Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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अर्थ का प्रत्यक्ष सार
निर्गमन 7:20 में बताया गया है कि मूसा और हारून ने परमेश्वर की आज्ञा के अनुसार वही किया जिसकी परिणति नील नदी के जल के लहर ahaan सभी जल का रक्त बन जाना है। यह ईश्वरीय संकेत है जो फ़िरौन और मिस्र के लोगों के लिए अलाम्पुरुष्त (नोटिस) है कि परमेश्वर उनकी अंधकारपूर्ण नीतियों को तौक़ीद से पकड़ रहा है और उसका समर्थक दया-प्रभाव उनके सामने है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
इस घटना के पीछे मिस्र-निर्गमन की क्रमशः महत्त्वपूर्ण कहानी है जहाँ ईश्वर अपने चयनित लोगों को दासित्व से मुक्त कराने का उद्देश्य लेकर आते हैं। नील नदी मिस्र की जीवन-रेखा थी; उसका जल रक्त बनना, उसकी प्राण-व्यवस्था में बड़े प्रभाव डालना और सामाजिक-आर्थिक असंतुलन को उजागर करना है। यह ईश्वरीय क्रोध का संकेत है, परन्तु साथ ही मिस्र के पापों पर एक अत्यंत स्पष्ट न्याय का प्रदर्शन है।
व्याख्यात्मक बिंदु
अनुशंसित क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त व्याख्या के साथ)
1) यो-average: पहले चिह्नों के क्रम में यह जल-परिवर्तन मिस्र की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को प्रभावित करता है; यह दिखाता है कि दयालुता के साथ न्याय की प्रक्रिया चलती है।
2) Exodus 7:14-24: इस अध्याय के आरम्भ में मूसा-हारून पर फ़िरौन के कठोर दमन और ईश्वर के संकेतों के क्रम स्पष्ट होते हैं; रक्त-जल का चिह्न पहले चिह्नों में शामिल है।
3) Psalms 105:23-26: इस चिह्न की स्मृति में परमेश्वर के उद्धार-कार्य की पुष्टि मिलती है कि वह उत्पत्ति और देह-प्राप्ति के लिए समर्थ है।
छोटा विचार-नोट
संक्षेपित निष्कर्ष
नील नदी का रक्त बनना परमेश्वर के चिह्नों में से एक है जो यह दिखाता है कि वह अपने लोगों को मुक्त कराने के लिए शक्तिशाली है और जहां मानव-नीतियाँ टकराती हैं, वहां उसकी दया और न्याय साथ-साथ चलते हैं। इस घटना से सीख मिलती है कि परमेश्वर के दायित्वों के अनुरूप आज्ञा मानना हमारे आत्म-संयम और विश्वास की पुष्टि करता है।