यिर्मयाह 16:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

“जब तू इन लोगों से ये सब बातें कहे, और वे तुझसे पूछें कि 'यहोवा ने हमारे ऊपर यह सारी बड़ी विपत्ति डालने के लिये क्यों कहा है? हमारा अधर्म क्या है और हमने अपने परमेश्‍वर यहोवा के विरुद्ध कौन सा पाप किया है?'

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यिर्मयाह 16:10 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 16:10 का अर्थ—यहोवा की विपत्ति का प्रश्न

सरल शब्दों में यह पद कहता है: जब तू इन लोगों से यह सब बातें कह दे, और वे तुझसे पूछें कि क्यों यह बड़ी विपत्ति उनके ऊपर आई है, तो उनका प्रश्न है—हमारा अधर्म क्या है और हमने अपने परमेश्वर यहोवा के विरुद्ध कौन सा पाप किया है?

संदर्भभूमि

यिर्मयाह नबी के समय इजराइल-यहूदा के लोग ईश्वर के विरुद्ध बिखरे हुए विश्वास और दुष्कर्मों में डूबे थे। नबी कहता है कि परमेश्वर की चेतावनियाँ और आर्कानियाँ अक्सर बात-चीत से पहले होती थीं, ताकि लोग पाप की सजा और उसकी आवश्यकता को समझें। यहाँ नबी की आवाज परियोजना-उपायों के बारे में है—जब लोग सवाल पूछते हैं कि यह विपत्ति क्यों आई, तो उत्तर यह है कि वे अपने अधर्म के कारण ही बाधाओं में हैं; यह पाप और दया के बीच की स्थिति को उजागर करता है।

व्याख्यात्मक विचार

  • स्पष्ट सवाल, कठोर उत्तर: विपत्ति की यह वस्तु-सूचना एक सत्य है—यहोवा की justiça ने उनके कर्मों के अनुसार परिणाम निर्धारित किए हैं।
  • इंसान की प्रतिछाया: लोग पूछते हैं कि क्या हमने किसी विशेष पाप किया है; यहाँ प्रश्न एक संघर्षपूर्ण आत्म-निरीक्षण का संकेत है, जो कबूल करने और परिवर्तन के मार्ग को खोल सकता है।
  • नबी-सम्पर्क: यिर्मयाह का कार्य विपत्ति के समय भी ईश्वरीय वचन को सुनाने और लोगों को उद्धार की दिशा में आह्वान करने का था; असमान्य रूप से यहाँ भी यह चेतावनी है कि सतर्क रहना कबूल करने से बढ़ सकता है।

संश्लेषित विचार (गंभीर विषय-लाभ)

हमें सिखना चाहिए कि कठिनाई अक्सर हमें अपने आचरण पर विचार करने, उन पापों को पहचानने और परमेश्वर के साथ द्वंद्व को सुधारने के लिए प्रेरित करती है। यह उद्धार की दिशा में एक आह्वान है, न कि निराशा। यह संदेश बताता है कि आपत्ति-स्थिति में भी परमेश्वर की सच्चाई और न्याय सामने रहते हैं, और पवित्र जीवन की दिशा में परिवर्तन सम्भव है।

क्रॉस-रेफरेंसेज़ (संक्षेपित अर्थ के साथ)

- इब्रानियों 12:11 की तरह, विषमताएँ कभी-कभी पवित्रता के लिए प्रशिक्षक का काम करती हैं; वे हमारे कर्मों के परिणामों को स्पष्ट करती हैं।

- दानिश्वर 9:7–14, जो लोग अपराध और दया के बीच चयन करते हैं, उनके लिए दया और दायित्व की बंधन को दर्शाते हैं—यहोवा के विरुद्ध आश्वासन के बिना नहीं बचना होता।

- यिर्मयाह 3:25—पाप के कारण जो विपत्तियाँ आते हैं, वे व्यक्ति-समुदाय के पापों का द्योतक बनते हैं और पक्ष-प्रेरणा के लिए आत्म-निरीक्षण आवश्यक बनाते हैं।

निरपेक्ष सार चैन

इस पद का सिद्धांत-उद्धरण यह है कि विपत्तियाँ परमेश्वर के पवित्र न्याय का परिणाम हैं और वे हमारे अधर्म की प्रकृति को उजागर करती हैं। साथ ही वे यह भी बताती हैं कि मनुष्यों के प्रश्न—“हमारा अधर्म क्या है?”—आत्म-निरीक्षण और परिवर्तन की आवश्यक दिशा दिखाते हैं।

छोटा व्यवहारिक निष्कर्ष

  • कठिन समय में खुद से पूछें: क्या मेरा आचरण पवित्र ईश्वर के अनुरूप है?
  • आरोप-चर्चा से अधिक, अपने उद्धार के मार्ग पर ध्यान दें: प्रार्थना और पवित्र आज्ञाओं का पालन करें।
ध्यान दें: नीचे तीन सरल उद्धरण-संरक्षण हैं। Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सीधे पूर्ण वाक्यों का संक्षेप उद्धरण दें गया है, जब उपलब्ध हों: - "विपत्ति का अर्थ यह है कि न्यायी ईश्वर हमारे कर्मों पर विचार कर रहे हैं—हम कबूल करें, तो अनुग्रह भी खुलता है।" (सार) - "यदि परमेश्वर की आवाज़ में आपत्ति आए, तो उसे अपनी आत्मा के विवेक के साथ सुनें और परिवर्तन का अवसर पकड़ लें।" (सार)

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 16:10 समानांतर पद और संबंधित वचन

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