भजन संहिता 10:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

दुष्टों के अहंकार के कारण दीन पर अत्याचार होते है; वे अपनी ही निकाली हुई युक्तियों में फंस जाएँ।

भजन संहिता 10:2 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 10:2 – संदर्भ के साथ एक संक्षिप्त व्याख्या

यह पद भजनकर्ता की दयनीय स्थिति और दुष्टों के अहंकार के कारण संसार में होने वाले अन्याय की तस्वीर उठाता है। भजन 10 में अधर्म का फैलाव, अराजकता और निराश्रितों के ऊपर अत्याचार की प्रवृत्ति दृश्य है; उसी क्रम में यह वाक्य कहता है कि दुष्ट अपनी उवाचित चालों में फंस जाते हैं और उन चालों से बच नहीं पाते। दीन व्यक्तियों की दशा में यह एक चेतावनी और सहायता के लिए पुकार है कि परमेश्वर इस अंधकार को देखता है और न्याय करेगा।

केन्द्रीय अर्थ

पंक्ति बताती है कि दुष्टों के गर्व और उनकी उठा-पटक से दीन को असुरक्षा और अत्याचार झेलना पड़ता है। उनके द्वारा बोली गई नीति और चालें uiteindelijk उन्हीं को फंसाती हैं—यानी दुष्ट अपनी ही योजना में ठग जाते हैं। भजनकार यह दिखाता है कि परमेश्वरीय न्याय समय के साथ प्रगट होता है: असत्य, अन्याय और दमन से भरे समाज में ईश्वरीय हस्तक्षेप आवश्यक है।

मुख्य थीम्स

  • दुष्टों के गर्व का परिणाम शोषण और डर के बजाय अंततः उल्टा पड़ना है; यह बतलाता है कि निष्कर्ष वही प्राप्त होते हैं जो नेक बनकर रहते हैं।
  • दीन-विभूति के साथ रहने वाला ईश्वर न्याय का दूत है; उनके पक्ष में प्रतिपल से प्रतिपल क्रिया-वाही रहता है।
  • जो नीति दिग्भ्रमित करती है, वह स्वयं pièges बन जाती है—यानी तर्कपूर्ण चालें भी उन्हें ही पकड़ लेती हैं।

अनुभागी cross-references

- भजन 9:16–17: न्याय का समय और दुष्टों का उन्मूलन; यह दिखाता है कि दमनकारी भी एक दिन उत्तरदायी होंगे।

- भजन 37:7–9: परमेश्वर पर भरोसा रखने से दुष्टों के सुव्यवस्थित अधिकार ढीले पड़ते हैं; धैर्य और विश्वास से न्याय आता है।

- नीतिवचन 16:18: गर्व पतन का पूर्व संकेत है; अहंकार अपने पथ में लगाम बनकर लौटता है।

व्यावहारिक विचार

हम दैनंदिन जीवन में इन पंक्तियों से सीखते हैं कि अहंकारी नीति कितनी भी प्रबल क्यों न लगे, परमेश्वर के समय में उसका उत्तर होना है। कठिन परिस्थितियों में सत्य, दया और धैर्य बनाए रखना चाहिए। साथ ही कमजोरों के लिए अन्याय के विरुद्ध सहायता के हाथ आगे बढ़ाने चाहिए, क्योंकि दीन के पक्ष में ईश्वर का न्याय निष्काम नहीं रहता।

संक्षिप्त निष्कर्ष

भजन संहिता 10:2 एक चेतावनी और आशा दोनों देता है: दुष्ट के अहंकार से उत्पन्न अत्याचारTemporary हो सकता है, पर परमेश्वर का न्याय और दीनों की सुरक्षा अडिग है। यह पाठ हमें सच और विश्वास के साथ चलते रहने की प्रेरणा देता है।

पहचान योग्य उद्धरण (Public-domain commentaries)

इस प्रवचनों में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke से संक्षिप्त, वैधानिक विचार जोड़े जाते हैं:

— "The proud man's snare shall be broken by the Lord, and the righteous shall be delivered." (याचना से उद्धृत सार) —

• नोट: उपरोक्त लाइनें पब्लिक-डोमेन टिप्पणीकारों के सामान्य विचारों का सार हैं; विस्तृत उद्धरण उपलब्ध नहीं है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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