Old Testament
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यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66



यशायाह 52:13 का अर्थ — मेरा दास बुद्धि से काम करेगा
सीधे शब्दों में कहें तो यह वचन परम विश्वास के साथ यह बताता है कि परमेश्वर का चुना हुआ दास सत्यता और पराक्रम के साथ सब कुछ पुनःस्थापित करेगा। जो देखेगा, वह पाएगा कि वह दास उच्च, महान और महान से आगे जाएगा। यह भविष्यवाणी सूचित करती है कि दास के प्रकार्य से विविधों में भी परिवर्तन आएगा—दया, न्याय और उद्धार का मार्ग प्रशस्त होगा।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यशायाह ग्रंथ चरित्री के अंतिम भागों में यह दास-कथा प्रस्तुत करता है। यह दास परमेश्वर की योजना का केंद्र है—उसकी सच्ची चाल, पवित्रता, वचन-निष्ठा और सेवक-जीवन के द्वारा परिचित किया जाएगा। यहाँ “दास” एक सार्वभौमिक प्रतीक है जो संयमी सेवक से लेकर ख्रिस्त-आख्यान तक के आयामों को सम्मिलित करता है। यशायाह 52:13 पारिवारिक रूप से उद्धारक की महिमा और उसकी उच्चता की पुष्टि करता है, भले ही अभी पाठक उसे दासीय कटाव में देखे।
भिन्न दृष्टिकोणों से विश्लेषण
यहाँ तीन प्रसिद्ध प्रकाशनों से संकलित संकेत एकीकृत रूप में प्रस्तुत हैं:
मुख्य विचार
अनुप्रास/क्रॉस-रेफरेंसेस
यिर्मयाह 23:5 की ओर संकेत दिया गया है—उल्लेख दास के उद्धारक-स्वरूप की निकटता को दर्शाता है कि कैसे आने वाला राजा न्याय के साथ आना है। साथ ही पाताल-उद्धार और ईश्वर की समझदारी से भरे हुए कार्य दिखते हैं (यशायाह 49:6; इह 53:11)।
संक्षिप्त व्यावहारिक takeaway
हमारे जीवन में भी बुद्धि से संचालित विश्वास को महत्त्व दें: कठिन समय में भी परमेश्वर की योजना पर विश्वास बनाए रखें; सेवक-जीवन में निरंतर निष्ठा और प्रेम से दूसरों को उद्धार का संदेश दें।
रिश्तेदार संदर्भ
1) यशायाह 49:6 — दास के उद्देश्य का व्यापक आयाम: प्रकाश बनना और राष्ट्रों के लिए उद्धार।
2) इफिसियों 3:8 — दास के स्थान पर विश्वासियों की भूमिका: विश्व-प्रसार के लिए ज्ञान की गहराई।
3) मत्ती 12:18-21 — उद्धारकर्ता की भूमिका और उनके गुण: न्याय, नम्रता और करुणा का संयोजन।
नोट: नीचे उद्धृत शास्त्री-टीका से सीधे उद्धरण केवल यदि उपलब्ध हों, अन्यथा सार-संयोजन से विचार दिए गए हैं।