भजन संहिता 53:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वे सब के सब हट गए; सब एक साथ बिगड़ गए; कोई सुकर्मी नहीं, एक भी नहीं। (भज. 14:1-3, रोम. 3:10-12)

भजन संहिता 53:3 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 53:3 — संदर्भ में व्याख्या

यह पद जलूस-पूर्व की मानवता की असंतुष्टि और पाप के व्यापक प्रभाव को इंगित करता है। भजनकार यह बताता है कि सब लोग एक साथ गिर चुके हैं और किसी भी व्यक्ति में नैतिक सुकर्मिता की कमी है; इस दृश्य से यह स्पष्ट होता है कि पाप एक वैश्विक स्थिति बन चुका है, न कि केवल कुछ व्यक्तियों का निजी दोष। रोम 3:10-12 और भज 14:1-3 के संदर्भ से यह संदेश और मजबूत होता है: हर मन अधर्म की ओर उन्मुख है और कोई सिर उठाने लायक नहीं रहता।

मुख्य अर्थ

53:3 में कहा गया है कि सभी लोग सहयोग से बिगड़ गए हैं—किसी में सुकर्म नहीं, बिना अपराधपूर्णता की कोई भी अच्छाई नहीं। यह एक सच्चाई है जो पाप की व्यापकता और मानव हृदय की अस्वीकृति का चित्रण करती है। भजनकार यह प्रकट करता है कि पापपूर्ण स्थिति से मुक्ति केवल उद्धारकर्ता की कृपा से संभव है।

तीन प्रमुख थीम

  1. मानवीय एकता में पाप का प्रभाव — सब एक रास्ते पर පිचाए गए हैं और नैतिक देहाली दिखाई देती है।
  2. सुकर्मी की कमी — परमेश्वर के सामने भी मानवीय नैतिक प्रस्तुतियाँ न्यून हैं; यह चीज़ उद्धार की आवश्यकता को उजागर करती है।
  3. उद्धार की आवश्यकता — शुद्धता केवल ईश्वर की कृपा से मिल सकती है; यह पाप के गहरे प्रभाव का प्रतिकार है।

संबंधित आयतन

• रोमन्‍स 3:10-12: मानव हृदय की सार्वभौमिक पापप्रियता का विस्तृत विवेचन; “कौन निज को ठग सकता है?” जैसे विचारों को समर्थन देता है।

• भज 14:1-3: एक ही विचार को और स्पष्ट करते हुए बताते हैं कि कौन समझदार है जो पाप से दूर रहे; आंखें खोलकर देखने पर सभी बिगड़ते हैं।

• रोम 3:23: सभी ने परमेश्वर की महिमा से गिरा दिया है—यह पद उस व्यापक स्थिति की पुष्टि करता है।

व्यावहारिक चिंतन

हम में से हर व्यक्ति कैसे इस व्यवस्था के विरुद्ध प्रतिक्रिया करता है? यदि सब कुछ बिगड़ गया है, तो हमें स्वयं को बचाने के उपाय के रूप में उद्धार के स्रोत की आवश्यकता है। यह पद हमें नम्रता और आस्थापुरक आत्म-समर्पण के लिए प्रेरित करता है—ताकि हम अपने हृदय में ईश्वरीय परिवर्तन के लिए खुल जाएँ।

आंतरिक सार

53:3 एक तात्कालिक स्मरण कराता है कि मानवता की नैतिक स्थिति को केवल ईश्वर की कृपा पुनर्स्थापित कर सकती है। उद्धार की आवश्यकता स्पष्ट है—न कि थोड़े सुधारों से, बल्कि पूर्ण परिवर्तन से।

कैसे देखें—पढ़ने के लिए छोटे संदर्भ

• भजन संहिता 14:1-3 — मानव हृदय की स्थिति का समान चित्र; कौन सुकर्मी है? वाहक।

• रोम 3:10-12 — सभी ने मूर खण्डित भाव से नकल नहीं की; हर किसी में पाप का प्रभाव है।

एंट्रप्रीटिंग उद्धरण (सार):

Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के विचारों से मिलकर एक संयुक्त व्याख्या बनती है: सभी मनुष्य में पाप का प्रभाव व्यापक है और नैतिक सुकर्म की कमी है; उद्धार के लिए मसीह की कृपा अनिवार्य है। (नोट: नीचे के पंक्तियों में इन टिप्पणीकारों के छोटे सीधे उद्धरण केवल उपलब्ध होने पर ही बताए जाते हैं।)

छोटे उद्धरण संकेत: “सभी के सब हट गए; सब एक साथ बिगड़ गए; कोई सुकर्मी नहीं, एक भी नहीं।” – यह शब्दपंक्तियाँ मूल पाठ का संक्षेपित सार हैं और विभिन्न टिप्पणीकारों के परिणामों में समान भाव को दर्शाती हैं।

क्लिपिंग नोट: अगर आप चाहें तो मैंMatthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरणों के उपयुक्त संकलन के लिए मौजूदा सार्वजनिक-domain टेक्स्ट्स से छोटे उद्धरण निकाल कर सुझा सकता हूँ।

समाप्ति सार: भजन 53:3 हमें सिखाता है कि मनुष्य की स्थिति पाप से पूर्णतः विफल है और उद्धार की आवश्यकता परमपिता परमेश्वर की कृपा से ही संभव है; यह संदेश हमें रोज़मर्रा की आत्म-निरीक्षण और विश्वास-की ओर पुनः मोड़ देता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 53:3 समानांतर पद और संबंधित वचन

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वे सब के सब भटक गए, वे सब भ्रष्ट हो गए; कोई सुकर्मी नहीं, एक भी नहीं। (रोमी. 3:10-11)

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