Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
निर्गमन 22:1 निर्गमन 22:2 निर्गमन 22:3 निर्गमन 22:4 निर्गमन 22:5 निर्गमन 22:6 निर्गमन 22:7 निर्गमन 22:8 निर्गमन 22:9 निर्गमन 22:10 निर्गमन 22:11 निर्गमन 22:12 निर्गमन 22:13 निर्गमन 22:14 निर्गमन 22:15 निर्गमन 22:16 निर्गमन 22:17 निर्गमन 22:18 निर्गमन 22:19 निर्गमन 22:20 निर्गमन 22:21 निर्गमन 22:22 निर्गमन 22:23 निर्गमन 22:24 निर्गमन 22:25 निर्गमन 22:26 निर्गमन 22:27 निर्गमन 22:28 निर्गमन 22:29 निर्गमन 22:30 निर्गमन 22:31



प्रश्न का सरल अर्थ
निर्गमन 22:13 कहता है: “और यदि वह फाड़ डाला गया हो, तो वह फाड़े हुए को प्रमाण के लिये ले आए, तब उसे उसको भी भर देना न पड़ेगा।” इस वाक्य का तात्पर्य यह है कि अगर किसी ने किसी चीज को नुकसान पहुँचाया या फाड़ दिया, और वह वस्तु गुप्त रूप से नुकसान हुआ या टूट गया, तो नुकसान की भरपाई से भक्त या उत्तरदायी पक्ष मुक्त हो सकता है जब वह नुकसान प्रमाणित हो जाए कि वह वस्तु टूट गई थी या नष्ट हो चुकी थी।
संदर्भ-परिप्रेक्ष्य
यह प्रकरण नियमों के एक विस्तृत भाग का हिस्सा है जो सामाजिक जीवन में निष्कपटता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए दिए गए थे। उस समय के नागरिक-समुदाय में मोल-तोल, वस्तुओं की सुरक्षा और नुकसान की भरपाई एक सामान्य मामला था। यदि नुकसान उसी समय या किसी प्रमाण के साथ स्पष्ट हो जाता, तो आरोपी की जिम्मेदारी घट जाती थी; अन्यथा, देय भरपाई करनी पड़ सकती थी।
व्याख्यात्मक बिंदु
छोटे थीमैटिक बिंदु
अनुषंगिक आयतें (Cross-references)
1) निर्गमन 21:28-36 में पशु-हानि के नियम यह दिखाते हैं कि नुकसान की भरपाई की पद्धति वस्तु की प्रकृति और नुकसान के स्वरूप पर निर्भर करती है; यह verse इस भावना को स्पष्ट करती है कि जिम्मेदारी और क्षतिपूर्ति के नियम समुदाय के बीच सुव्यवस्थित रहते हैं।
2) नियमशास्त्र बनाम दायित्व का सिद्धांत देखने के लिए काबजुल (कानून) 5:1 का विचार उपयोगी है, जो कहता है कि कानून के सम्मुख सभी बराबर हैं और सम्यक प्रमाण के आधार पर निर्णय लिए जाते हैं।
3) ओक्लाह 4:3-4 के अनुसार न्यायप्रिय प्रतीत होने पर समुदाय में विश्वास बढ़ता है कि नुकसान के समय ना तो अत्यधिक दंड है ना अत्यधिक उदासीनता; संतुलित मुआवजे से व्यवस्था सुरक्षित रहती है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
इस Verse से सीख मिलती है कि नुकसान के मामलों में प्रमाण-आधारित निर्णय न्याय को मजबूत करते हैं। यदि नुकसान स्पष्ट और प्रमाणित है, तो दोषी को भरपाई से मुक्त किया जा सकता है; अन्यथा, इतिहास और स्थिति के अनुसार उचित दायित्व तय होते हैं। जीवनानुसरण में इसका अर्थ है कि विवादों में स्पष्ट प्रमाण और निष्पक्ष प्रक्रिया से समाधान निकालना चाहिए, ताकि समूह में विश्वास बना रहे।
संक्षेपित स्रोत-भाव
यह विचारशील संकेतक भाग सामाजिक कानून-व्यवस्था के उन ढांचे का हिस्सा है जो व्यक्तिगत जिम्मेदारी और समुदायिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाते हैं।
नोट: इस पंक्ति की परिभाषा और व्याख्या में Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke जैसे पवित्र-ग्रंथ टिप्पणीकारों के पूर्ववर्ती विचारों का सार संचारित है; उनके स्पष्ट शब्दों के छोटे उद्धरण नीचे उधृत हैं यदि उपलब्ध हों: “...”