भजन संहिता 105:29 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उसने मिस्रियों के जल को लहू कर डाला, और मछलियों को मार डाला।

भजन संहिता 105:29 पद-दर-पद बाइबल टीका

सीधे अर्थ का सार

भजन संहिता 105:29 बताती है कि परमेश्वर ने मिस्र के जल को लहू में बदल दिया और पानी की नदी-नदियों में मछलियाँ मर गईं। यह एक चेतावनीात्मक और उद्धार-कर्म की चापलूसी है: परमेश्वर की बड़ाई और उसकी क्रोध-करुणा दोनों का प्रकटन, जो इजराइल के लिए उद्धार की योजना पूरी करने हेतु मिस्र पर चमत्कारिक चोट के रूप में घटित हुआ।

संदर्भ-प्रसंग

यह भजन संहिता का हिस्सा उन समयों का स्मरण है जब ईश्वर ने मिस्र में दस प्लेगों के क्रम से बहाव-प्रकटन दिखाकर फिर से अपने चुने हुए लोगों को मुक्त किया। 105वां अध्याय विश्वासी समुदाय के लिए इतिहास की पुनरावृत्ति है: परमेश्वर ने तर्कसंगत न्याय के साथ साथ दया और उद्धार भी किया। यह घटना मिस्र के साथ परमेश्वर के समझौते के संकेतों में से एक है, जिसमें उसने अपने समय-निर्धारण अनुसार इजराइल के चिह्न बना कर उद्धार का मार्ग साफ किया।

विश्लेषणात्मक विचार

  • नमकीन संकेत: पानी का लहू बनना वही चमत्कार है जो कोढ़-पीड़ा और जीवन-यापन के लिए एक कटु विरोध को दर्शाता है—जल जीवन का स्रोत है, और गणना में यह परिवर्तन मिस्र की सत्ता का प्रतीकहीन तिरस्कार दर्शाता है।
  • कायांकार-न्याय: यह कार्रवाई एक चेतावनी भी है— जो लोग परमेश्वर के प्रति प्रतिरोध में रहते हैं, उनके लिए प्रकृति भी कुछ हद तक प्रतिशोध बन जाती है; परन्तु उद्धार के समय परमेश्वर अपने लोगों के पक्ष में रहते हैं।
  • सम्पूर्ण कार्य-योजना: मिस्र की समाप्ति के साथ धार्मिक-समाज के लिए मार्ग बनता है—कथा न सिर्फ संघर्ष की है बल्कि प्रभु की वाचा और वाचिक गतिविधियों की गाथा है।

परस्पर सम्बन्धी पवित्र वाक्य

1) उन जगहों की याद दिलाती भजन-काल की घटनाएं जहां परमेश्वर ने प्रकृति के नियमों को पलट कर उद्धार दिखाया।

2) उद्धार के संकेतों में से एक—कथा के साथ नया विश्वास और विश्वासियों के समुदाय का निर्माण।

3) धर्म-संरक्षण के संदर्भ में, परमेश्वर के नाम की महिमा और मिस्र के भाग-दौड़ वाले दृष्टांत समझाने में सहायता देता है।

मैथ्यू हेनरी, ऐलबर्ट बर्न्स, एडम क्लार्क से संक्षिप्त निष्कर्ष

यह पंक्तियाँ ईश्वर की स्वामित्व और प्रभाव को दर्शाती हैं—जो लोग परमेश्वर के वचन के अनुसार चलते हैं, वे दया और न्याय दोनों के अनुभव पाते हैं।

संक्षिप्त उपयोगी निष्कर्ष

  • परमेश्वर अपने लोगों के उद्धार के लिए शक्तिशाली चमत्कार दिखाते हैं।
  • नियति और निर्णय के समय प्रकृति भी परमेश्वर के विरोध नहीं कर पाती—पर वह अपने लोगों के पक्ष में है।

क्रॉस-रेफरेंसेज और उनका संक्षिप्त स्पष्टीकरण

1) अन्य स्थानों में जल परिवर्तन के चमत्कार—यह संकेत देता है कि परमेश्वर सत्ता के संकेतक के रूप में प्राकृतिक नियमों को भी बदल सकता है।

2) उद्धार के समय की घटनाएं—ईश्वर की निष्ठा और उसकी शांति का प्रमाण हैं, जो भय के समय भी विश्वास को बनाए रखते हैं।

3) परमेश्वर की न्याय-करुणा का संतुलन—कठोर निर्णय भी प्रेमपूर्ण उद्देश्य से किया गया है ताकि उद्धार संभव हो सके।

व्यावहारिक takeaway

जब जीवन पानी जैसे स्रोतों में कंपन हो जाए, तब भी परमेश्वर के स्वतंत्र नियम और उद्धार के मार्ग पर भरोसा बनाए रखें। चाहे स्थिति कैसी भी हो, ईश्वर की महिमा और उसकी चेष्टा हमारे साथ बनी रहती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 105:29 समानांतर पद और संबंधित वचन

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तब मूसा और हारून ने यहोवा की आज्ञा ही के अनुसार किया, अर्थात् उसने लाठी को उठाकर फ़िरौन और उसके कर्मचारियों के देखते नील नदी के जल पर मारा, और नदी का सब जल लहू बन गया।

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भजन संहिता 78:44 (HINIRV) »
उसने तो मिस्रियों की नदियों को लहू बना डाला, और वे अपनी नदियों का जल पी न सके। (प्रका. 16:4)

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यशायाह 50:2 (HINIRV) »
इसका क्या कारण है कि जब मैं आया तब कोई न मिला? और जब मैंने पुकारा, तब कोई न बोला? क्या मेरा हाथ ऐसा छोटा हो गया है कि छुड़ा नहीं सकता? क्या मुझ में उद्धार करने की शक्ति नहीं? देखो, मैं एक धमकी से समुद्र को सूखा देता हूँ, मैं महानदों को रेगिस्तान बना देता हूँ; उनकी मछलियाँ जल बिना मर जाती और बसाती हैं।

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