीनों के लिए करूणा और उद्धार की घटनाएं—परमेश्वर के नाम के कारण न्याय सक्रिय होता है।

संकेत-संबंध: (1) पुराने नियम के न्याय-उद्धार के प्रसंग, (2) विपत्तियों में ईश्वर के साथ आस्था और प्रार्थना, (3) दीनों की सुरक्षा के लिए प्रभु की निष्ठा का स्मरण।

विचार के प्रश्न

  • आप अपने कठिन समय में ईश्वर के “हाथ बढ़ाने” की अपेक्षा कैसे देखते हैं?
  • क्या आप किसी ऐसी स्थिति को याद करते हैं जिसमें ईश्वर ने न्याय किया और दीनों का उद्धार किया?

संक्षिप्त निष्कर्ष

यह श्लोक हमें याद दिलाता है कि अत्याचार के बीच भी परमेश्वर न्याय का पालन करते हैं। उठो, परमेश्वर, और जो दीन-निम्न अवस्था में हैं, उनके लिए न्याय कर—यह भक्तों की आवाज़ बनकर उठती है। प्रभु की नियति में असमानता के बावजूद एकात्मक न्याय है, जो दीनों के पक्ष में है और उनके दर्द को समझता है।

कथनात्मक छँटाई—पवित्री उद्धरण (यदि लागू)

यहाँ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के पूर्ण उद्धरण सीधे उद्धृत नहीं किए गए हैं; यदि उपलब्ध हों, तो उनकी संकलित टिप्पणियाँ एक साथ एकीकृत तरीके से प्रस्तुत होंगी। नीचे वे श्लोक-आधारित विचार संग्रहीत हैं:

कम-से-कम पाठ-संदर्भ: भजन 10 की परिस्थितियाँ, दीनों की सुरक्षा और न्याय की योजना।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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