निर्गमन 7:20 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब मूसा और हारून ने यहोवा की आज्ञा ही के अनुसार किया, अर्थात् उसने लाठी को उठाकर फ़िरौन और उसके कर्मचारियों के देखते नील नदी के जल पर मारा, और नदी का सब जल लहू बन गया।

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निर्गमन 7:20 पद-दर-पद बाइबल टीका

अर्थ का प्रत्यक्ष सार

निर्गमन 7:20 में बताया गया है कि मूसा और हारून ने परमेश्वर की आज्ञा के अनुसार वही किया जिसकी परिणति नील नदी के जल के लहर ahaan सभी जल का रक्त बन जाना है। यह ईश्वरीय संकेत है जो फ़िरौन और मिस्र के लोगों के लिए अलाम्पुरुष्त (नोटिस) है कि परमेश्वर उनकी अंधकारपूर्ण नीतियों को तौक़ीद से पकड़ रहा है और उसका समर्थक दया-प्रभाव उनके सामने है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

इस घटना के पीछे मिस्र-निर्गमन की क्रमशः महत्त्वपूर्ण कहानी है जहाँ ईश्वर अपने चयनित लोगों को दासित्व से मुक्त कराने का उद्देश्य लेकर आते हैं। नील नदी मिस्र की जीवन-रेखा थी; उसका जल रक्त बनना, उसकी प्राण-व्यवस्था में बड़े प्रभाव डालना और सामाजिक-आर्थिक असंतुलन को उजागर करना है। यह ईश्वरीय क्रोध का संकेत है, परन्तु साथ ही मिस्र के पापों पर एक अत्यंत स्पष्ट न्याय का प्रदर्शन है।

व्याख्यात्मक बिंदु

  • आज्ञापालन का प्रभाव: मूसा-हारून की आज्ञा-पालन से ईश्वर के संकेत स्पष्ट होते हैं; इस मामले में उनका भागीदारी पवित्र विधान के अनुरूप है।
  • परिशुद्धता बनाम परिणाम: जल का रक्त बनना एक विशिष्ट चिह्न है—प्रभु के संदेश की गहराई की प्रतीक; हाला कि यह कठिनाई को बढ़ाता है, परन्तु भगवान के उद्देश्य के पक्ष में होता है।
  • विश्वसनीयता और साक्ष्य: फ़िरौन के सामने यह पहली बड़ी चेतावनी है कि परमेश्वर के पास शक्ति है और उसे मानना पड़ेगा; यह पुनः-प्रचारित दायित्व और तात्कालिकता की याद दिलाती है।

अनुशंसित क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त व्याख्या के साथ)

1) यो-average: पहले चिह्नों के क्रम में यह जल-परिवर्तन मिस्र की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को प्रभावित करता है; यह दिखाता है कि दयालुता के साथ न्याय की प्रक्रिया चलती है।

2) Exodus 7:14-24: इस अध्याय के आरम्भ में मूसा-हारून पर फ़िरौन के कठोर दमन और ईश्वर के संकेतों के क्रम स्पष्ट होते हैं; रक्त-जल का चिह्न पहले चिह्नों में शामिल है।

3) Psalms 105:23-26: इस चिह्न की स्मृति में परमेश्वर के उद्धार-कार्य की पुष्टि मिलती है कि वह उत्पत्ति और देह-प्राप्ति के लिए समर्थ है।

छोटा विचार-नोट

  • ईश्वर एकदम स्पष्ट संकेत देकर अपने उद्देश्य की योजना दिखाते हैं—न कि केवल दयालुता, बल्कि न्यायपूर्ण कार्रवाई भी साथ रहती है।
  • मानवीय सीधी प्रतिक्रिया—फिरौन का दमनकारी शासन—पर भगवान की योजना अन्ततः उसकी महिमा के लिए है।

संक्षेपित निष्कर्ष

नील नदी का रक्त बनना परमेश्वर के चिह्नों में से एक है जो यह दिखाता है कि वह अपने लोगों को मुक्त कराने के लिए शक्तिशाली है और जहां मानव-नीतियाँ टकराती हैं, वहां उसकी दया और न्याय साथ-साथ चलते हैं। इस घटना से सीख मिलती है कि परमेश्वर के दायित्वों के अनुरूप आज्ञा मानना हमारे आत्म-संयम और विश्वास की पुष्टि करता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

निर्गमन 7:20 समानांतर पद और संबंधित वचन

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उसने तो मिस्रियों की नदियों को लहू बना डाला, और वे अपनी नदियों का जल पी न सके। (प्रका. 16:4)

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भजन संहिता 105:29 (HINIRV) »
उसने मिस्रियों के जल को लहू कर डाला, और मछलियों को मार डाला।

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निर्गमन 17:5 (HINIRV) »
यहोवा ने मूसा से कहा, “इस्राएल के वृद्ध लोगों में से कुछ को अपने साथ ले ले; और जिस लाठी से तूने नील नदी पर मारा था, उसे अपने हाथ में लेकर लोगों के आगे बढ़ चल।

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