Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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उत्पत्ति 11:11 का संक्षिप्त संदर्भ और अर्थ
यह पद इब्राहीमी पूर्व इतिहास के पथ को बताने वाली रेखा में आता है, जहाँ शन के उत्तराधिकारी अर्पक्षद के जीवनकाल से जुड़ी एक क्रमिक जानकारी दी गई है। उत्पत्ति अध्याय 11 सामान्यतः नागरता के इतिहास, बंधुत्व, और गिनती की शृंखला को स्पष्ट करता है। यहाँ यह सूचित है कि अर्पक्षद जन्म के बाद पाँच सौ वर्ष जीवित रहा और उसने अपने पुत्रों और पुत्रियों को जन्म दिया। यह मनुष्य के दीर्घजीवन की एक सामान्य भाषा में दी गई सूची है, ताकि हम यह समझ सकें कि धार्मिक-वृद्धिशीलता के बीच के समय-समय के क्रम कैसे बने।
मुख्य अर्थ
यह verse समय-रेखा बनाते हुए बताता है कि अर्पक्षद की संतति और जीवन-काल एक जनसंख्या-आयाम के रूप में संस्था बनाते हैं। बड़े वर्षों की यह प्रवृत्ति, जो बहुधा उत्पत्ति ग्रंथों में दिखती है, मानव इतिहास के प्रारम्भिक काल की संरचना और परमेश्वर के लोगों के जीवन के संदर्भ को समझाने में सहायक होती है। साथ ही यह बताती है कि जन्म के बाद की पीढ़ियों में वृद्धि हुई और परिवार-आकृति स्थिर बनी।
तीन प्रमुख विषय
क्रॉस-रेफरेंसेस (संयोगित पाठ निष्कर्ष)
कई समय-रेखा में दीर्घजीवन के संदर्भ मिलते हैं; एक तुलना-संदर्भ के तौर पर देखें:
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि दीर्घजीवन और परिवार-उत्पादन एक साथ मिलकर पुरातन समाज की संरचना बनाते हैं, जिससे सरकार, समुदाय और धार्मिक पहचान विकसित होती है।
व्यावहारिक चिंतन
हम भी अपने जीवन के प्रस्थान-वर्ष और परिवार पर विचार करें। क्या हमारी पीढ़ियाँ भी नए जीवन और सद्गुणों का प्रचार कर सकती हैं? यह पद हमें यह स्मरण कराता है कि परिवारों की वृद्धि और बच्चों की शिक्षा, समाज की धारणाओं और परंपराओं को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
संक्षेप
उत्पत्ति 11:11 एक ऐसे चरण का वर्णन करता है जिसमें अर्पक्षद जीवन के बड़े वर्षों के बीच पुत्र-जाति के विकास का संकेत मिलता है—“और उसके और भी बेटे-बेटियाँ उत्पन्न हुईं।” यह पाठ पारिवारिक विस्तार और प्राचीन इतिहास के क्रम की योजना को स्थापित करता है, ताकि आगे की पुस्तकों में lineage व समुदाय-निर्माण स्पष्ट रह सके।
टिप्पणी-उद्धरण (यदि उद्धृत हो तो): Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के मूलरेखा से सीधे छोटे उद्धरण आवश्यक होने पर सिर्फ वही वर्णित हैं।
छोटी संगत टिप्पणी
यदि आप चाहें तो नीचे दिए गए विचार-योग पर एक-दो वाक्यों में विचार कर सकते हैं: जीवन-काल और संतान-उत्पत्ति कैसे समाज की पहचान बनाते हैं; और क्यों पुरानी जातियाँ नये समूह बनाती हैं।