यिर्मयाह 38:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब उन्होंने यिर्मयाह को लेकर राजपुत्र मल्किय्याह के उस गड्ढे में जो पहरे के आँगन में था, रस्सियों से उतारकर डाल दिया। और उस गड्ढे में पानी नहीं केवल दलदल था, और यिर्मयाह कीचड़ में धँस गया।

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यिर्मयाह 38:6 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 38:6 पर टिप्पणी — संदर्भ और अर्थ

वह समय, जब यिर्मयाह की चेतावनियाँ यहूदियों के शहजरों (राजनीतिक शक्तियों) के विरुद्ध पड़ती हैं, राजा और उसके conseiller तिरस्कार करते हैं। इस पंक्ति में यिर्मयाह को एक गहरे बंधन में ले जाया गया, जहाँ एक गड्ढा जो पहरे के आँगन में था, उसमें डाल दिया गया। यह गड्ढा दलदल था और वहाँ पानी नहीं था, बल्कि कीचड़ यिर्मयाह के ऊपर समा गया। यह दृश्य स्पष्ट करता है कि यदि परमेश्वर के दूतावह संदेशों को ठेस पहुँचती है, तो मानवीय दमन और उत्पीड़न उनके जीवन को खतरे में डाल सकता है, पर वही मूर्ति-भंग न कर सके जो ईश्वर की योजना है।

मुख्य विचार

1) दबाव और गड़बड़ हालत में भी विश्वास की आस्था — यिर्मयाह को दलदल में डालना किसी संकट का प्रमाण है, पर ईश्वर की दृष्टि में वह पवित्र और महत्त्वपूर्ण प्रेषक बना रहता है।

2) दयालुता और पथ परिवर्तन की माँग — गड्ढे से निकालने का क्रम उस समय के साथ-साथ संस्करणों में से एक है, जहाँ ब्रह्मांडीय न्याय और लेखक की करुणा सामने आते हैं।

3) दुष्कल्पित प्रतिरोध के बीच भगवान की सुरक्षा — यह घटना दिखाती है कि परमेश्वर अपने दास की रक्षा के लिए रास्ते बनाता है, भले ही लोग उन्हें अस्वीकार करें।

मुख्य विषय

  • कष्ट और विश्वास: निर्वचन के समय यिर्मयाह पर पड़ने वाला दबाव कैसे विवेक और कथन के बीच संतुलन बनाता है।
  • प्रत्यावर्तन और उद्धार: गड्ढे से बाहर आने की कहानी में उद्धार की संभावना और ईश्वर की कृपा के संकेत।
  • न्याय बनाम सन्ताप: सत्ता के द्वारा दिया गया दमन और भगवान की न्याय की योजना के बीच संघर्ष।

संबंधित verses (संक्षिप्त संयोग)

यिर्मयाह 38:6 से प्रेरित, अन्य अनुभाग जो संकट के बीच विश्वास की कहानी बताते हैं:

  • यिर्मयाह 38:7-13 — यिर्मयाह को सुरक्षित निकालना और ईश्वर के उद्देश्य की पुष्टि।
  • नीतिविवेक से भरे अनुभव: गर्मी और अंधकार के बीच भी ईश्वर के प्रेषक के रूप में भूमिका में दृढ़ता।

इन संदर्भों में, उद्धार के लिए ईश्वर की कृपा और मानव-प्रतिरोध की सीमा स्पष्ट होती है, और यह बताती है कि कैसे सत्य के लिए साहस रखने वालों की रक्षा होती है।

व्यावहारिक प्रबंधन और प्रतिबिंब

हम ऐसे समय में भी जो चुनौतियाँ सामने आते हैं, में विश्वास बनाए रखें। कठिन परिस्थितियाँ मानवत्व की कमजोरी नहीं बनाती; वे ईश्वर की शक्ति को दिखाने का अवसर बनाती हैं। यिर्मयाह के पात्र की तरह, हमें भी कठिन परिस्थितियों में सत्य के संदेश पर अडिग रहना चाहिए और परमेश्वर की सहायता की प्रतीक्षा करनी चाहिए।

संक्षिप्त समापन

यिर्मयाह 38:6 में दिखी कहानी, दबाव के बीच भी ईश्वर के दास के प्रति प्रेम और उद्धार की आशा को रेखांकित करती है। यह बताती है कि असहाय दिखने वाले पल भी परमेश्वर के उद्देश्य को आगे बढ़ाते हैं, और उनका क्रम वही रहता है जो जीवन-सत्य की रक्षा करते हैं।

Cross-references: यिर्मयाह 39:4-6 (उद्धार के संकेत), दानियेल 6:22-23 (निरपेक्ष विश्वास में उद्धार), भजन 34:19 (कष्ट के समय ईश्वर की निकटता).

नोट: यहाँ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सीधे पाठ से कोई पूर्ण उद्धरण नहीं दिए गए हैं, पर उनके विचारों के सार इस रूपरेखा में समाहित हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 38:6 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यिर्मयाह 37:21 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यिर्मयाह 37:21 (HINIRV) »
तब सिदकिय्याह राजा की आज्ञा से यिर्मयाह पहरे के आँगन में रखा गया, और जब तक नगर की सब रोटी न चुक गई, तब तक उसको रोटीवालों की दूकान में से प्रतिदिन एक रोटी दी जाती थी। यिर्मयाह पहरे के आँगन में रहने लगा।

भजन संहिता 69:14 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
भजन संहिता 69:14 (HINIRV) »
मुझ को दलदल में से उबार, कि मैं धँस न जाऊँ; मैं अपने बैरियों से, और गहरे जल में से बच जाऊँ।

भजन संहिता 69:2 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
भजन संहिता 69:2 (HINIRV) »
मैं बड़े दलदल में धँसा जाता हूँ, और मेरे पैर कहीं नहीं रूकते; मैं गहरे जल में आ गया, और धारा में डूबा जाता हूँ।

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