यिर्मयाह 20:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

हे यहोवा, तूने मुझे धोखा दिया, और मैंने धोखा खाया; तू मुझसे बलवन्त है, इस कारण तू मुझ पर प्रबल हो गया*। दिन भर मेरी हँसी होती है; सब कोई मुझसे ठट्ठा करते हैं।

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यिर्मयाह 20:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 20:7 पर टिप्पणी — श्रद्धा और वास्तविकता के बीच

प्रधान interpretive point: यह वाक्य यिर्मयाह के मन में भय और आक्रोश के तीव्र द्वंद्व का उद्घाटन है। वह परमेश्वर के बुलावे के बावजूद अपने दायित्वों से थक गया है, और वह यह मान लेना चाहता है कि Yahweh ने उसे धोखा दिया है ताकि वह संकटों में फँस जाए। इस अनुभूति में भी यिर्मयाह एक ईमानदार साक्षी बना रहता है: जब अनुभव प्रत्यक्ष बनकर उसकी धारणा पर प्रश्न खड़ा कर देता है, तब वह भी अपने विश्वास की कसौटी पर अपने शब्दों को रखता है।

साहित्यिक संदर्भ (संदर्भ-विस्तार)

यिर्मयाह के यह अनुभाग उद्धारक संदेश के समय के पंखों पर उठते-उतरते विचार हैं। परमेश्वर का बुलावा और नबियों की दुष्कथा के बीच संचरण में यिर्मयाह की कविता-सी अभिव्यक्ति दिखती है कि ईश्वर का काम आंतरिक पीड़ा के साथ भी सत्य है। अत्याचार, अपमान और नेतागीरी के दबाव के बीच भी उसका संदेश सच्चा है—परिवर्तन की उम्मीद और परीक्षण के समय में भी।

theological significance (धर्मशास्त्रीय महत्व)

इस अंश में दो बातें स्पष्ट होती हैं: एक, धार्मिक अनुभवों में जब लोग कठिनाई के कारणGod को दोष देते हैं, तब भी परमेश्वर की योजना बहिर्प्रवाह बनती है; दो, नबियों के लिए यह असुविधा एक अनुशासन और साक्ष्य की गहराई को दर्शाती है। यह यह भी संकेत देता है कि ईश्वर के बुलावे के समय मनुष्य के भाव-विश्व में उथल-पुथल आ सकती है, परन्तु वचन-विश्वास स्थिर रहता है।

cross-references (सारांश-संदर्भ) और उनके क्लिफ़-उद्धरण

  • 2 कुरिन्थियों 4:8-9 — कष्ट के बीच भी विश्वास बना रहे; आत्मा की क्षय के बजाय विश्वास की पराकाष्ठा।
  • यशायाह 53 — मसीह की पीड़ा और विश्वसनीयता, भले ही मानव हृदय उसे धोखा समझे।
  • भजन 42:5 — आत्मा के भीतर की उम्मीद परमेश्वर में बनी रहे; फिलहाल विपत्ति के समय भी आशा जगा दी जाए।

संक्षिप्त टिप्पणी: भय और कष्ट के क्षणों में भी ईश्वर का काम आत्म-समर्पण से बाहर नहीं है।

Reflection questions (विचार-प्रश्न)

  • क्या आप भी कभी अपने दुख-दर्द में प्रभु को धोखा देने जैसा अनुभव करते हैं? कैसे ईश्वर के वादे पर स्थिर रहा जा सकता है?
  • कष्ट के समय नतीजे कैसे हमारे विश्वास के धागे को और मजबूत कर सकते हैं?

प्रत्ययात्मक निष्कर्ष

यिर्मयाह 20:7 हमारे भीतर की चरम असहायता को भी मान्यता देता है, पर साथ ही यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर के sovereign योजनाएँ मानव अनुभव की कठिनाइयों के ऊपर है। भले ही शास्त्रकार अपने समय की अभाव-भावना में फँसे दिखें, ईश्वर की बुलाहट और सत्यापित वचन ही भविष्य की आशा बनाते हैं।

उद्धरण स्रोत (जो exact quotes उपलब्ध हों): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से आवश्यक उद्धरण स्थित हो तो नीचे संक्षेपित रूप में: “...”

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 20:7 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यदि मैं कहूँ, “मैं उसकी चर्चा न करूँगा न उसके नाम से बोलूँगा,” तो मेरे हृदय की ऐसी दशा होगी मानो मेरी हड्डियों में धधकती हुई आग हो, और मैं अपने को रोकते-रोकते थक गया पर मुझसे रहा नहीं जाता। (1 कुरि. 9:16)

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परन्तु मैं तो कीड़ा हूँ, मनुष्य नहीं; मनुष्यों में मेरी नामधराई है, और लोगों में मेरा अपमान होता है।

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