यिर्मयाह 11:19 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

मैं तो वध होनेवाले भेड़ के बच्चे के समान अनजान था। मैं न जानता था कि वे लोग मेरी हानि की युक्तियाँ यह कहकर करते हैं, “आओ, हम फल समेत इस वृक्ष को उखाड़ दें, और जीवितों के बीच में से काट डालें, तब इसका नाम तक फिर स्मरण न रहे।”

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यिर्मयाह 11:19 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 11:19 का संदर्भ और अर्थ

यिर्मयाह भविष्यवक्ता को वह भयावह दृश्य मिलता है कि यह्रूशलेम और यहूदियों के लिए ईश्वरीय दण्ड का समय है। इसी संदर्भ में यिर्मयाह 11:19 बताता है कि वह एक असुरक्षित और अचेतनाक स्थिति में है, जैसे “वध होनेवाले भेड़ के बच्चे”। यहाँ वह अपनी दृष्टि बताता है कि वह अनजान था कि लोगों की योजनाओं का उद्देश्य क्या है और वे कैसे बड़े नुकसान पहुँचाना चाहते हैं — “आओ, हम फल समेत इस वृक्ष को उखाड़ दें, और जीवितों के बीच से काट डालें”। यह पंक्ति द्रढ़ संकेत देती है कि वह अपने सामाजिक और धार्मिक नेतृत्व के प्रति घुसपैठ करने वाले प्रतिशोधी और नुकसान पहुँचाने वाले लोगों के चालों को नहीं समझ पाया था, और परिणामस्वरूप उसे भी आघात पहुँचाने की योजनाओं का भागी बनना पड़ रहा है।

केंद्रीय विचार

इस पद में दोतरफा भाव स्पष्ट हैं: एक ओर भगवान के निर्णय और चेतावनी की गहराई, दूसरी ओर मानवीय चतुराई और विरोध के बावजूद भी ईश्वर की योजना के अनुरूप क्रिया-प्रतिक्रिया। यिर्मयाह कहता है कि वह इन विद्वेषपूर्ण युक्तियों से अज्ञान था—यह दर्शाता है कि भविष्यवाणी के दौरान भी नैतिक और सुरक्षित मार्ग तलाशना कठिन होता है। परंतु यह भी संकेत देता है कि परमेश्वर के विचार मानवीय योजना से ऊपर रहते हैं और वे उनकी रीति-नीति के अनुसार पूरी होती हैं।

मुख्य विषय

  • उथल-पुथल और धोखे की पीड़ा: लोगों की हानि के लिए की गई योजनाएँ प्रत्यक्ष रूप से समुदाय के लिए खतरनाक होती हैं, यह स्पष्ट रूप से दिखाती है कि कैसे सामाजिक दबाव और नज़र-अंदाज़ी से भी विनाश संभव है।
  • ईश्वर की ज्ञान और बुद्धिमत्ता बनाम मानव चतुराई: मानवीय योजनाओं के उलट ईश्वर की योजना हमेशा पूर्ण और न्यायपूर्ण होती है; हमारी समझ कभी-कभी सीमित रहती है।
  • वचन की गवाही और संरक्षण: इस वचन में भविष्यवाणी और उसकी सुरक्षा का आह्वान है—येरूसलम के लोगों को सचेत रहने और परमेश्वर के सिद्धांतों से विचलित न होने की आवश्यकता दिखती है।

अन्य प्रासंगिक पाठ

1) यिर्मयाह 11:18-19 — भविष्यवक्ता पर उत्पीड़न के बावजूद भगवान की चेतावनी का प्रसार और उसकी भूमिका की गहराई।

2) यिर्मयाह 12:1 — न्यायप्रिय भगवान से प्रश्न और धैर्यपूर्ण स्पष्टता की मांग, जो मानवीय योजनाओं से ऊपर है।

3) स्तोत्र 2:1-3 — प्रतिशोधी योजनाओं के विरोध में परमेश्वर की उद्धारक योजना की आवश्यकता और सुरक्षा।

व्यावहारिक विचार

इस वचन से सिख मिलती है कि संकट और विरोध के समय हमें गहरी आत्मचेतना रखना चाहिए। सामूहिक दबाव में बहकने के बजाय, परमेश्वर की वचनों के अनुसार निर्णय लेना चाहिए। यदि हम किसी की हानि के लिए चतुर छल चाहते हैं, तो उसे जल्द से जल्द छोड़ देना चाहिए और ऐतिहासिक-धर्मशास्त्रों में विश्वास को मजबूत बनाना चाहिए।

संक्षिप्त निष्कर्ष

यिर्मयाह 11:19 हमें याद दिलाता है कि संसार की योजनाएँ अक्सर पीड़ा और दुःख के मार्गों पर ले जाती हैं, परन्तु परमेश्वर की दृष्टि और योजना परम सत्य है। हमें होशियार, नम्र और भरोसेमंद होकर उनकी राह पर चलना चाहिए ताकि हमारा जीवन उनके सामर्थ्य और आशीष से परिपूर्ण हो।

मौलिक उद्धरण (जो उपलब्ध हो सकें)

एलबर्ट बार्न्स, अडम क्लार्क और मैथ्यू हेनरी के सार्वजनिक-डायरेख से निकलने वाले संदर्भों से जो क्लासिक आहतियाँ मिलती हैं, वे सामान्यतः एक ही धारणा को मानव-योजना बनाम परमेश्वर की योजना के बीच स्पष्ट करती हैं—परमेश्वर ही सत्ता रखने वाले हैं। नीचे छोटे-से उद्धरण उपलब्ध हो सकते हैं:

“समय के तकाज़े के अनुसार, उनके निर्णय चकित करने वाले होते हैं।”

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 11:19 समानांतर पद और संबंधित वचन

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मैंने बहुतों के मुँह से अपनी निन्दा सुनी है। चारों ओर भय ही भय है! मेरी जान-पहचान के सब जो मेरे ठोकर खाने की बाट जोहते हैं, वे कहते हैं, “उसके दोष बताओ, तब हम उनकी चर्चा फैला देंगे। कदाचित् वह धोखा खाए, तो हम उस पर प्रबल होकर, उससे बदला लेंगे।”

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यिर्मयाह 18:18 (HINIRV) »
तब वे कहने लगे, “चलो, यिर्मयाह के विरुद्ध युक्ति करें, क्योंकि न याजक से व्यवस्था, न ज्ञानी से सम्मति, न भविष्यद्वक्ता से वचन दूर होंगे। आओ, हम उसकी कोई बात पकड़कर उसको नाश कराएँ और फिर उसकी किसी बात पर ध्यान न दें।”

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यशायाह 53:7 (HINIRV) »
वह सताया गया, तो भी वह सहता रहा और अपना मुँह न खोला; जिस प्रकार भेड़ वध होने के समय और भेड़ी ऊन कतरने के समय चुपचाप शान्त रहती है, वैसे ही उसने भी अपना मुँह न खोला। (यूह. 1:29, मत्ती 27:12,14, मर. 15:4,5, 1 कुरि. 5:7, पत. 2:23, प्रका. 5:6,12)

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