Old Testament
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यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
यिर्मयाह 16:1 यिर्मयाह 16:2 यिर्मयाह 16:3 यिर्मयाह 16:4 यिर्मयाह 16:5 यिर्मयाह 16:6 यिर्मयाह 16:7 यिर्मयाह 16:8 यिर्मयाह 16:9 यिर्मयाह 16:10 यिर्मयाह 16:11 यिर्मयाह 16:12 यिर्मयाह 16:13 यिर्मयाह 16:14 यिर्मयाह 16:15 यिर्मयाह 16:16 यिर्मयाह 16:17 यिर्मयाह 16:18 यिर्मयाह 16:19 यिर्मयाह 16:20 यिर्मयाह 16:21



यिर्मयाह 16:21 के पीछे का आशय एवं उसका महत्व
यिर्मयाह 16:21 में परमेश्वर बताना चाहते हैं कि उनके संकेतों और करतूतों के बिना भी उनके लोग उनकी महत्ता नहीं समझते। यहाँ प्रभु स्पष्ट करते हैं कि वह अपना नाम Yehovah (यहोवा) के रूप में और अपनी शक्ति के चिह्नों से अपने लोगों के बीच पहचाने जाते हैं। इस संदेश का तात्पर्य यह है कि भगवान के असाधारण कार्यों के दर्शन के बिना मनुष्य अपनी राह पर नहीं लौटते, और यहूदियों के लिए भी यह सच है कि उनका उद्धारकर्ता वही है जिसका नाम और अधिकार परमेश्वर के चरित-व्यापी कार्यों से प्रकट होता है.
पार्श्व-प्रसंग (Original Context)
यिर्मयाह को ईश्वर ने जब प्रचार के लिए भेजा गया, तब यहूदी राज्य और आराधना-व्यवस्था कई बार भंग हो चुकी थी। उनके नबियों ने चेतावनियाँ दीं कि पाप के परिणामस्वरूप étrangillas से उद्धार नहीं मिलेगा; उलटे, परमेश्वर के चमत्कार ही उनकी सुरक्षा और पहचान का प्रमाण बनेंगे। इस वचन में ईश्वर यह स्पष्ट करते हैं कि उनका नाम और महिमा तब स्पष्ट रूप से प्रकट होगी जब वे अपने अद्भुत अपराध-नियंत्रण और उद्धार के चमत्कारों के माध्यम से उनका अभिमान तोड़ेंगे और सत्य को दिखाएंगे।
मुख्य संदेश
इस पद में दो मुख्य विचार मिलते हैं: एक— परमेश्वर अपने लोगों के बीच अपनी शक्ति और पहचान के चिह्न दिखाने के लिए तैयार है; दो— वे यहोवा के नाम के साथ जो हो रहा है, उसकी महिमा को स्थापित करके अपने पुत्र-जन को सचेत करते हैं। परिणामस्वरूप लोग जानेंगे कि उनके आराध्य वही Yahweh है, जो उनकी नियति को नियंत्रित करता है। यह एक नयी परीक्षा नहीं, बल्कि परमेश्वर के विश्वसनीय और सतत सत्ता-प्रकाश का प्रमाण है।
आध्यात्मिक विषय और संरचना
- सत्य-आस्था बनाम बाह्य चमत्कार: चिंता यह नहीं कि कौन सा चिह्न दिखे, वरन् यह कि wahrheit (सत्य) कैसे खुलती है जब परमेश्वर का नाम स्पष्ट रूप में दिखे।
- पहचान और जवाबदेही: जब परमेश्वर अपना नाम सुनाते हैं, समाज-व्यवस्था में बुराइयों के विरुद्ध जवाबदेही बढ़ती है।
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षिप्त व्याख्या)
नोटेड उद्धरण (public-domain टिप्पणीकारों से)
मैथ्यू हेनरी, अलेकर्ट बर्न्स और एडम क्लार्क के शाब्दिक उद्धरण केवल संक्षेपिक संदर्भ के लिए हैं; पूर्ण पाठ मात्र संक्षेप में है।
संयोगी प्रवचनों के लिए छोटे उद्धरण (संकेतित)">
- “God will show forth his strength, that they may know that he is the LORD.”
- “The name of the LORD is a strong tower; the righteous run to it and are safe.”
चर्चा-आधारित निष्कर्ष
यहोवा के महत्त्वपूर्ण नाम और उनकी शक्ति के संकेत मानव-जीवन में परिवर्तन का कारण बनते हैं। यह वचन शिक्षा देता है कि धार्मिक कर्म-सिद्धांतों के बीच वास्तविक परिवर्तन तब आता है जब भगवान अपने कामों के माध्यम से स्पष्ट रूप से मापा जाए। हमारी आस्था के केंद्र में उनका नाम और उनकी शक्ति है—यही वह कारण है जिससे वे अपने लोगों के साथ एक सच्चा, जीवंत और उद्धारकारी संबंध बनाते हैं।
व्यावहारिक ध्यान
आज के विश्वासियों के लिए यह वचन याद दिलाता है कि कठिन समय में भी परमेश्वर के नाम पर भरोसा करें; उसकी शक्ति से अजीब-सी सुरक्षा मिलती है और जीवन में सत्य की रोशनी फैलती है।
Cross-reference के साथ छोटे-छोटे पथ: स्वयं की राह स्पष्ट होगी जब हम परमेश्वर के कार्यों और नाम को प्राथमिकता देंगे, न कि केवल चमत्कारिक घटनाओं पर।