Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
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निर्गमन 22:19 — पशुवध के धारणाओं पर कड़ी चेतावनी
पद का तुरंत संदर्भ: यह नियम तब दिखता है जब ईश्वर ने इनसे उन कर्मों के लिए दंड निर्धारित किए जिनसे समुदाय की पवित्रता और सामाजिक सुरक्षा खतरे में पड़ती है। “जो कोई पशुगमन करे वह निश्चय मार डाला जाए” ऐसे स्पष्ट वचनों से यह संदेश देता है कि यथार्थ में पशु के साथ किया गया अत्याचार समाज की आत्मा को जख्मी करता है और God's कानून की खिड़कियाँ साफ-साफ खोल देता है कि अपराध का दुष्प्रभाव मानव से लेकर समुदाय तक फैला है।
ईश्वर की प्रकृति और विश्वास पर पाठ का संकेत
यह कड़ी सजा दिखाती है कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए स्पष्ट नैतिक मानदंड चाहते हैं। हिंसा के प्रति कड़ी प्रतिक्रिया यह बताती है कि ईश्वर न्याय और दशनि के प्रति जागरूक हैं, ताकि कमजोर और निरीह जीव भी सुरक्षित रहें। साथ ही, यह दंड क्रम यह भी बताता है कि नीतियाँ केवल आचरण पर नहीं, बल्कि आंतरिक मनःस्थिति और प्रकट व्यवहार पर भी कसकर लागू होती हैं।
महत्वपूर्ण शब्दों/छवियों की स्पष्टता
अन्य संबंधित आयतें (Cross-references)
यहाँ कुछ प्रचलित संदर्भ हैं जो इस सिद्धांत की व्यापकता दिखाते हैं:
इन संदर्भों से समझ आता है कि समूह के कानून का उद्देश्य केवल अपराधी को दंड देना नहीं, बल्कि समाज के भीतर दया, जिम्मेदारी और सुरक्षा को बनाए रखना है।
आज के जीवन में प्रयोजन
परिवार और समुदाय में कमजोर प्राणी के साथ क्रूरता को अस्वीकार करना हमारे नैतिक जीवन का हिस्सा बनना चाहिए। निर्गमन 22:19 यह स्मरण कराता है कि विश्वास-आचरण सामाजिक सुरक्षा के लिए आवश्यक है—हम कैसे एक-दूसरे के कल्याण के लिए प्रभावी और निष्पक्ष नियम बनाएं, यह भी ईश्वर के न्याय के क्षेत्र में आता है।
हिंदी में संकलित टिप्पणी (उद्धरण संकेत सहित)
मैथ्यू हेनरी (सार): “कड़ाई से अपराध के प्रति रोक—क्योंकि बिना रुके हुए अन्याय समाज को चुभता है।” (इशारे coy) यह उद्धरण पूर्ण रूप से संपूर्ण पाठ में नहीं है; संदर्भ के अनुसार रूपरेखा प्रयुक्त है।
आल्बर्ट बार्न्स (सार): “एक सच्चे समाज में हर जीव के प्रति सम्मान और दायित्व आवश्यक है; अपराध का दंड उसका कारण बनते अन्याय को रोकता है।”
आदम क्लार्क (सार): “कानून और न्याय के कारण आचरण की कठोर व्यवस्था आवश्यक है ताकि निर्दोष लोग सुरक्षित रहें।”
सार: यह Verse एक स्पष्ट और कठोर नियम के रूप में है—जो पशु-हिंसा को अपराध मानता है, ताकि समाज में सुरक्षा और नैतिकता बनी रहे। उदाहरणार्थ, दायित्वों के साथ-साथ दंड की स्पष्टता यह दिखाती है कि ईश्वर के कानून में सुधार और नियंत्रण दोनों उद्देश्य हैं।