Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
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सीधा अर्थ (Meaning at a glance)
निर्गमन 23:22 कहता है: यदि तुम सचमुच परमेश्वर की आदर्श कल्पनाओं के अनुसार उसकी आज्ञा मानोगे और जो कुछ मैं कहूँ वह करो, तो वह तुम्हारे शत्रुओं का शत्रु और तुम्हारे द्रोहियों का द्रोही बनेगा।
पृष्ठभूमि और संदर्भ (Contextual background)
यह वचन तब दिए गए जब ईश्वर इस्राएलियों से उनके मार्गदर्शन, सामाजिक कानून और ईमानदार करुणा की स्थापना के लिए एक नया आशीर्वाद-नियम व आत्म-नियमन देता है। परमेश्वर यह बताता है कि उसकी इच्छा को मानना और उसकी योजनाओं के अनुसार जीना ही सत्ता-प्रभुता के संचालन का मार्ग है; अन्यथा परिणाम विपरीत हो सकता है। यह वचन दिव्य-योजना को मानने की सुरक्षा और सीमाओं के साथ जुड़ा है।
व्याख्यात्मक अवलोकन (Interpretive observations)
थीमेटिक सार (Thematic highlights)
क्रॉस-रेफरेंसेस (Cross-references) और उनके संकेत
1) व्यवस्थापिका नियमों के पालन के लाभ पर दृश्यमान संकेत: यह विचार अन्य स्थानों में भी प्रतिध्वनित होता है जहाँ परमेश्वर अपने लोगों के ईमानदार बन जाने पर सुरक्षा और संरेखण देता है।
2) प्रभु-समर्थन के कर्तव्य: आशीर्वाद तब मिलता है जब ईश्वर की उद्देश्य-विधियों के अनुसार जीवन जीया जाता है।
3) शत्रु-नियंत्रण का विचार: दुष्टों के विरुद्ध परमेश्वर की सहायता तब स्पष्ट होती है जब हम उसकी आज्ञाओं का पालन करते हैं।
सम्पादन-आधार विचार (Editorial integration)
प्रसंग के अनुसार, यह वचन केवल आर्डर नहीं देता बल्कि आस्था के परिणाम को示 करता है: अगर हम सचमुच ईश्वर की माने और उसके कहे पर चलें, तो वह हमें सुरक्षा और मार्गदर्शन देता है। यह एकता-भरी जीवन-योजना है जिसमें परमेश्वर की शक्ति और विरुद्ध शक्तियों के बीच संतुलन स्थापित होता है।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष (Practical takeaway)
पूर्व-आधारित टिप्पणियाँ (from classical commentators):
Matthew Henry का सार यह कि यह वचन धार्मिक-निष्ठा के साथ नीति-न्याय की सुरक्षा भी देता है; Albert Barnes इस बात पर बल देते हैं कि परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं के अनुरूप जीवन, शत्रुओं के प्रभाव को कम कर सकता है; Adam Clarke इसे यहूदियों के लिए एक दृढ़ आह्वान मानते हैं कि देव-योजनाओं के अनुरूप आचरण ही सुरक्षा और सफलता की कुंजी है।
नोट: उपरोक्त उद्धरण-वार्ता में फ्रेम के भीतर Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से संक्षेपित विचारों का संकलन है; इन विद्वानों के पूर्ण उद्धरणों का अभेदित पाठ यहाँ नहीं दिया गया है, पर उनके रोशनी-युक्त पंक्तियाँ संदर्भ अनुसार समाहित मानी जाती हैं।