Old Testament
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यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
यिर्मयाह 11:1 यिर्मयाह 11:2 यिर्मयाह 11:3 यिर्मयाह 11:4 यिर्मयाह 11:5 यिर्मयाह 11:6 यिर्मयाह 11:7 यिर्मयाह 11:8 यिर्मयाह 11:9 यिर्मयाह 11:10 यिर्मयाह 11:11 यिर्मयाह 11:12 यिर्मयाह 11:13 यिर्मयाह 11:14 यिर्मयाह 11:15 यिर्मयाह 11:16 यिर्मयाह 11:17 यिर्मयाह 11:18 यिर्मयाह 11:19 यिर्मयाह 11:20 यिर्मयाह 11:21 यिर्मयाह 11:22 यिर्मयाह 11:23



यिर्मयाह 11:23 — तत्कालीन संदर्भ और अर्थ
पद का सीधा प्रसंग यिर्मयाह के समय के संकट से जुड़ा है। परमेश्वर ने यिर्मयाह को यह संदेश भेजा कि उन हकीमों, गढ़ों और नगरों के अपराधों के कारण उन पर विनाश की विपदा टटोलकर आ पहुँचेगी। “इनमें से कोई भी न बचेगा” कहकर परमेश्वर proclaim करता है कि निर्णय सुनना, और दुष्कर्मों के परिणाम से लोग चूक नहीं पाएंगे। यह संदेश यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर की धारणा न्यायपूर्ण है: जो बुराई में डूबे रहते हैं, उनके लिए दण्ड अवश्य आता है।
देवत्व तथा विश्वास का संदेश
यह पाठ हमें एक सच्चे और पवित्र न्यायी की झलक दिखाता है। परमेश्वर अपने चुने हुए लोगों के लिए भी चेतावनी देता है जब वे दुष्कर्म में डूब जाते हैं; वह चुप नहीं रहता। विश्वास का निहितार्थ है—निजि जीवन में सत्य के पथ पर चलना और सामाजिक-नैतिक दायित्वों का पालन करना। दण्ड का यह दिन बताता है कि परमेश्वर का न्याय समय पर आता है; वह धैर्यपूर्वक और सख्ती से दोषों पर गौर फरमाता है।
महत्त्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
“अनातोत के लोगों पर यह विपत्ति डालूँगा”—अनातोत एक शक्तिशाली, गलती से दूर रहने वाले समुदाय का संकेत है। “दण्ड का दिन” एक पवित्र अदालत की कल्पना कराता है जहाँ न्याय पूरी तरह से लागू होता है। यह दृश्य यह भी सिखाता है कि परमेश्वर अपने चेहरे पर उदारता के साथ नहीं, बल्कि सत्य एवं शुद्धते के साथ निर्णय लेते हैं।
संबद्ध अंश और पारगमन
- यिर्मयाह 4:8: क्षेत्र के भ्रष्टाचार के समय परमेश्वर न्याय की चेतावनी देता है; यह दिखाता है कि पाप के कारण समय-समय पर विपत्ति आती है।
- दानिएल 9:27: न्याय और समय की चली गई क्रिया से जुड़ा विचार, जिसमें परमेश्वर का योजना-योग्य निर्णय स्पष्ट होता है।
- यिर्मयाह 30:7: दण्ड के दिन का अनुमान, और उद्धार का आश्वासन, यह बताता है कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए उद्धार भी बनाते हैं।
आज के लिए अनुप्रयोग
संक्षिप्त समेकित टिप्पणी
यिर्मयाह 11:23 में प्रभु की न्याय-धार स्पष्ट रूप से उभरती है—दण्ड उसके शुद्ध नियम के अनुरूप आता है, पर वह न्याय के साथ उद्धार की राह भी देती है। यह संकेत देता है कि ईश्वर के निर्णय समय और स्थिति के अनुसार होते हैं, और मनुष्य को वर्तमान सचेतना के साथ प्रतिफल के डर में नहीं, बल्कि भरोसे में चलना चाहिए।
महात्म्य संदर्भ उद्धरण (टिप्पणी हेतु):
मत्ती हेनरी आदि के अनुसार, पाप का दण्ड एक चेतावनी है जो लोगों को नागरिक और धार्मिक जीवन के लिए पुर्ननिर्देशन की ओर ले जाती है; ऐल्बर्ट बर्न्स और एडम क्लार्क भी इसी विचार को समर्थन देते हैं—यानी परमेश्वर की सजा भी प्रेमपूर्ण सुधार का भाग है।