Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
उत्पत्ति 1 उत्पत्ति 2 उत्पत्ति 3 उत्पत्ति 4 उत्पत्ति 5 उत्पत्ति 6 उत्पत्ति 7 उत्पत्ति 8 उत्पत्ति 9 उत्पत्ति 10 उत्पत्ति 11 उत्पत्ति 12 उत्पत्ति 13 उत्पत्ति 14 उत्पत्ति 15 उत्पत्ति 16 उत्पत्ति 17 उत्पत्ति 18 उत्पत्ति 19 उत्पत्ति 20 उत्पत्ति 21 उत्पत्ति 22 उत्पत्ति 23 उत्पत्ति 24 उत्पत्ति 25 उत्पत्ति 26 उत्पत्ति 27 उत्पत्ति 28 उत्पत्ति 29 उत्पत्ति 30 उत्पत्ति 31 उत्पत्ति 32 उत्पत्ति 33 उत्पत्ति 34 उत्पत्ति 35 उत्पत्ति 36 उत्पत्ति 37 उत्पत्ति 38 उत्पत्ति 39 उत्पत्ति 40 उत्पत्ति 41 उत्पत्ति 42 उत्पत्ति 43 उत्पत्ति 44 उत्पत्ति 45 उत्पत्ति 46 उत्पत्ति 47 उत्पत्ति 48 उत्पत्ति 49 उत्पत्ति 50Verse
उत्पत्ति 11:1 उत्पत्ति 11:2 उत्पत्ति 11:3 उत्पत्ति 11:4 उत्पत्ति 11:5 उत्पत्ति 11:6 उत्पत्ति 11:7 उत्पत्ति 11:8 उत्पत्ति 11:9 उत्पत्ति 11:10 उत्पत्ति 11:11 उत्पत्ति 11:12 उत्पत्ति 11:13 उत्पत्ति 11:14 उत्पत्ति 11:15 उत्पत्ति 11:16 उत्पत्ति 11:17 उत्पत्ति 11:18 उत्पत्ति 11:19 उत्पत्ति 11:20 उत्पत्ति 11:21 उत्पत्ति 11:22 उत्पत्ति 11:23 उत्पत्ति 11:24 उत्पत्ति 11:25 उत्पत्ति 11:26 उत्पत्ति 11:27 उत्पत्ति 11:28 उत्पत्ति 11:29 उत्पत्ति 11:30 उत्पत्ति 11:31 उत्पत्ति 11:32
उत्पत्ति 11:17 का तात्पर्य और संदर्भ
इस पद में जन्म के कालक्रम के साथ व्यक्ति की दीर्घ आयु का उल्लेख है। पेलेग के पुत्र एबेर के जीवन-वृत्तान्त के साथ यह नहीं दिखाता कि परमेश्वर ने मानव इतिहास को कब-और कैसे संचालित किया। बल्कि यह जातियों और समय के क्रम को दर्ज करता है, ताकि यह दर्शाया जा सके कि मानवीय पीढ़ियाँ कैसे आगे बढ़ती गईं और किस‑किस प्रकार बैठकें, विवाह, और उत्पन्न पुत्री- पुत्री सामाजिक जीवन के क्रम में स्थापित होते हैं।
मुख्य विचार
मुख्य विषय
1) दैहिक आयु और पीढ़ी-निर्माण: पुराने नियम में पीढ़ियाँ एक-दूसरे के साथ मानव इतिहास की रेखा बनाती हैं। यह स्थायी ज्ञान देता है कि समय-रेखा में हर पीढ़ी एक नया अध्याय है।
2) समुदाय और परिवार के महत्व: उपलब्धियां और सम्बन्ध समुदाय की मजबूती को दर्शाते हैं—स्थिर परिवार से ही समाज के सामाजिक ताने-बाने बनते हैं।
3) परमेश्वर की योजना के अनुरूप इतिहास: आयुओं का क्रम यह इंगित करता है कि लोग किस दिशा में बढ़ते हैं और परमेश्वर के संरक्षण के नीचे रहते हैं।
अन्य प्रचलित टिप्पणियाँ और क्रॉस-रेफरेंसे
साफ़ शब्दों में पवित्र ग्रंथ के कुछ प्रमुख टिप्पणी-लेखकों के संकेत नीचे दिए जा रहे हैं, जिनमें से कुछ से शब्दशः छोटे अंश उद्धृत हैं:
Matthew Henry: पुराने नियम के समय-सञ्चार में परिवार-आयु और पीढ़ीवार क्रम का महत्त्व बताने वाले उपदेशक हैं।
Albert Barnes: जीवन की लम्बी आयु और पुत्र-उत्पन्न की बात को इतिहास-संरचना के रूप में देखते हैं कि किस प्रकार लोग आगे बढ़ते हैं।
Adam Clarke: ऐतिहासिक रिकॉर्ड में आयु-गणना का उद्देश्य यह दिखाना है कि कैसे पीढ़ियाँ एक-दूसरे से जुड़ी रहती हैं, और चूंकि यह भाग पुराने नियम की जड़ता दिखाते हैं, इसलिए यह मार्ग-निर्देशन देता है।
क्रॉस-रेफरेन्स
1) उत्पत्ति 5 और 10—धार्मिक वंश पर केंद्रित क्रम के उदाहरण; 2) हिन्दू और यूनानी इतिहास-शास्त्रों के बजाय लक्ष्य यह है कि किस प्रकार पीढ़ियों का क्रम समाज के निर्माण में योगदान देता है; 3) दानियेल 7:27–28 जैसे अध्याय-आयु के क्रम से संबंधित संकेत मिलते हैं कि किस प्रकार रचना और समय की परस्पर क्रिया इतिहास में भूमिका निभाती है।
इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि आयु-संख्या और पीढ़ियों का क्रम मानव समाज की स्थिरता और दैवीय योजना को समझाने के साधन हैं।
व्यावहारिक चिंतन
हर पीढ़ी को अपनी भूमिका के प्रति उत्तरदायी मानना चाहिए। घर-परिवार के भीतर नैतिक कारणों से जो भी बड़प्पन और जिम्मेदारी मिलती है, उसे अगली पीढ़ी तक पहुँचाना आवश्यक है। स्मरण रहे कि इतिहास एक निरंतर धारा है जिसमें प्रत्येक जन्म एक नया अवसर बनकर आता है—परमेश्वर के उद्देश्य के साथ एकीकृत।
संक्षेप निष्कर्ष
युवा पीढ़ी के जन्म और आयु के क्रम से यह संकेत मिलता है कि परमेश्वर का historia-योजन रोजगार, परिवार और समाज के निर्माण में क्रमबद्ध रूप से आगे बढ़ता है। यह पद हमारे लिए यह स्मरण कराता है कि हर नई पीढ़ी एक नया अध्याय है जो पहले से जुड़े समुदाय के भीतर परस्पर संबंध निभाते हुए आगे बढ़ती है।