भजन संहिता 10:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उसका मुँह श्राप और छल और धमकियों से भरा है; उत्पात और अनर्थ की बातें उसके मुँह में हैं। (रोम. 3:14)

भजन संहिता 10:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 10:7 पर नज़र: संदर्भ में संक्षेप व्याख्या

यह श्लोक भजनकार की उसी की स्थिति से आता है, जिसमें वह उन अत्याचारी और दुष्टों के व्यवहार पर आहत है जो समाज में अन्याय और छल का प्रदर्शन करते हैं। संदर्भ में यह दिखता है कि परमेश्वर के राज्य में भी इन बुरे लोगों के मुख से शरारत की ध्वनि निकलती रहती है, जबकि उनकी हृदय-स्थिति और कर्म उनके अपने विनाश की ओर इशारा करते हैं। रोम 3:14 में उद्धृत भाग इसे स्पष्ट करते हैं कि पाप के फलों में मुँह से निकलने वाले दुष्कर्मों के संकेत होते हैं।

मुख्य अर्थ

श्लोक बताता है कि दुष्ट व्यक्ति अपने मुँह से विषाक्त शब्दों, शपथ-घटना, छल-कपट और धमकियों को बाह्य रूप से प्रकट करते हैं। यह वह सामाजिक आक्रोश है जो अन्य लोगों को दबाने, निंदा करने और असुरक्षित बनाने के लिए किया जाता है। साथ ही यह संकेत देता है कि such words reveal inward corruption and rebellion against God’s order.

दो-तीन प्रमुख विषय

  • हिंसक और छलपूर्ण दोनों प्रवृत्ति: मुँह से निकलने वाले शब्दो के माध्यम से आक्रामकता और फरेब दोनों प्रकट होते हैं।
  • आलोक-नियंत्रण की कमी: ऐसी भाषा का वास्तविक प्रभाव समुदाय में भय, असुरक्षा और असंतोष पैदा करता है।
  • न्याय की प्रतीक्षा: परमेश्वर न्याय देखता है; शत्रुता के बावजूद सत्य की महिमा अंततः प्रकाशित होती है।

संबंधित आयत और उनका छोटा स्पष्टीकरण

• रोम 3:14 में कहा गया है कि पाप के कर्मों का मूलभूत संकेत मुंह से निकलता है—यह श्लोक उसी आयाम को पुष्टि करता है कि मन की नीयत कैसी भी हो, वक्तव्य और आचरण उसे प्रकट करते हैं।

• भजन 5:9 और 140:3 जैसी अन्य धारणाएं बताते हैं कि बुरे मुँह से निकलने वाले शब्द कैसे सामाजिक शांति और व्यक्तिगत सुरक्षा को ध्वस्त करते हैं।

व्यावहारिक चिंतन

हम अपने शब्दों पर नियंत्रण रखें। दुष्ट की तरह चपल आलोचना या धमकी की भाषा के बजाय, प्रेम, सच और समुदाय के निर्माण की भाषा अपनाएं। यह शास्त्र न केवल शत्रुओं के विरुद्ध उपाय सुझाता है, बल्कि हमारे भीतर परिवर्तन की प्रार्थना को भी प्रेरित करता है।

संक्षिप्त समापन

भजन का यह भाग चेतावनी देता है कि मुख से निकलने वाले शब्द हमारे भेदभाव और दुष्कर्म को प्रकट करते हैं। सत्संगत जीवन के लिए हमें अपने भाषण को पवित्र और तटस्थ रखना चाहिए ताकि सामाजिक संबंध और परमेश्वर के साथ हमारा संबंध मजबूत बने।

क्रॉस-रेफरेंसेज (संक्षेप)

• रोम 3:14 — पाप का गम्भीर संकेत शिराओं में बजता है; मुँह से निकलने वाले शब्दों से पाप का प्रमाण मिलता है।

• वहिक अन्य धारणाएं: भजन 5:9; भजन 140:3 — मुख से निकलने वाले शब्द कैसे महत्ता खो जाते हैं और निंदा, धोखा, और हिंसा का प्रभाव डालते हैं।

नोट: इस पंक्ति के भीतर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-domain टिप्पणियों के संक्षिप्त उद्धरण आवश्यक रूप से संदर्भित हैं। यदि आप चाहें तो मैं उन निष्कर्षों के सीधे वाक्यों को संकेतित करके दे सकता हूँ।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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