भजन संहिता 105:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उस समय तो वे गिनती में थोड़े थे, वरन् बहुत ही थोड़े, और उस देश में परदेशी थे।

भजन संहिता 105:12 पद-दर-पद बाइबल टीका

मुख्य interpretive बिंदु

भजन संहिता 105:12 में बयान है कि प्रभु के वचन-प्रतिज्ञा के समय वे केवल गिने-चुने लोग थे—थोड़े, फिर भी वे परमेश्वर के वादे के अनुसार परदेशी थे। यह वाक्यांश जिसे संकरे समुदाय के लिए “गिनती” कहा गया है, उस समय की भौगोलिक-संख्या की कमी और परदेशी होने की स्थिति को उजागर करता है, जिससे यह दर्शाता है कि ईश्चरित वचन उन लोगों के लिए लाया गया जो साधारण लगते थे, परन्तु परमेश्वर के उद्देश्य में उनका महत्व था। यह स्मरण कराता है कि परमुख भूमिका विश्वास के टेस्ट और संगठित समुदाय के बाहर से आने वाले लोगों के लिए भी है; प्रभु अपने वचनों को कभी भी घटने नहीं देते, भले ही वे संख्या में कम हों।

साहित्यिक संदर्भ

यह आयत क्रमशः तात्त्विक संदर्भ में तो वह समय दिखाती है जब इस्राएल का देश-प्रवास हुआ, और वहाँ के प्रवास की स्थितियाँ भी अस्थिर थीं। इस वाक्य का व्याकरण गिनती/परदेशीपन पर बल देता है: परमेश्वर के लोग एक छोटे समूह के रूप में थे, पर उनकी पहचान और वादा महान था। यह पंक्ति समय-सीमा के भीतर एक इतिहासिक स्मरण दिलाती है कि परमेश्वर अपने वादों को कैसे न केवल बड़े संख्याबल के साथ, बल्कि कम संख्या के साथ भी पूर्ण करता है।

θεological significance (आध्यात्मिक महत्व)

यहांश हमें यह सिखाता है कि ईश्वर के योजनाक्रम में शक्ति संख्या पर नहीं, बल्कि वादे के पालन पर निर्भर है। nhỏ समूह भी परमशक्ति के केन्द्र में रहता है जब वे उसे विश्वासपूर्वक अपनाते हैं। परिवर्तन-सृजन, आशा, और उद्धार का कार्य परमेश्वर के निष्पक्ष और दयालु नियन्त्रण में है। यह भी संकेत देता है कि परदेशीपन और अन्याय के बीच भी ईश्वर अपने लोगों को सुरक्षित रखता है और उनकी पहचान को एक नए दिशा में विकसित करता है, ताकि वे विश्व-यात्रा में आस्थागत प्रेरणा बनें।

पवित्रशास्त्र के बीच संबंध (Cross-references)

  • उद्धार के वादे के समय छोटा समूह: जाँच करें कि किस प्रकार परमेश्वर ने अब्राहम के वंश की ओर संकेतित किया कि वह एक विशाल राष्ट्र बनेगा—यद्यपि शुरू में बहुत कम थे; यह संदर्भ यह दिखाता है कि संख्या नहीं, बल्कि वाचा की सच्चाई महत्वपूर्ण है।
  • परदेशीपन की अनुभूति: पवित्र लेखन में अनेक बार यह दर्शाया गया है कि परमेश्वर के लोग जब संसार में होते हैं तो वे जब भी स्मरण किए जाते हैं, उनकी पहचान उनकी आस्था से जुड़ी रहती है।
  • वचन-आस्था बनाम परिस्थिति: प्रार्थना और विश्वास से मिलने वाला साहस, जब परिस्थितियाँ तंग हों, तब भी ईश्वर के वचन आशीर्वाद बनकर सामने आते हैं।

इन कड़ियों से स्पष्ट होता है कि संख्यात्मक घट-kom से नहीं, बल्कि ईश्वर के वचन के निर्माण से वास्तविकता बनती है।

यथार्थ विचारणीय प्रश्न

  • क्या मैं अपने छोटे कदमों में भी परमेश्वर के वचन के अनुरूप बढ़ रहा/रही हूँ?
  • क्या मैं परदेशीपन या अस्थिरताओं के बीच भी ईश्वर की योजना पर भरोसा रखता/रखती हूँ?
  • मेरे विश्वास में संख्या की कमी मुझे परिभाषित करती है या मैं वादे के पूर्ण होने की आशा रखता/रखती हूँ?

संक्षिप्त निष्कर्ष

इस आयत में गिनती में कम होना और परदेशी होना एक साथ आता है ताकि परमेश्वर के वादे की महिमा उजागर हो। परमेश्वर अत्यंत व्यवहार में अपने लोगों की सुरक्षा और उद्धार के लिए, भले ही वे कितने हों, काम करता है। हमारी आस्था यह मानती है कि वह शक्ति जो छोटे समूह के भीतर भी सक्रिय रहती है, वही विश्वस्त वचन को पूर्ण करती है।

पूर्ववर्ती टिप्पणीकारों से संक्षिप्त उद्धरण (OA)

यदि उपलब्ध हो तो नीचे 2-3 पंक्तियाँ संक्षेप में उद्धृत हैं:

Matthew Henry: “...”

Albert Barnes: “...”

Adam Clarke: “...”

नोट: उपर्युक्त ठोस उद्धरण केवल आवश्यक होने पर और जहां उपलब्ध हों, वही जोड़े जाते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 105:12 समानांतर पद और संबंधित वचन

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व्यवस्थाविवरण 7:7 (HINIRV) »
यहोवा ने जो तुम से स्नेह करके तुम को चुन लिया, इसका कारण यह नहीं था कि तुम गिनती में और सब देशों के लोगों से अधिक थे, किन्तु तुम तो सब देशों के लोगों से गिनती में थोड़े थे*;

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उत्पत्ति 34:30 (HINIRV) »
तब याकूब ने शिमोन और लेवी से कहा, “तुमने जो इस देश के निवासी कनानियों और परिज्जियों के मन में मेरे प्रति घृणा उत्‍पन्‍न कराई है, इससे तुमने मुझे संकट में डाला है,* क्योंकि मेरे साथ तो थोड़े ही लोग हैं, इसलिए अब वे इकट्ठे होकर मुझ पर चढ़ेंगे, और मुझे मार डालेंगे, तो मैं अपने घराने समेत सत्यानाश हो जाऊँगा।”

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इब्रानियों 11:9 (HINIRV) »
विश्वास ही से उसने प्रतिज्ञा किए हुए देश में जैसे पराए देश में परदेशी रहकर इसहाक और याकूब समेत जो उसके साथ उसी प्रतिज्ञा के वारिस थे, तम्‍बुओं में वास किया। (उत्प. 26:3, उत्प. 35:12, उत्प. 35:27)

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