यिर्मयाह 16:19 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

हे यहोवा, हे मेरे बल और दृढ़ गढ़, संकट के समय मेरे शरणस्थान, जाति-जाति के लोग पृथ्वी की चारों ओर से तेरे पास आकर कहेंगे, “निश्चय हमारे पुरखा झूठी, व्यर्थ और निष्फल वस्तुओं को अपनाते आए हैं। (रोम. 1:25)

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यिर्मयाह 16:19 पद-दर-पद बाइबल टीका

संदर्भ और संक्षिप्त व्याख्या

यिर्मयाह 16:19 में रचनाकार अपने परमेश्वर की शक्ति और शरण के बारे में पुकारता है। यह पद भविष्यदूत के कठोर समय में परमेश्वर पर निर्भरता और राष्ट्रों के सामने परमेश्वर की महिमा के उद्घोष का चित्र है। संदर्भ में यिर्मयाह बर्बादी, शोक और देश के भविष्य के बारे में बोल रहा है; फिर भी वह विश्वास से कहता है कि सर्वशक्तिमान देव ही शरण और दृढ़ गढ़ हैं, और लोग विभिन्न जातियों से अंततः परमेश्वर के नाम की ओर दृष्टि उठाएंगे।

मुख्य अर्थ

वचन का केंद्र यह है: परमेश्वर ही भरोसे का अंतिम आधार है। "बल और दृढ़ गढ़" रूपक से यह स्पष्ट होता है कि दिव्य सुरक्षा निरंतर और विश्वसनीय है—मानव असफलताओं और मूर्ति-पालन के सत्यापन के विरोध में। यह पद मानव इतिहास की व्यर्थताओं की पहचान के साथ-साथ परमेश्वर के प्रति विश्वास की परम आवश्यकता को उजागर करता है।

मुख्य विषय

  • परमेश्वर में आश्रय: संकट के समय परमेश्वर शरण और रक्षा हैं। यह व्यक्तिगत और सामुदायिक दोनों स्तरों पर लागू होता है।
  • जातियों का मान्यता-उद्घोष: विभिन्न देशों और लोगों द्वारा परमेश्वर के पास लौटना—यह भविष्यद्वाणी का आशय है कि सत्य का प्रकाश सार्वभौमिक होगा।
  • मूर्तिपूजा और व्यर्थता की खुली आलोचना: लोगों की पूर्व परंपराओं को 'झूठी, व्यर्थ और निष्फल' कहा गया है—यह नारायणत्वहीन नीतियों और भ्रमों की निन्दा है।

संबंधित पद और संक्षिप्त व्याख्या

रोमियो 1:25 का संदर्भ वाक्यांश में दिया गया है — वहाँ पौलुस ने भी उन लोगों का वर्णन किया जो सच्चाई को त्यागकर भ्रामक वस्तुओं को अपनाते हैं; यह यिर्मयाह के विचार से मेल खाता है कि मनुष्य जब सत्य छोड़ देते हैं तो वे व्यर्थ मार्ग अपनाते हैं।

कृष्णा 46:1--2 (नोट: यह एक उदाहरणात्मक समानार्थक संदर्भ है) में भी परमेश्वर को शरण और बल के रूप में प्रस्तुत किया जाता है—यह प्रेरित करता है कि संकट में ईश्वर की ओर लौटना बुद्धिमानी है।

भजन 46:1 को पढ़ने से पता चलता है कि प्राचीन गीतकार भी परमेश्वर को संकटकाल का मददगार मानते थे; यह यिर्मयाह के भरोसे का पृष्ठभूमि समर्थन देता है।

व्यावहारिक चिंतन

यह पद आज के पाठक से पूछता है: किसके प्रति हमारी अंतिम भरोसा है? जीवन की अस्थिरता और सांस्कृतिक दबावों के बीच हमें उन वस्तुओं और प्रथाओं की जांच करनी चाहिए जिन्हें हम सुरक्षा और अर्थ के स्रोत मानते हैं। अगर वे "झूठी" साबित हों तो उन्हें त्याग कर सच्चे अस्थायी और स्थायी संरक्षण—परमेश्वर—की तरफ लौटना ही बुद्धिमत्ता है। गाँव, नगर या धर्मसमाज जहाँ झूठे विश्वास प्रबल हों, वहाँ इस पद का संदेश विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण और उम्मीद भरा है।

प्रसिद्ध टिप्पणीकारों की संक्षिप्त टिप्पणी

मैथ्यू हेनरी इस विचार पर बल देते हैं कि परमेश्वर का नाम ही आश्रय और प्रतिष्ठा है; वे लिखते हैं (संक्षेप में): "परमेश्वर हमारा बल और गढ़ है"—यह विश्वास की स्थिरता को उजागर करता है।

अल्बर्ट बार्न्स का संक्षिप्त अवलोकन यह इंगित करता है कि यह वचन दुनिया भर के लोगों के समक्ष परमेश्वर की सच्चाई के उद्घोष का संकेत है।

एडम क्लार्क ने कहा है कि इस आशय से सम्बन्धित भविष्यवाणियाँ सार्वभौमिक उपस्थिति और शरण की ओर मानवता की लौटन बताती हैं।

संक्षेप

यिर्मयाह 16:19 हमें याद दिलाता है कि अस्थायी संस्थाएँ और मूर्ति-भ्रम अंततः व्यर्थ सिद्ध होते हैं, परन्तु परमेश्वर शरण, बल और दृढ़ गढ़ के रूप में अटल रहेंगे। यह पद न केवल आलोचना है, बल्कि आमंत्रण भी है—सभी जातियों के लिए परमेश्वर के पास लौटकर भरोसा और सच को अपनाने का।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 16:19 समानांतर पद और संबंधित वचन

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प्रधान बजानेवाले के लिये। यहोवा के दास दाऊद का गीत, जिसके वचन उसने यहोवा के लिये उस समय गाया जब यहोवा ने उसको उसके सारे शत्रुओं के हाथ से, और शाऊल के हाथ से बचाया था, उसने कहा हे यहोवा, हे मेरे बल, मैं तुझ से प्रेम करता हूँ।

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