यिर्मयाह 14:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

फिर यहोवा ने मुझसे कहा, “इस प्रजा की भलाई के लिये प्रार्थना मत कर।

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यिर्मयाह 14:11 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 14:11 का अर्थ और संदर्भ

इस पंक्ति में परमेश्वर अपने भविष्यवक्ता यिर्मयाह से कहते हैं कि इस प्रजा के बारे में वह प्रार्थना न करें। इसका तात्पर्य यह है कि उस समय ईश्वरीय दृष्टि से प्रजा की नीतियाँ और कर्म पापपूर्ण स्थिति में हैं और प्रभु की क्रोध उन्मुख निर्णय स्थिर हैं। प्रार्थना से तब तक कोई परिवर्तन नहीं होगा जब तक प्रजा अपने अनुराग और आचरण में परिवर्तन न लाए। यह दैवीय निर्णय के सामने हमारी जवाबदेही और सतर्कता की दिशा को उजागर करता है; कभी-कभी ईश्वरीय कर्तव्य के अनुरोधों को छोड़ना ही उद्धार का मार्ग बन सकता है।

पृष्ठभूमि और पाठ-संदर्भ

यिर्मयाह का संदेश अत्यंत कठिन समय का है: यरूशलेम और यहूदियों ने परमेश्वर के प्रति भरोसा घटा लिया है, भ्रष्टाचार, अंधविश्वास और बलपूर्वक आत्म-विश्वास ने समाज को दूषित किया। यहाँ उद्धृत वाक्य उस समय का है जब परमेश्वर अपने भविष्यवक्ता को यह बताने का निर्देश देते हैं कि प्रजा की देह-लाभ और सामाजिक-धार्मिक सुधार के लिए अभी प्रार्थनाओं की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि प्रजा की रीढ़ टूटी है और उनकी नीयत भी बदल नहीं रही।

interpretive observations

  • यहाँ परमेश्वर का निर्णय और मानव प्रतिरूपता के बीच तनाव स्पष्ट है—भविष्यवाणी में चेतावनी और आह्वान के साथ, प्रार्थना की सीमा भी बताई जाती है।
  • प्रार्थना की रोक से संकेत मिलता है कि परिवर्तन से पहले अनुभव, विवेक और दिल की सच्ची पश्चाताप आवश्यक है।
  • हर्ष और आशा के संकेत तब मिलते हैं जब अंत में परमेश्वर पुनः दया और उद्धार की राह खोलते हैं; यहाँ रोक एक शिक्षा के रूप में है न कि स्थायी निषेध।

सारांशित विचार

  • निरस्त प्रार्थना तब तक जब तक समाज में सचेत परिवर्तन नहीं होता।
  • देश और परमेश्वर के बीच रिश्ता उसी समय सुधर सकता है जब लोग कट्टर पाप छोड़ दें।
  • भगवान की दिशा-निर्देश और मानव उत्तरदायित्व एक साथ चलते हैं।

अन्य प्रासंगिक बाइबल संदर्भ

यिर्मयाह 7:16— परमेश्वर कहते हैं कि भविष्यवक्ता की विनती केवल जब तक लोग प्रत्यक्ष परिवर्तन नहीं लाते तब तक प्रभावी नहीं। इसका उद्देश्य प्रजा को सचेत करना है कि कृपा तब मिलती है जब हृदय स्वच्छ और समर्पित हो।

यिर्मयाह 26:3— यदि वे प्रत्यक्ष उपाय करते हैं और मेरे पास लौटते हैं, तो मैं उन्हें बचाने हेतु कदम उठाऊँगा; यह वाक्य दर्शाता है कि परमेश्वर का धैर्य सीमित है पर उद्धार की संभावना बनी रहती है।

यिर्मयाह 29:12-14— पश्चाताप और निर्भरता से परमेश्वर की सुनवाई संभव हो सकती है; यह भविष्यवाणी के बाद भी एक अवसर देता है कि संयुक्त प्रार्थना और पश्चाताप से नई राह खुलती है।

व्यावहारिक निष्कर्ष

हमेशा यह समझें कि कठिन समय में भी हमारा आध्यात्मिक उत्तरदायित्व बना रहता है। यदि स्थिति बदलना कठिन हो, तो प्रार्थना और नीति-निर्णय दोनों में सत्य का आकलन करें: पहले स्वयं के आचरण में ईमानदारी लाएं, फिर परमेश्वर की प्रेरणा पर भरोसा रखें।

यिर्मयाह 14:11 के बारे में पाठ-टीका से प्रेरित उद्धरण (उद्धृत है):

“इस प्रजा की भलाई के लिये प्रार्थना मत कर।”

क्रॉस-रेफरेंसेज़ सार-सार: यह संदर्भ हमें यह दिखाते हैं कि पीड़ित समय में भी परमेश्वर की ओरिर्भावना और न्याय-प्रेरित सुधार कैसे हो सकता है, और कब भगवान प्रतिशोध के साथ श्रेया-प्रार्थना के अवसर देता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 14:11 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यिर्मयाह 7:16 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यिर्मयाह 7:16 (HINIRV) »
“इस प्रजा के लिये तू प्रार्थना मत कर, न इन लोगों के लिये ऊँचे स्वर से पुकार न मुझसे विनती कर, क्योंकि मैं तेरी नहीं सुनूँगा।

यिर्मयाह 11:14 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यिर्मयाह 11:14 (HINIRV) »
“इसलिए तू मेरी इस प्रजा के लिये प्रार्थना न करना, न कोई इन लोगों के लिये ऊँचे स्वर से विनती करे, क्योंकि जिस समय ये अपनी विपत्ति के मारे मेरी दुहाई देंगे, तब मैं उनकी न सुनूँगा।

निर्गमन 32:32 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
निर्गमन 32:32 (HINIRV) »
तो भी अब तू उनका पाप क्षमा कर नहीं तो अपनी लिखी हुई पुस्तक में से मेरे नाम को काट दे।”

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