यिर्मयाह 16:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और न लोग पिता या माता के मरने पर किसी को शान्ति के लिये कटोरे में दाखमधु पिलाएँगे।

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यिर्मयाह 16:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 16:7 के पास के संदर्भ में विश्लेषण

यिर्मयाह पुस्तक के इस हिस्से में कथित रूप से एक विधान सामने आता है जिसमें प्रभु यह कहता है कि वे लोगों के शोक के समय भी सामान्य रीति-रिवाजों में कटोरे में दाखमधु पिलाने से बचेंगे। यह दृश्य एक ऐसे समय का है जब राष्ट्र इस्राइल के लिए गहरे आघात और आत्मिक बदलाव के बीच था। यह आयत एक संदेश है कि परमेश्वर के कृपा-केन्द्रित शासन में भी मानवीय दुःख के समय तकलीफ और उपासना के स्वरूपों में संतुलन बना रहता है, तथा यह भी संकेत देता है कि उद्धार के पथ में शांति और संकेत दोनों जुड़े रहते हैं।

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इस आयत के पीछे एक सच्चाई उभरती है कि धार्मिक रीति-रिवाज तात्कालिक दुखों को कुछ हद तक ढक नहीं लेते, परन्तु परमेश्वर की योजनाओं में नये रूपों के लिए स्थान होता है। यहूदियों के लिए मदिरा पिलाने जैसी सामाजिक प्रथाएं सामान्यतः शांति और स्मरण का प्रतीक होती आई हैं; यहाँ प्रभु कह रहे हैं कि ऐसे क्षणों में भी यह क्रम टूट सकता है, ताकि लोग अपने ध्यान को उद्धारकर्ता पर केंद्रित रखें। यह एक प्रकार का आह्वान है कि शोक-समय में भी ईमानदार आत्मा परमेश्वर की कृपा की ओर मुड़े।

important शब्दों या छायाओं की स्पष्ट व्याख्या

  • सामान्यतः खुशी, तृप्ति, और सामुदायिक उत्सव के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। यहाँ इसका प्रयोग विरोधाभासी वातावरण बनाता है—जब दुःख के क्षण में भी यह क्रिया अचानक बदली जाती है, तो जीवन के भावनात्मक निर्णयों का अस्थिर अनुभव सामने आता है।
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  • यह परिवारजनों के शोक और सामाजिक जिम्मेदारियों के समय पर चोटिल होने की बात करता है; परमेश्वर चाहता है कि शोक के समय लोगों का ध्यान सच्चे तारणहार पर रहे।

संबद्ध आयतें (Cross-references) और संक्षिप्त स्पष्टीकरण

1) यह प्रेरणा स्मरण दिलाती है कि दिव्य नियम दुख के समय भी विराम नहीं लेते। 2) दूसरे प्रचारक संदेशों में यह बताया गया है कि शोक के समय भी ईश्वर के द्वारा दी जाने वाली शांति को स्वीकारना चाहिए। 3) उद्धार हेतु आस्था का केंद्र परमेश्वर ही है, न कि रीतियों का विकल विकल्प।

आज के समय में व्यावहारिक अनुप्रयोग

आज के पाठक के लिए इस आयत का सीधा संदेश है: जब हमें व्यक्तिगत या सामूहिक क्षति होती है, तब भी हमारी आध्यात्मिक आँखें एकदम स्पष्ट रहें; दुख के साथ-साथ प्रभु की कृपा को याद करें। धार्मिक रीतियों के साथ-साथ प्रेम, दया और सहायता के कार्यों पर ध्यान दें—क्योंकि ईश्वर के मालिकाना प्यार से ही वास्तविक शांति आती है।

संक्षेपित निष्कर्ष

यिर्मयाह 16:7 यह बताता है कि दुख के क्षणों में भी हमें आशा और ईश्वर की सीमा को समझना चाहिए। धार्मिक रस्म-रिवाज तब तक मूल्यहीन नहीं होते जब तक वे मन को परमेश्वर के करीब लाने वाला नहीं बनते। यह आयत हमें यह याद दिलाती है कि शोक के बीच भी ईश्वर की सत्ता और शांति कार्य कर रही है, ताकि हम अपने उद्धारकर्ता पर स्थिर रहें।

नोट: नीचे उद्धृत पुरानी टिप्पणीकारों के विचार से प्रेरणा मिली है—यद्यपि यहाँ सीधे उद्धरण संक्षेप में दिए गए हैं, मूल पाठ के सच्चे शब्दों के लिए पाठ-स्त्रोत देखें।

पानी-पथ: पारस्परिक संदर्भ

1) ईश्वर की कृपा पर स्थिरता का आह्वान: सत्य और शांति के लिए आस्था।

2) दुख के समय में समुदायिक समर्थन और प्रेम-कार्य का महत्व।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 16:7 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यहेजकेल 24:17 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यहेजकेल 24:17 (HINIRV) »
लम्बी साँसें ले तो ले, परन्तु वे सुनाई न पड़ें; मरे हुओं के लिये भी विलाप न करना। सिर पर पगड़ी बाँधे और पाँवों में जूती पहने रहना; और न तो अपने होंठ को ढाँपना न शोक के योग्य रोटी खाना।”

होशे 9:4 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
होशे 9:4 (HINIRV) »
वे यहोवा के लिये दाखमधु का अर्घ न देंगे, और न उनके बलिदान उसको भाएँगे। उनकी रोटी शोक करनेवालों का सा भोजन ठहरेगी; जितने उसे खाएँगे सब अशुद्ध हो जाएँगे; क्योंकि उनकी भोजनवस्तु उनकी भूख बुझाने ही के लिये होगी; वह यहोवा के भवन में न आ सकेगी।।

व्यवस्थाविवरण 26:14 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
व्यवस्थाविवरण 26:14 (HINIRV) »
उन वस्तुओं में से मैंने शोक के समय नहीं खाया, और न उनमें से कोई वस्तु अशुद्धता की दशा में घर से निकाली, और न कुछ शोक करनेवालों को दिया*; मैंने अपने परमेश्‍वर यहोवा की सुन ली, मैंने तेरी सब आज्ञाओं के अनुसार किया है।

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