भजन संहिता 10:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

हे यहोवा, तूने नम्र लोगों की अभिलाषा सुनी है; तू उनका मन दृढ़ करेगा, तू कान लगाकर सुनेगा

भजन संहिता 10:17 पद-दर-पद बाइबल टीका

तत्कालीन संदर्भ

भजन संहिता 10 एक ऐसे शोकगीत का भाग है जिसमें द्रवित मन से दुष्टों की बढ़ती ताकत और निर्दोषों पर दुख पहुँचने का रोना है। पूरे अध्याय में लेखनकर्ता यहोवा से न्याय और सहायता की गुहार लगा रहा है। पद 17 में प्रार्थक का स्वर आशा और विश्वास में बदलता है: उसने अपने घिसे-पिटे या नम्र भाइयों की अवस्था—जो अनदेखे और पीड़ित हैं—के लिये ईश्वर की सुनने और दृढ़ करने की आशा व्यक्त की है।

ये पद ईश्वर और विश्वास के बारे में क्या बताता है

पद में दो महत्वपूर्ण घोषणाएँ हैं: ईश्वर "नम्र लोगों की अभिलाषा" सुनता है, और वह उनका मन दृढ़ करता है। यह बताता है कि परमेश्वर विवेकी और दया करनेवाला है; वह न केवल सुनता है, बल्कि कार्रवाई करके भरोसा देने वाला सहयोग भी करता है। विश्वास का व्यावहारिक पहलू यहाँ स्पष्ट है—कठिन समय में आशा रखना और परमेश्वर पर निर्भर होना।

प्रमुख शब्द और रूपक

"नम्र लोग"—यह केवल सामाजिक दुर्बलता नहीं, बल्कि विनम्र, पीड़ित और सहायता के लिए निर्भर व्यक्तियों की स्थिति दर्शाता है। "अभिलाषा" का अर्थ है गहरी, आवश्यक मुरादें या प्रार्थनाएँ—छोटी इच्छाएँ नहीं, बल्कि जीवन-निर्भर याचनाएँ। "मन दृढ़ करेगा" से आशय है साहस, धैर्य और स्थिरता प्रदान करना; यह मानसिक और आध्यात्मिक बल का संकेत है। "कान लगाकर सुनेगा" यह सुनिश्चित करता है कि ईश्वर गहरी ऐतमीनान से सुनता है, सतही या अनिच्छुक नहीं।

संबंधित पद और संक्षिप्त व्याख्या

  • भजन 34:18 — परमेश्वर टूटे हृदय वालों के समीप होता है; यह पद 10:17 की दया और निकटता की भावना से मेल खाता है।
  • यशायाह 41:10 — "मैं तेरे साथ हूँ" का आश्वासन, जो मन की दृढ़ता और भय-विहीनता को पुष्ट करता है।
  • मत्ती 5:3 — प्रभु के वचन में 'आत्मिक नम्रता' की गुणगान; यहाँ की नम्रता और परमेश्वर की विशेष कृपा के बीच सांस्कृतिक सम्बन्ध बनता है।

सैद्धान्तिक टिप्पणियाँ (सार और उद्धरण)

Matthew Henry के विचारों से संगतता में कहा जा सकता है कि यह पद ईश्वर की सुननेवाली नेचर और दीनों के प्रति उसकी सावधानी को रेखांकित करता है। Albert Barnes के व्याख्यानों के अनुरूप, "मन दृढ़ करने" का अर्थ आत्मिक सांत्वना और कार्य के लिये सुदृढ़ बनाना ही है। Adam Clarke की शैली में भी इस पद की व्याख्या में ईश्वर की गतिविधि—सुनना और फिर सहायता देना—पर बल मिलता है। (इनमें से किसी एक का शाब्दिक उद्धरण यहाँ शामिल नहीं किया गया है।)

आधुनिक जीवन के लिये अनुप्रयोग

आज के समय में जब अनेक लोग अकेलापन, अनिश्चय या अन्याय का सामना करते हैं, यह वचन याद दिलाता है कि परमेश्वर उन लोगों की विनम्र प्रार्थनाओं को सुनता है और उन्हें आंतरिक दृढ़ता देता है। प्रार्थना और आशा केवल भावनाएँ नहीं; वे परमेश्वर की सहमति और मार्गदर्शन के लिये स्त्रोत हैं। जब आप या आपके परिचित संघर्ष कर रहे हों, तो इस वचन से प्रेरणा लें—प्रार्थना करें, समुदाय में विनम्रता दिखाएँ, और आशा रखें कि ईश्वर कान लगा कर सुनता है और मन को सिद्ध बनाता है।

निष्कर्षतः भजन 10:17 सुस्पष्टता से यह सिखाता है कि परमेश्वर दीन-हीनों की गहरी ज़रूरतों को समझता और पूरा करता है; वह सुनता है और फिर स्थिरता प्रदान करता है—हमारी उम्मीद का आधार यही है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 10:17 समानांतर पद और संबंधित वचन

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तब संकट में पड़कर वह अपने परमेश्‍वर यहोवा को मानने लगा, और अपने पूर्वजों के परमेश्‍वर के सामने बहुत दीन हुआ, और उससे प्रार्थना की।

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कि इसलिए कि तू वे बातें सुनकर दीन हुआ, और परमेश्‍वर के सामने अपना सिर झुकाया, और उसकी बातें सुनकर जो उसने इस स्थान और इसके निवासियों के विरुद्ध कहीं, तूने मेरे सामने अपना सिर झुकाया, और वस्त्र फाड़कर मेरे सामने रोया है, इस कारण मैंने तेरी सुनी है; यहोवा की यही वाणी है।

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