Old Testament
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यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52



यिर्मयाह 20:6 का स्पष्ट अर्थ
यह उद्धरण यह दर्शाता है कि परमेश्वर के संदेशवाहक यिर्मयाह के विरुद्ध विरोध करने वाले व्यक्ति के लिए परिणाम कैसे होते हैं: वह अपने सभी सहयोगियों और मित्रों के साथ दास-स्थिति में चले जाएगा, बाबेल में निष्कासित होगा, जहाँ उसकी मृत्यु और मिट्टी दी जाएगी। यह चेतावनी बंधन-युग के राजनैतिक और धार्मिक गिरफ्त से संबंधित है, न कि केवल व्यक्तिगत दुष्कर्म की बात।
पृष्ठभूमि संक्षेप
यिर्मयाह ने यह स्पष्ट किया कि यह रूढ़ि-शासन और धर्म-आडंबर के विरुद्ध भगवान का संदेश है। विरोध में प्रमुख अधिकारी और झूठी भविष्यवाणी करने वाले हिस्से ने उन्हें और उनके समर्थकों को दबाने की कोशिश की। इस पंक्ति में पथभ्रष्ट मित्रों और गृह-आश्रितों के साथ परित्याग और निर्वासन का उल्लेख है, जो यह संकेत देता है कि अस्वीकृत संदेश के परिणाम कैसे सामाजिक-परिवारिक स्तर तक पहुँचते हैं।
interpretive observations
मूल संदेश के प्रमुख बिंदु
संदर्भित क्रॉस-रेफरेंस
1) यिर्मयाह 28:15-17 – झूठी भविष्यद्वाणी के लिए दुष्परिणाम और प्रतिष्ठा का पतन प्रारम्भ होता है; यह अध्याय दिखाता है कि परमेश्वर के दूतों के संदेश से क्यों असहमति घातक हो जाती है।
2) यिर्मयाह 29:8-9 – स्पष्ट चेतावनी कि लोग जो कहते हैं “ये बात कल होगी” वे सत्य नहीं होते; दमन और अस्थिरता के बजाय परमेश्वर की योजना पर भरोसा रखना चाहिए।
3) यिर्मयाह 38:4 – राज-न्याय के समय धार्मिक नेतृत्व कैसे सत्य के प्रति निष्ठा खो देता है, और नतीजे में कठिनाई आती है।
आईक हिंदी टिप्पणी से एक संक्षিপ्त निष्कर्ष
यिर्मयाह 20:6 यह संकेत करता है कि परमेश्वर के कथन के विरुद्ध आवाज़ उठाने से सामाजिक संबंधों में ग़लतफहमियाँ और दमन उत्पन्न होते हैं। यह संदेश एक कड़वी, पर आवश्यक सच्ता है: प्रभु के मार्ग पर चलने में केवल व्यक्तिगत विश्वास नहीं, समुदाय की स्थिरता भी निहित है।
पंक्तियाँ, जो महत्त्वपूर्ण हैं
जिन उद्धरणों में मैथ्यू हेनरी, अॅल्बर्ट बार्न्स या एडम क्लार्क के शब्द सीधे दिए जा सके, वे नीचे स्पष्ट रूप से उद्धृत किये जाते हैं:
“जो लोग परमेश्वर के वचन के विरुद्ध जाते हैं, उनके घरों में बँधुआई और विनाश आ सकता है।”
नोट: यहाँ पूर्ण पंक्ति के बजाय उनके सिद्धांतों से संकेत लिए गए हैं ताकि मूल भाव स्पष्ट रहें।